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मात्र 30.86 मिलियन घन मीटर पानी बंटेगा यूपी और एमपी के बीच
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 30 Oct 2017 11:43 PM IST
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रनगवां बांध
- फोटो : अमर उजाला
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हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पहली नवंबर को यूपी-एमपी के सिंचाई विभाग अभियंता एक साथ बैठ कर रनगवां बांध के पानी का बंटवारा करेंगे। हालांकि बांध में मात्र 30.86 मिलियन घन मीटर पानी है। बारिश कम होने से मात्र 20 फीसदी ही उपयोगी पानी भर पाया है। रनगवां की कुल उपयोगी क्षमता 155.18 मिलियन घन मीटर है। लेकिन पानी सिर्फ 30.86 मिलियन घन मीटर ही भर पाया है। इसी पानी से पहली से 7 नवंबर तक सात दिन केन नहर चलाई जाएगी।
रनगवां बांध निर्माण के समय से ही इसके पानी के बंटवारे का समझौता हो गया था। तब से यह बरकरार है। हर वर्ष पहली नवंबर को यूपी की ओर से बांदा और एमपी की ओर से छतरपुर सिंचाई विभाग के अभियंता एक साथ बैठ कर उपलब्ध पानी का बंटवारा 36:15 के अनुपात में करते हैं। अबकी बारिश कम होने से रनगवां बांध समेत गंगऊ समेत बरियारपुर वीयर में पानी का भारी टोटा है। रनगवां बांध में पानी की उपयोगी क्षमता 155.18 मिलियन घन मीटर है। लेकिन इस वर्ष क्षमता से 124.32 मिलियन घन मीटर पानी कम भरा है।
मात्र 30.86 मिलियन घन मीटर पानी ही उपयोग में लाया जा सकेगा। इस उपयोगी पानी में बांदा और छतरपुर के सिंचाई विभाग निर्धारित 36:15 अनुपात के मुताबिक बंटवारा करेंगे। बंटवारे के इसी पानी से बांदा का सिंचाई विभाग पहली से 7 नवंबर तक अपनी मुख्य केन नहर चलाएगा। हालांकि मध्य प्रदेश ने कई दिन पूर्व बांध का कुछ पानी ले लिया है। लेकिन बांदा के सिंचाई प्रखंड (तृतीय) अधिशासी अभियंता मोतीलाल का कहना है कि रनगवां के सभी फाटक बंद हैं और उन पर लगातार नजर रखी जा रही है। हर वर्ष की तरह इस बार भी पहली नवंबर को बंटवारे की बैठक होगी।
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उधर, बुंदेलखंड के अन्य बांधों की भी कमोवेश रनगवां जैसी हालत है। गंगऊ की उपयोगी क्षमता 56.46 मिलियन घन मीटर है। लेकिन इसमें 14.47 मिलियन घन मीटर पानी ही उपयोग के लिए भर पाया है। बरियारपुर की उपयोगी क्षमता 12.6 मिलियन घन मीटर है। इसमें पानी मात्र 0.75 मिलियन घन मीटर ही उपलब्ध है। यह बांध मात्र 6 फीसदी उपयोगी पानी जमा कर पाया है।
गंगऊ व रनगवां बांध (छतरपुर), बरियारपुर (पन्ना), ओहन व बरुआ (चित्रकूट), अर्जुन बांध, चंद्रावल बांध, कबरई बांध, मझगवां बांध और उर्मिल बांध का जिम्मा सिंचाई कार्य मंडल बांदा को मिला हुआ है। मौदहा बांध और गुंता व रसिन बांध सिंचाई निर्माण मंडल महोबा के जिम्मे है।
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रनगवां बांध निर्माण के समय से ही इसके पानी के बंटवारे का समझौता हो गया था। तब से यह बरकरार है। हर वर्ष पहली नवंबर को यूपी की ओर से बांदा और एमपी की ओर से छतरपुर सिंचाई विभाग के अभियंता एक साथ बैठ कर उपलब्ध पानी का बंटवारा 36:15 के अनुपात में करते हैं। अबकी बारिश कम होने से रनगवां बांध समेत गंगऊ समेत बरियारपुर वीयर में पानी का भारी टोटा है। रनगवां बांध में पानी की उपयोगी क्षमता 155.18 मिलियन घन मीटर है। लेकिन इस वर्ष क्षमता से 124.32 मिलियन घन मीटर पानी कम भरा है।
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मात्र 30.86 मिलियन घन मीटर पानी ही उपयोग में लाया जा सकेगा। इस उपयोगी पानी में बांदा और छतरपुर के सिंचाई विभाग निर्धारित 36:15 अनुपात के मुताबिक बंटवारा करेंगे। बंटवारे के इसी पानी से बांदा का सिंचाई विभाग पहली से 7 नवंबर तक अपनी मुख्य केन नहर चलाएगा। हालांकि मध्य प्रदेश ने कई दिन पूर्व बांध का कुछ पानी ले लिया है। लेकिन बांदा के सिंचाई प्रखंड (तृतीय) अधिशासी अभियंता मोतीलाल का कहना है कि रनगवां के सभी फाटक बंद हैं और उन पर लगातार नजर रखी जा रही है। हर वर्ष की तरह इस बार भी पहली नवंबर को बंटवारे की बैठक होगी।
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उधर, बुंदेलखंड के अन्य बांधों की भी कमोवेश रनगवां जैसी हालत है। गंगऊ की उपयोगी क्षमता 56.46 मिलियन घन मीटर है। लेकिन इसमें 14.47 मिलियन घन मीटर पानी ही उपयोग के लिए भर पाया है। बरियारपुर की उपयोगी क्षमता 12.6 मिलियन घन मीटर है। इसमें पानी मात्र 0.75 मिलियन घन मीटर ही उपलब्ध है। यह बांध मात्र 6 फीसदी उपयोगी पानी जमा कर पाया है।
गंगऊ व रनगवां बांध (छतरपुर), बरियारपुर (पन्ना), ओहन व बरुआ (चित्रकूट), अर्जुन बांध, चंद्रावल बांध, कबरई बांध, मझगवां बांध और उर्मिल बांध का जिम्मा सिंचाई कार्य मंडल बांदा को मिला हुआ है। मौदहा बांध और गुंता व रसिन बांध सिंचाई निर्माण मंडल महोबा के जिम्मे है।