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मृत किसानों पर लगाए लांछन, मौतों पर झोंकी धूल
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 25 Mar 2015 11:43 PM IST
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चापलूसी भरी रिपोर्टों से शासन को ‘खुश’ करने की कवायदें अफसरों ने शुरू कर दी हैं। किसी किसान की मौत बीमारी से बताई है तो किसी पर पत्नी से झगड़कर जान दे देने की बात कही गई है।
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कुछ किसानों को शराब का लती भी बता डाला है। अपर आयुक्त ने एसडीएम और तहसीलदारों की रिपोर्टों का हवाला देकर पूरे मंडल में किसानों की मौत की वजह बर्बाद फसल खारिज कर दी है।
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ओलावृष्टि और बारिश से पूरे मंडल के किसानों में हाहाकार मचा है। ज्यादातर किसान बैंक के लाखों रुपये के कर्जदार भी हैं। कई किसानों को युवा बेटियों की शादी की चिंता है। उधर, बैंक और साहूकार कर्ज अदायगी का दबाव बना रहे हैं।
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फसलों के दगा दे जाने से तमाम किसानों की हिम्मत जवाब दे रहा है। ऐसे एक दर्जन से ज्यादा किसानों की असामयिक मौत हो गई है। कुछ फसल के सदमे में हार्ट फेल होने से चल बसे तो कुछ ने परेशान होकर जान दे दी।
किसानों की मौत की खबरें अखबारों में छप रही हैं। ऐसे में पिछले सालों की तरह एक बार फिर किसानों की मौतों पर धूल झोंकने के लिए अफसर सामने आ गए हैं। मौतों पर मुहर लगाकर सरकारी खजाने से मदद दिलाने के बजाए मृतक किसानों के आश्रितों को शर्मिंदा और जलील करने वाले बयान और जांच रिपोर्ट दे रहे हैं।
चित्रकूटधाम मंडल के अपर आयुक्त बी राम ने बुधवार को जारी प्रेस नोट में कहा है कि किसानों की मौत का कारण जानने के लिए एसडीएम और तहसीलदारों से जांच कराई गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि किसानों की मृत्यु फसलों के नुकसान से नहीं हुई।
बांदा डीएम की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा है कि बबेरू तहसील के भांटी गांव में किसान नरेंद्र सिंह ने फांसी लगाकर जान दी है, लेकिन जांच रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि फांसी क्यों लगाई?
इसी तरह रामऔतार (अनथुवा), राम लखन (घनसौल, बबेरू) की मौत टीबी से और राम नरेश उर्फ राजाबाबू (सिकलोढ़ी, अतर्रा) की मौत की वजह पत्नी से विवाद बताई गई।
महोबा डीएम की रिपोर्ट के मुताबिक रामकिशुन (ननौरा) की बुढ़ापे से मौत हो हुई। हाकिम सिंह (तमौरा) की बीमारी, शिव मगल (सिरसी खुर्द) की लकवा, विश्वनाथ (बम्हौरी खुर्द) और बिहारीलाल (विजयपुर) की बीमारी से मौत बताई गई है।
इसके अलावा धर्मेंद्र कुमार कुलपहाड़ की फांसी लगाने की वजह मानसिक रूप से बीमार होना बताया गया है। राजेश कुमार (बिहुनी खुर्द) की मौत को भी मानसिक रूप से जोड़ा गया है।
हमीरपुर डीएम की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया है कि इंद्रजीत द्विवेदी (कुनेहटा) ने फांसी लगा ली है, लेकिन वजह नहीं बताई गई। मरने के बाद भी किसानों पर लांछन लगाते हुए प्रशासन ने किसान प्रभात कुमार (बिहुनी खुर्द) की मौत की वजह घरेलू तनाव और शराब का लती बताया है।
फूलचंद्र (पचखुरा खुर्द) की मौत की वजह बुढ़ापा और सुख देव (कंडौरा) की मौत का कारण शुगर की बीमारी बताई है। इसी तरह सुके (राठ) को शारीरिक रूप से कमजोर होने और बलराम (अटगांव) की मौत कैंसर से बताई गई है। चित्रकूट डीएम की आख्या के मुताबिक किसान रामस्वरूप (अमिलिहा) की मौत हृदय रोग से पीड़ित होना बताया गया है।
इसी तरह बिहारीलाल (उसरीपुरवा) की मौत को बुढ़ापे की स्वाभाविक मौत बताया है। बबेरू प्रतिनिधि के अनुसार, चकरेही गांव में दो किसानों की मौत को भी प्रशासन ने फसलों के सदमे से खारिज कर दिया है। एसडीएम ने नायब तहसीलदार की जांच रिपोर्ट का हवाला देकर दोनों की मौत बीमारी से बताई है।
चकरेही में शंभू पुत्र बच्ची और सूरजबली पुत्र फत्ते की अचानक मौत हो गई है। इस पर एसडीएम द्वारा दी गई सफाई में कहा है कि शंभू टीबी का मरीज था। उसके पास आठ बीघा जमीन है। हालांकि एसडीएम ने यह स्वीकारा है कि शंभू की फसल को भी नुकसान पहुंचा है, लेकिन मौत की वजह आर्थिक तंगी या फसलों की बर्बादी नहीं मानी है।
इसी तरह सूरजबली के मामले में कहा गया है कि मृतक के नाम कोई भूमि नहीं है। वह मंदिर में पूजा-पाठ करता था। उसे श्वांस की बीमारी थी।