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मुनि सुब्रनाथ का किया महामस्तिकाभिषेक
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 19 Sep 2015 11:29 PM IST
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पर्यूषण पर्व पर जैन मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान
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जारी हैं। पर्व के दूसरे दिन शनिवार को छोटी बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर
और तारण तरण जैन नए चैत्यालय में कार्यक्रम हुए। इसमें बड़ी संख्या में जैन
धर्म के लोगों ने भगवान महावीर का अभिषेक किया। कहा गया कि समय से पूर्व
और भाग्य से ज्यादा किसी को नहीं मिलता।
दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार की सुबह 20वें तीर्थकर मुनि सुब्रनाथ की पूजा-अर्चना की गई। महामस्तिकाभिषेक का प्रथम अभिषेक सुरेश चंद्र जैन और शीतल जैन ने किया। पीले वस्त्र पहने श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के बीच अभिषेक किया। भगवान महावीर के हवाले से कहा गया कि दूसरे के गुणों का सम्मान करना और अपने हृदय में कोमलता धारण करना चाहिए।
मैं के भाव को खत्म करना चाहिए। इस अवसर पर मंदिर में समाज अध्यक्ष नरेंद्र जैन, व्यापारी नेता मनोज जैन, ज्ञानचंद्र जैन, उप प्रबंधक दिलीप कुमार जैन, महिला मंडल की मंजली जैन, संगीता जैन, शैलेंद्र जैन, प्रदीप जैन और मीडिया प्रभारी सुरेशचंद्र जैन भी मौजूद रहे।
उधर, तारण तरण जैन नवीन चैत्यालय में धर्म सभा हुई। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित अक्षत जैन ने कहा कि भाग्य से ज्यादा और समय से पूर्व न किसी को मिला है और न मिलेगा। सरलता से बड़ा कोई वशीकरण मंत्र नहीं है।
जीवन मेें सदैव सरल और सहज बनना ही मुक्ति का उपाय है। यहां अध्यक्ष विनय जैन, मंत्री प्रकाश जैन, मीडिया प्रभारी दिलीप जैन सहित जैन समुदाय के संजय, महेंद्र, प्रदीप, दिलीप, मिलन, सुभाष चंद्र, दिनेश, रत्नेश, अभिषेक, सुमेरा, सुकेरा, मिश्रीलाल और राजेंद्र भी शामिल रहे।
दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार की सुबह 20वें तीर्थकर मुनि सुब्रनाथ की पूजा-अर्चना की गई। महामस्तिकाभिषेक का प्रथम अभिषेक सुरेश चंद्र जैन और शीतल जैन ने किया। पीले वस्त्र पहने श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के बीच अभिषेक किया। भगवान महावीर के हवाले से कहा गया कि दूसरे के गुणों का सम्मान करना और अपने हृदय में कोमलता धारण करना चाहिए।
मैं के भाव को खत्म करना चाहिए। इस अवसर पर मंदिर में समाज अध्यक्ष नरेंद्र जैन, व्यापारी नेता मनोज जैन, ज्ञानचंद्र जैन, उप प्रबंधक दिलीप कुमार जैन, महिला मंडल की मंजली जैन, संगीता जैन, शैलेंद्र जैन, प्रदीप जैन और मीडिया प्रभारी सुरेशचंद्र जैन भी मौजूद रहे।
उधर, तारण तरण जैन नवीन चैत्यालय में धर्म सभा हुई। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित अक्षत जैन ने कहा कि भाग्य से ज्यादा और समय से पूर्व न किसी को मिला है और न मिलेगा। सरलता से बड़ा कोई वशीकरण मंत्र नहीं है।
जीवन मेें सदैव सरल और सहज बनना ही मुक्ति का उपाय है। यहां अध्यक्ष विनय जैन, मंत्री प्रकाश जैन, मीडिया प्रभारी दिलीप जैन सहित जैन समुदाय के संजय, महेंद्र, प्रदीप, दिलीप, मिलन, सुभाष चंद्र, दिनेश, रत्नेश, अभिषेक, सुमेरा, सुकेरा, मिश्रीलाल और राजेंद्र भी शामिल रहे।