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रात में भी लहरा रहा राष्ट्रीय ध्वज

Thu, 19 Aug 2021 11:09 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Aug 2021 11:09 PM IST
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National flag waving even at night
बांदा। सूर्यास्त के बाद रात में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराने को भारतीय ध्वज संहिता के विपरीत माना जा रहा है। चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय बांदा में दो स्थानों रेलवे स्टेशन और नवाब टैंक में राष्ट्रीय ध्वज लगाएं गए हैं। यह रात को भी नहीं उतारे जाते।
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बिजली आपूर्ति बंद हो जाने पर राष्ट्रीय ध्वज अंधेरे में डूब जाते हैं। यह ध्वज संहिता के विपरीत है। दोनों विभागों के अधिकारी अपनी दलीलें देकर इसे संहिता का उल्लंघन नहीं मानते। भारतीय ध्वज संहिता में स्पष्ट कहा गया कि राष्ट्रीय ध्वज सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाएगा।
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जब भी फहराया जाए उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। संहिता में यह भी कहा गया कि विशेष अवसरों पर इसे रात में भी फहराया जा सकता है, जबकि यहां नवाब टैंक और रेलवे स्टेशन में यह स्थायी रूप से रात को भी लहरा रहे हैं।
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नवाब टैंक के सरदार वल्लभ भाई आक्सीजन पार्क में स्वतंत्रता दिवस पर जनप्रतिनिधियों, अफसरों ने 151 फीट ऊं चे पोल पर ध्वजारोहण किया। तब से ध्वज फहर रहा है। इसके चारों ओर नीचे तेज रोशनी की लाइटें लगाईं गईं हैं। यह ध्वज बांदा विकास प्राधिकरण ने लगवाया है। वही पार्क बनवा रहा है।
ध्वज नियमों का नहीं होता पालन---
भारतीय ध्वज संहिता में प्रावधान है कि ध्वज का फहराते और उतारते समय बिगुल बजाया जाए। यह ध्यान रखा जाए कि बिगुल की आवाज के साथ ध्वज उतारा और फहराया जाना चाहिए। ध्वज को तेजी से डोरी खींचकर नीचे से ऊपर चढ़ाया जाए।
उतारते समय धीरे-धीरे उतारा जाए, लेकिन अधिकांश सरकारी, गैर सरकारी इमारतों में इस संहिता का पालन नहीं होता।
अफसर बोले, संहिता का उल्लंघन नहीं
सूर्यास्त के बाद भी रात में राष्ट्रीय ध्वज फहराते रहने पर बांदा विकास प्राधिकरण सचिव बाबू सिंह ने दलील दी कि 100 फीट से ऊंचे वाले राष्ट्रीय ध्वज में रात को भी उतारना जरूरी नहीं है। अलबत्ता उसमें पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। पार्क के ध्वज में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गई है।

उधर, रेलवे स्टेशन परिसर में 101 फीट ऊंचाई पर लगाए गए राष्ट्रीय ध्वज के बाबत रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी (झांसी परिक्षेत्र) मनोज कुमार सिंह का कहना है कि रेलवे ने कई स्टेशनों पर यह ऊंचे ध्वज लगवाएं हैं। इनमें रात में ध्वजों में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गई है। ध्वज अंधेेरे में नहीं रहना चाहिए। इसमें कोई नियम का उल्लंघन नहीं है।
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