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जमीन यूपी की, एमपी ने शुरू कराई नहर खुदाई
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बांदा। सरकारें तो मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में भाजपा की ही हैं, लेकिन एक बार फिर मध्यप्रदेश ने यूपी संग विवाद की स्थिति पैदा कर दी है। एमपी सरकार के सिंचाई विभाग ने दबंगई दिखाते हुए यूपी के हिस्से वाली जमीन में बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लिए बरियारपुर बांध के डूब क्षेत्र से नहर खुदाई का काम शुरू करा दिया, लेकिन यूपी के सिंचाई विभाग ने भी त्वरित फैसला लेते हुए काम रुकवा दिया है। यूपी के सिंचाई विभाग द्वारा काम रुकवाने से एमपी सिंचाई विभाग ने भी आंखें तरेर ली हैं। फिलहाल नहर खुदाई का काम तो बंद है, लेकिन एमपी की इस मनमानी से यूपी सिंचाई विभाग के कब्जे वाली लगभग 1050 मीटर भूमि नहर में डूबने की आशंका पैदा हो गई है।
दोनों सूबों के समझौते के तहत यूपी सिंचाई विभाग (बांदा) के कब्जे में लगभग 285 हेक्टेयर जमीन है। इसी में बरियारपुर बांध भी है। इसकी देखरेख का जिम्मा बांदा सिंचाई प्रखंड तृतीय की है। खास बात यह है कि दोनों सूबों में भाजपा की सरकारें होने के बाद भी पानी विवाद का मसला सुलझ नहीं पा रहा। एमपी के पन्ना जिले की सरहद पर केन नदी में बरियारपुर बांध/वियर है। एमपी सिंचाई विभाग मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत लगभग 250 करोड़ की लागत से 2.7 किमी लंबी नहर (एप्रोच चैनल) निकाल रहा है। इस नहर को मझगवां (पन्ना) में बन रहे बांध में मिलाया जाना है। वर्ष 2016 में नहर खुदाई शुरू हुई थी। बांदा सिंचाई विभाग ने अड़ंगा लगाते हुए खुदाई रुकवा दी थी। यूपी-एमपी सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बैठक भी की, लेकिन बात नहीं बनी थी। न ही यूपी के हिस्से वाली जमीन में नहर खुदवाने को लेकर कोई अभिलेख आदि पेश कर सके थे। प्रकरण शासन स्तर तक पहुंचा गया था।
इस दौरान एमपी सिंचाई विभाग ने यूपी के हिस्से वाली जमीन छोड़कर अपनी भूमि पर नहर खुदाई का काम पूरा कर डाला। अब दो दिन पूर्व बांदा सिंचाई विभाग के कब्जे वाली जमीन पर पोकलैंड और जेसीबी से खुदाई शुरू करा दी। इसमें यूपी सिंचाई विभाग की लगभग 1050 मीटर जमीन जा रही है। बरियारपुर डूब क्षेत्र वाली उस जमीन से नहर निकाली जा रही है, जिसे यूपी सिंचाई विभाग स्थानीय किसानों को खेतीबाड़ी के लिए पट्टे पर देता रहा है। एमपी में बांध होने के बाद भी इसके मेंटीनेंस आदि का जिम्मा बांदा सिंचाई विभाग का है। हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं। बरियारपुर बांध से एक नहर एमपी की पहले से निकली है। यह दूसरी नई नहर निकाली जा रही है।
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जेई के विरोध पर एमपी ने काम रोका
यूपी के हिस्से वाली जमीन पर एमपी सिंचाई विभाग द्वारा नहर खुदाई शुरू करने की भनक लगते ही बांदा सिंचाई प्रखंड तृतीय के अवर अभियंता धीरेंद्र प्रताप मौके पर पहुंचे और जल संसाधन संभाग, पवई (पन्ना) के कार्य पालन यंत्री बीएल काडिरिया से विरोध जताते हुए काम रुकवा दिया। एमपी के अभियंता यूपी की जमीन में खुदाई से संबंधित कोई अनुमतिपत्र नहीं दिखा सके। न ही अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) था। जेई धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि उन्होंने अजयगढ़ (पन्ना) थाने के निरीक्षक को तहरीर दी, लेकिन उन्होंने यह कहकर सहयोग करने से मना कर दिया कि यूपी-एमपी का मामला है। जेई ने बताया कि वह रिपोर्ट विभागीय बड़े अफसरों को भेज देंगे।
नहर में जा रही 10 किसानों की 26.78 एकड़ भूमि
मध्य प्रदेश के सिंचाई विभाग द्वारा खोदी जा रही नहर से बांध की भूमि के पट्टाधारक और किसान चिंतित हैं। उन्हें पुश्तैनी जमीन छिनने का डर सता रहा है। नहर खुदाई में लगभग 10 पट्टाधारकों की 26 एकड़ 78 डिस्मिल जमीन जा रही है। प्रभावित किसान भी विरोध में यूपी सिंचाई विभाग का पूरा सहयोग कर रहे हैं। किसानों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के सिंचाई विभाग द्वारा पूर्व में नहर की खुदाई बरियारपुर बांध के डूब क्षेत्र से एक किमी दूर भपूतपुर कुर्मियान गांव से की जानी थी, पर मनमानी करते हुए नक्शा बदलकर उनके पट्टे की जमीनों से नहर निकाली जा रही है। यूपी सिंचाई विभाग के जेई द्वारा काम रुकवाने पर खुशी जताई है। (संवाद)
पट्टाधारक किसान गेस्टहाउस के बाहर डटे रहे
दोनों सूबों के इंजीनियरों के आने की खबर सुनकर पट्टाधारक किसान बरियारपुर बांध के नजदीक बने यूपी सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस के बाहर डटे रहे। इनमें अधिकांश महिलाएं और बुजुर्ग थे। उनकी नजरें दोनों ओर के अभियंताओं के निर्णय पर टिकी थी। पट्टाधारक रामकृपाल केवट, धनीराम केवट व हरदास अहिरवार ने बताया कि बांदा सिंचाई विभाग के कब्जे वाली जमीन में वे लोग पुरखों के समय से खेतीबाड़ी करते आ रहे हैं। इसी से परिवार का गुजारा हो रहा है। किसानों ने बताया कि बांदा सिंचाई विभाग द्वारा पिछले कई वर्षों से उनके पट्टों का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा। फिर भी वह जमीन पर काबिज हैं और खेतीबाड़ी कर रहे हैं। (संवाद)
इन पट्टा किसानों की जा रही जमीन (एकड़ में)-
रामकृपाल-2.34 एकड़, धनीराम केवट-2.34, हरदास अहिरवार- 3.29, पप्पू श्रीवास-2.75, पिंटू केवट- 2.60, छकुवा- 2.75, रामस्वरूप- 2.75, मनोज- 2.61, भगवानदास- 2.75 व सुनीता-2.60 एकड़।
इंसेट---
115 साल पुराना है बरियारपुर बांध
मध्य प्रदेश की जमीन में बना बरियारपुर बांध लगभग 115 साल पुराना है। इसका निर्माण 1906 में अंग्रेजी हुकूमत में हुआ था। करीब 650 मीटर लंबी दीवार है। इसमें 100 से ज्यादा फाटक हैं। सिंचाई प्रखंड तृतीय के मुताबिक, सौ साल की उम्र पार कर चुके इस बांध से यूपी को लगभग 36 टीसीएम (ट्रिलिएंट क्यूबिक मीटर) पानी मिलता है। इसकी देखरेख/मरम्मत पर विभाग हर वर्ष लाखों रुपये खर्च करता है। इसके अलावा मध्यप्रदेश में ही स्थित गंगऊ और रनगवां बांध की भी जिम्मेदारी बांदा सिंचाई विभाग की है। ग्रामीणों के मुताबिक, सिल्ट जमा होने से पानी का स्टोरेज कम हो गया है। (संवाद)
इंसेट---
यूपी के पानी पर एमपी की खराब रहती नीयत
यूपी-एमपी दोनों राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। इसके बाद भी पानी को लेकर यूपी-एमपी में विवाद होता है। वर्ष 1977 में दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे समेत कई मुद्दों पर समझौता हुआ था। तय हुआ था कि बांधों का रखरखाव यूपी का बांदा सिंचाई विभाग करेगा, इसलिए पानी पर यूपी का अधिकार भी ज्यादा होगा। समझौते के मुताबिक, 36 टीसीएम यूपी (बांदा) और 15 टीसीएम एमपी को पानी मिलेगा, पर मध्य प्रदेश ने कई बार समझौतों का उल्लंघन किया। बरियारपुर सहित गंगऊ, रनगवां बांधों के पानी पर मध्य प्रदेश की हमेशा नीयत खराब रही। कई बार जबरन गेट खोलकर यूपी के हिस्से का पानी लूट लिया गया। वहां के जनप्रतिनिधियों ने कई बार दबंगई पूर्वक बांधों के गेट खुलवाकर यूपी का पानी एमपी की नहरों में बहा दिया। डेड स्टोर होने के बाद भी सैल्यूस गेट खोलकर तलहटी का पानी निकाल लिया। कई विवाद तो शासन स्तर तक भी पहुंचे। (संवाद)
इंसेट---
एमपी पुलिस ने दर्ज नहीं की एफआईआर
बांदा। बरियारपुर बांध के नजदीक यूपी सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाली जमीन पर जबरन नहर खुदाई करा रहे एमपी सिंचाई विभाग का मामला पुलिस तक पहुंच गया है। यूपी सिंचाई विभाग के सींचपाल ने एमपी के अजयगढ़ (पन्ना) थाना और हनुमतपुर रिपोर्टिंग चौकी में तहरीर दी है। हालांकि, पुलिस ने यूपी-एमपी का मसला बताकर रिपोर्ट दर्ज करने से पल्ला झाड़ लिया है। सिंचाई प्रखंड तृतीय के जेई धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि बरियारपुर बांध में तैनात सींचपाल सतेंद्र सिंह ने शुक्रवार की शाम पन्ना (एमपी) जिले के अजयगढ़ थाना और हनुमतपुर पुलिस चौकी प्रभारी को तहरीर देकर कहा कि एमपी सिंचाई विभाग द्वारा यूपी सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाली भूमि पर कई बार बिना एनओसी खुदाई का प्रयास किया गया। बांदा सिंचाई प्रखंड तृतीय के अभियंताओं के विरोध पर काम रोका गया। एनओसी प्रकरण शासन स्तर पर अभी लंबित है। अब फिर एमपी सिंचाई विभाग के अधिकारी और ठेकेदार बिना किसी आदेश व एनओसी के खुदाई करा रहे, जो अवैध है। जेई ने बताया कि पुलिस ने तहरीर अपने पास सुरक्षित रख ली, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की। न ही खुदाई रोकने में दिलचस्पी दिखाई। उधर, अजयगढ़ थाना इंस्पेक्टर का कहना था कि यह यूपी-एमपी का मसला है। बिना जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर वह कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। जेई के मुताबिक, फिलहाल यूपी की जमीन पर खुदाई कार्य रुका है। शनिवार को एमपी सीमा पर कार्य होता रहा। (संवाद)
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दोनों सूबों के समझौते के तहत यूपी सिंचाई विभाग (बांदा) के कब्जे में लगभग 285 हेक्टेयर जमीन है। इसी में बरियारपुर बांध भी है। इसकी देखरेख का जिम्मा बांदा सिंचाई प्रखंड तृतीय की है। खास बात यह है कि दोनों सूबों में भाजपा की सरकारें होने के बाद भी पानी विवाद का मसला सुलझ नहीं पा रहा। एमपी के पन्ना जिले की सरहद पर केन नदी में बरियारपुर बांध/वियर है। एमपी सिंचाई विभाग मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत लगभग 250 करोड़ की लागत से 2.7 किमी लंबी नहर (एप्रोच चैनल) निकाल रहा है। इस नहर को मझगवां (पन्ना) में बन रहे बांध में मिलाया जाना है। वर्ष 2016 में नहर खुदाई शुरू हुई थी। बांदा सिंचाई विभाग ने अड़ंगा लगाते हुए खुदाई रुकवा दी थी। यूपी-एमपी सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बैठक भी की, लेकिन बात नहीं बनी थी। न ही यूपी के हिस्से वाली जमीन में नहर खुदवाने को लेकर कोई अभिलेख आदि पेश कर सके थे। प्रकरण शासन स्तर तक पहुंचा गया था।
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इस दौरान एमपी सिंचाई विभाग ने यूपी के हिस्से वाली जमीन छोड़कर अपनी भूमि पर नहर खुदाई का काम पूरा कर डाला। अब दो दिन पूर्व बांदा सिंचाई विभाग के कब्जे वाली जमीन पर पोकलैंड और जेसीबी से खुदाई शुरू करा दी। इसमें यूपी सिंचाई विभाग की लगभग 1050 मीटर जमीन जा रही है। बरियारपुर डूब क्षेत्र वाली उस जमीन से नहर निकाली जा रही है, जिसे यूपी सिंचाई विभाग स्थानीय किसानों को खेतीबाड़ी के लिए पट्टे पर देता रहा है। एमपी में बांध होने के बाद भी इसके मेंटीनेंस आदि का जिम्मा बांदा सिंचाई विभाग का है। हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं। बरियारपुर बांध से एक नहर एमपी की पहले से निकली है। यह दूसरी नई नहर निकाली जा रही है।
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यूपी के हिस्से वाली जमीन पर एमपी सिंचाई विभाग द्वारा नहर खुदाई शुरू करने की भनक लगते ही बांदा सिंचाई प्रखंड तृतीय के अवर अभियंता धीरेंद्र प्रताप मौके पर पहुंचे और जल संसाधन संभाग, पवई (पन्ना) के कार्य पालन यंत्री बीएल काडिरिया से विरोध जताते हुए काम रुकवा दिया। एमपी के अभियंता यूपी की जमीन में खुदाई से संबंधित कोई अनुमतिपत्र नहीं दिखा सके। न ही अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) था। जेई धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि उन्होंने अजयगढ़ (पन्ना) थाने के निरीक्षक को तहरीर दी, लेकिन उन्होंने यह कहकर सहयोग करने से मना कर दिया कि यूपी-एमपी का मामला है। जेई ने बताया कि वह रिपोर्ट विभागीय बड़े अफसरों को भेज देंगे।
नहर में जा रही 10 किसानों की 26.78 एकड़ भूमि
मध्य प्रदेश के सिंचाई विभाग द्वारा खोदी जा रही नहर से बांध की भूमि के पट्टाधारक और किसान चिंतित हैं। उन्हें पुश्तैनी जमीन छिनने का डर सता रहा है। नहर खुदाई में लगभग 10 पट्टाधारकों की 26 एकड़ 78 डिस्मिल जमीन जा रही है। प्रभावित किसान भी विरोध में यूपी सिंचाई विभाग का पूरा सहयोग कर रहे हैं। किसानों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के सिंचाई विभाग द्वारा पूर्व में नहर की खुदाई बरियारपुर बांध के डूब क्षेत्र से एक किमी दूर भपूतपुर कुर्मियान गांव से की जानी थी, पर मनमानी करते हुए नक्शा बदलकर उनके पट्टे की जमीनों से नहर निकाली जा रही है। यूपी सिंचाई विभाग के जेई द्वारा काम रुकवाने पर खुशी जताई है। (संवाद)
पट्टाधारक किसान गेस्टहाउस के बाहर डटे रहे
दोनों सूबों के इंजीनियरों के आने की खबर सुनकर पट्टाधारक किसान बरियारपुर बांध के नजदीक बने यूपी सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस के बाहर डटे रहे। इनमें अधिकांश महिलाएं और बुजुर्ग थे। उनकी नजरें दोनों ओर के अभियंताओं के निर्णय पर टिकी थी। पट्टाधारक रामकृपाल केवट, धनीराम केवट व हरदास अहिरवार ने बताया कि बांदा सिंचाई विभाग के कब्जे वाली जमीन में वे लोग पुरखों के समय से खेतीबाड़ी करते आ रहे हैं। इसी से परिवार का गुजारा हो रहा है। किसानों ने बताया कि बांदा सिंचाई विभाग द्वारा पिछले कई वर्षों से उनके पट्टों का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा। फिर भी वह जमीन पर काबिज हैं और खेतीबाड़ी कर रहे हैं। (संवाद)
इन पट्टा किसानों की जा रही जमीन (एकड़ में)-
रामकृपाल-2.34 एकड़, धनीराम केवट-2.34, हरदास अहिरवार- 3.29, पप्पू श्रीवास-2.75, पिंटू केवट- 2.60, छकुवा- 2.75, रामस्वरूप- 2.75, मनोज- 2.61, भगवानदास- 2.75 व सुनीता-2.60 एकड़।
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115 साल पुराना है बरियारपुर बांध
मध्य प्रदेश की जमीन में बना बरियारपुर बांध लगभग 115 साल पुराना है। इसका निर्माण 1906 में अंग्रेजी हुकूमत में हुआ था। करीब 650 मीटर लंबी दीवार है। इसमें 100 से ज्यादा फाटक हैं। सिंचाई प्रखंड तृतीय के मुताबिक, सौ साल की उम्र पार कर चुके इस बांध से यूपी को लगभग 36 टीसीएम (ट्रिलिएंट क्यूबिक मीटर) पानी मिलता है। इसकी देखरेख/मरम्मत पर विभाग हर वर्ष लाखों रुपये खर्च करता है। इसके अलावा मध्यप्रदेश में ही स्थित गंगऊ और रनगवां बांध की भी जिम्मेदारी बांदा सिंचाई विभाग की है। ग्रामीणों के मुताबिक, सिल्ट जमा होने से पानी का स्टोरेज कम हो गया है। (संवाद)
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यूपी के पानी पर एमपी की खराब रहती नीयत
यूपी-एमपी दोनों राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। इसके बाद भी पानी को लेकर यूपी-एमपी में विवाद होता है। वर्ष 1977 में दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे समेत कई मुद्दों पर समझौता हुआ था। तय हुआ था कि बांधों का रखरखाव यूपी का बांदा सिंचाई विभाग करेगा, इसलिए पानी पर यूपी का अधिकार भी ज्यादा होगा। समझौते के मुताबिक, 36 टीसीएम यूपी (बांदा) और 15 टीसीएम एमपी को पानी मिलेगा, पर मध्य प्रदेश ने कई बार समझौतों का उल्लंघन किया। बरियारपुर सहित गंगऊ, रनगवां बांधों के पानी पर मध्य प्रदेश की हमेशा नीयत खराब रही। कई बार जबरन गेट खोलकर यूपी के हिस्से का पानी लूट लिया गया। वहां के जनप्रतिनिधियों ने कई बार दबंगई पूर्वक बांधों के गेट खुलवाकर यूपी का पानी एमपी की नहरों में बहा दिया। डेड स्टोर होने के बाद भी सैल्यूस गेट खोलकर तलहटी का पानी निकाल लिया। कई विवाद तो शासन स्तर तक भी पहुंचे। (संवाद)
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एमपी पुलिस ने दर्ज नहीं की एफआईआर
बांदा। बरियारपुर बांध के नजदीक यूपी सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाली जमीन पर जबरन नहर खुदाई करा रहे एमपी सिंचाई विभाग का मामला पुलिस तक पहुंच गया है। यूपी सिंचाई विभाग के सींचपाल ने एमपी के अजयगढ़ (पन्ना) थाना और हनुमतपुर रिपोर्टिंग चौकी में तहरीर दी है। हालांकि, पुलिस ने यूपी-एमपी का मसला बताकर रिपोर्ट दर्ज करने से पल्ला झाड़ लिया है। सिंचाई प्रखंड तृतीय के जेई धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि बरियारपुर बांध में तैनात सींचपाल सतेंद्र सिंह ने शुक्रवार की शाम पन्ना (एमपी) जिले के अजयगढ़ थाना और हनुमतपुर पुलिस चौकी प्रभारी को तहरीर देकर कहा कि एमपी सिंचाई विभाग द्वारा यूपी सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाली भूमि पर कई बार बिना एनओसी खुदाई का प्रयास किया गया। बांदा सिंचाई प्रखंड तृतीय के अभियंताओं के विरोध पर काम रोका गया। एनओसी प्रकरण शासन स्तर पर अभी लंबित है। अब फिर एमपी सिंचाई विभाग के अधिकारी और ठेकेदार बिना किसी आदेश व एनओसी के खुदाई करा रहे, जो अवैध है। जेई ने बताया कि पुलिस ने तहरीर अपने पास सुरक्षित रख ली, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की। न ही खुदाई रोकने में दिलचस्पी दिखाई। उधर, अजयगढ़ थाना इंस्पेक्टर का कहना था कि यह यूपी-एमपी का मसला है। बिना जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर वह कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। जेई के मुताबिक, फिलहाल यूपी की जमीन पर खुदाई कार्य रुका है। शनिवार को एमपी सीमा पर कार्य होता रहा। (संवाद)