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Banda News: आम आदमी ही नहीं, डीएम भी आधा घंटा जाम में जूझे
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बांदा। शहर में अतिक्रमण और ई-रिक्शा चालकों की भीड़ ने जाम की समस्या को नासूर बना दिया है। मंगलवार को दोपहर रोडवेज बस स्टैंड के पास डीएम की गाड़ी व उनका स्कॉर्ट भी जाम में फंस गया। करीब 30 मिनट तक वह आगे नहीं बढ़ पाए। पीछे चल रहे सुरक्षा कर्मियों ने कड़ी मशक्कत की, तब कहीं वह जाम से निकल पाए। करीब एक घंटे तक चले जाम में एंबुलेंस व स्कूली बसें भी फंसी रहीं।
जिले का मुखिया ही यदि अव्यवस्था का शिकार हो जाए तो इस सवाल खड़े होने लाजिमी हैं। मंगलवार को रोडवेज बस स्टैंड में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। दोपहर करीब 12 बजे जिलाधिकारी की फ्लीट संकटमोचन होते हुए रोडवेज के रास्ते गुजरी। इसमें आगे मजिस्ट्रेट लिखा वाहन, बीच में जिलाधिकारी नागेंद्र प्रताप और उसके पीछे उनके स्कॉर्ट का वाहन रहा। जैसे ही रोडवेज बस स्टैंड के सामने उनका काफिला पहुंचा, तभी रोडवेज बस स्टैंड से बाहर हाईवे पर निकली। सामने से प्राइवेट बसों, ई-रिक्शा की लाइन नजर आई। इससे भीषण जाम लग गया। पहले ही गेट पर डीएम जाम में फंस गए। स्कार्ट वाहन से सुरक्षा कर्मी उतरे और लाठी पटकनी शुरू की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। कड़ी धूप में करीब आधा घंटा की मशक्कत के बाद उनका वाहन आगे बढ़ पाया। डीएम की फ्लीट निकलने के बाद फिर जाम लगा, लेकिन वह इसकी परवाह किए बिना आगे बढ़ गए।
उधर, बाबूलाल चौराहा में जाम को खत्म करने के लिए चौड़ीकरण कर इलेक्ट्रानिक सिग्नल लगवाए गए। इसके बाद भी यहां जाम का झाम खत्म नहीं हो सका। यहां अतर्रा, नरैनी जाने वाली डग्गामार बसों, रोडवेज बस, टैक्सियों का अवैध जमावड़ा रहता है। मंगलवार को यहां दोपहर में जाम लगा तो लोग काफी देर तक फंसे रहे। एंबुलेंस, स्कूली वाहन और बाइक सवार तक आगे नहीं बढ़ पाए। जाम में फंसे वाहनों को पुलिस कर्मी हटाते रहे, पर रोड किनारे खड़ी डग्गामार बसों व टैक्सियों के चालकों से कुछ नहीं बोले। नतीजा यह है कि शहर में झांसी-मिर्जापुर नेशनल हाईवे में दोनों तरफ अतिक्रमण हो गया है।
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-शहर में अतिक्रमण हटाने के लिए मोहर्रम के बाद टीमें गठित की जाएंगी। ई-रिक्शा चालकों व डग्गामार वाहनों पर भी कार्रवाई होगी।
-संदीप केला, नगर मजिस्ट्रेट, बांदा
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जिले का मुखिया ही यदि अव्यवस्था का शिकार हो जाए तो इस सवाल खड़े होने लाजिमी हैं। मंगलवार को रोडवेज बस स्टैंड में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। दोपहर करीब 12 बजे जिलाधिकारी की फ्लीट संकटमोचन होते हुए रोडवेज के रास्ते गुजरी। इसमें आगे मजिस्ट्रेट लिखा वाहन, बीच में जिलाधिकारी नागेंद्र प्रताप और उसके पीछे उनके स्कॉर्ट का वाहन रहा। जैसे ही रोडवेज बस स्टैंड के सामने उनका काफिला पहुंचा, तभी रोडवेज बस स्टैंड से बाहर हाईवे पर निकली। सामने से प्राइवेट बसों, ई-रिक्शा की लाइन नजर आई। इससे भीषण जाम लग गया। पहले ही गेट पर डीएम जाम में फंस गए। स्कार्ट वाहन से सुरक्षा कर्मी उतरे और लाठी पटकनी शुरू की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। कड़ी धूप में करीब आधा घंटा की मशक्कत के बाद उनका वाहन आगे बढ़ पाया। डीएम की फ्लीट निकलने के बाद फिर जाम लगा, लेकिन वह इसकी परवाह किए बिना आगे बढ़ गए।
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उधर, बाबूलाल चौराहा में जाम को खत्म करने के लिए चौड़ीकरण कर इलेक्ट्रानिक सिग्नल लगवाए गए। इसके बाद भी यहां जाम का झाम खत्म नहीं हो सका। यहां अतर्रा, नरैनी जाने वाली डग्गामार बसों, रोडवेज बस, टैक्सियों का अवैध जमावड़ा रहता है। मंगलवार को यहां दोपहर में जाम लगा तो लोग काफी देर तक फंसे रहे। एंबुलेंस, स्कूली वाहन और बाइक सवार तक आगे नहीं बढ़ पाए। जाम में फंसे वाहनों को पुलिस कर्मी हटाते रहे, पर रोड किनारे खड़ी डग्गामार बसों व टैक्सियों के चालकों से कुछ नहीं बोले। नतीजा यह है कि शहर में झांसी-मिर्जापुर नेशनल हाईवे में दोनों तरफ अतिक्रमण हो गया है।
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-शहर में अतिक्रमण हटाने के लिए मोहर्रम के बाद टीमें गठित की जाएंगी। ई-रिक्शा चालकों व डग्गामार वाहनों पर भी कार्रवाई होगी।
-संदीप केला, नगर मजिस्ट्रेट, बांदा