फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   Mukhtar left the barracks after 355 days to appear

पेशी के लिए 355 दिन बाद बैरक से निकला मुख्तार

Tue, 29 Mar 2022 12:30 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2022 12:30 AM IST
विज्ञापन
Mukhtar left the barracks after 355 days to appear
बांदा के तिंदवारी में मुख्तार अंसारी के काफिले में शामिल खराब बज्र वाहन को धक्का देते मैकेनिक। - फोटो : BANDA
बांदा। पंजाब की रोपड़ जेल से वापसी के 11 माह 20 दिन बाद बाहुबली पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी को पहली बार बांदा जेल से बाहर निकाला गया। सोमवार को सुबह सात बजे कड़ी सुरक्षा में 108 नंबर एंबुलेंस से उसे लखनऊ ले जाया गया। वहां एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी हुई। ज्ञात हो कि मुख्तार सात अप्रैल को रोपड़ से आया था।
विज्ञापन

पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी को रवाना करने की कवायद रविवार शाम से ही शुरू हो गई थी। आधी रात को डीएम और एसपी भी हालात का जायजा लेने जेल पहुंचे। सीएमओ के आने पर मेडिकल चेकअप कराया गया। सुरक्षा के लिए बज्र वाहन सहित पुलिस का लंबा काफिला था। पूरे रूट पर स्थानीय पुलिस भी सतर्क और तैनात रही। लखनऊ कोर्ट में पेशी के लिए ले जाने के आदेश जेल प्रशासन को रविवार को मिला था।
विज्ञापन

हालांकि मुख्तार के अधिवक्ता काजी शबीउर्रहमान ने बांदा जेल अधीक्षक को रविवार को ही पत्र भेजा था कि बीमारी के चलते मुख्तार को कोर्ट में न ले जाया जाए। इसके लिए मेडिकल भी बनवाया गया था, लेकिन उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मुख्तार को पेशी के लिए लखनऊ भेजने का निर्णय लिया गया। जेल और जिला प्रशासन ने इसे लेकर पूरी गोपनीयता बरती।
विज्ञापन
विज्ञापन

मुख्तार के साथ एंबुलेंस में एक डॉक्टर, फार्मासिस्ट और सशस्त्र पुलिस कर्मी भी थे। काफिला तिंदवारी, बहुआ, फतेहपुर, रायबरेली होता हुआ दोपहर को लखनऊ पहुंचा। पूरे रूट पर वहां की पुलिस जगह-जगह तैनात रही और इस काफिले का रास्ता साफ कराती रही। एंबुलेंस के आसपास पूरे रास्ते किसी अन्य वाहन को नहीं फटकने दिया गया। उधर, मुख्तार के लोग भी अपने वाहनों से काफिले से दूरी बनाकर आगे-पीछे चलते रहे।
रास्ते में धोखा दे गया बज्र वाहन
बांदा/तिंदवारी। पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी की सुरक्षा को लेकर शासन से कड़े निर्देश जारी थे। पर, लोकल पुलिस की तैयारी खरी साबित नहीं हुई। काफिले का बज्र वाहन बांदा शहर से 30 किलोमीटर दूर तिंदवारी कस्बे में खराब हो गया। मुख्तार की एंबुलेंस और अन्य वाहन निकल गए। आननफानन में पुलिस ने मुख्यालय से दूसरा बज्र वाहन भेजा। उधर, खराब बज्र वाहन को स्थानीय मिस्त्री तौसीफ व चंद्रकांत पटेल ने धक्का देकर स्टार्ट किया। बताया गया कि इसकी क्लच प्लेट जल गई थी।
बज्र वाहन तिंदवारी में खड़ा होने से पहले भी 40 किलोमीटर से ज्यादा की रफ्तार नहीं ले पा रहा था। लोड भी नहीं ले पा रहा था। वाहन में शामिल इंस्पेक्टर शिवकुमार तिवारी ने पुलिस कंट्रोल को सूचना दी तब मुख्यालय से दूसरा बज्र वाहन भेजा गया। मुख्यालय से पहुंचे दूसरे वाहन पर पुलिस कर्मी सवार होकर लखनऊ रवाना हुए। खराब बज्र वाहन को वापस मुख्यालय भेजा गया। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने बताया कि तकनीकी गड़बड़ी आ गई थी। जांच की जा रही है। चालक से पूछताछ की जाएगी। उधर, पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक अजमेर सिंह ने बताया कि बज्र वाहन तीन-चार साल पुराना है। तकनीकी गड़बड़ी होती रहती है। इसकी क्षमता सात सिपाहियों की है। तत्काल दूसरा बज्र वाहन रवाना कर दिया गया था।
वाहन पलटा नहीं, खराब हुआ
बांदा। बिकरू हत्याकांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की कार पलट जाने और इनकाउंटर में उसकी मौत की घटना के बाद अन्य आरोपी भी पुलिस कस्टडी में वाहन से आने-जाने में घबराने लगे हैं। मुख्तार अंसारी को सोमवार को लखनऊ पेशी पर ले जाने के पूर्व रविवार की रात उनके बेटे विधायक अब्बास अंसारी ने सोशल मीडिया पर ट्वीट किया था कि साजिश के तहत मेडिकल कैंसिल करवाकर आधी रात को मुख्तार अंसारी को लखनऊ ले जाने की कथित तैयारी बड़ी अनहोनी घटना की आशंका पैदा कर रही है। मुख्तार का बज्र वाहन खराब हो जाने की घटना को चटखारे लेकर लोग बयां करते रहे। कइयों ने कमेंट किया कि वाहन पलटा नहीं, खराब हुआ।
लखनऊ जेल के अंदर मारपीट मामले में मुख्तार अंसारी पर आरोप तय
लखनऊ। एमपी-एमएलए कोर्ट ने लखनऊ जेल के अंदर मारपीट और बलवा करके अराजकता फैलाने के 21 साल पुराने मामले में माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ आरोप तय कर दिए। इससे पहले मुख्तार को बांदा जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच विशेष एसीजेएम अंबरीश कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में पेश किया गया। जहां कोर्ट ने आरोप तय करते हुए गवाहों को तलब किया है। मामले में अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी।

पत्रावली के अनुसार लखनऊ जेल के तत्कालीन कारापाल एसएन द्विवेदी ने 3 अप्रैल 2000 को आलमबाग थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 29 मार्च 2000 को जेल से पेशी से लौटे बंदियों को जेल के अंदर लिया जा रहा था। उसी दौरान क्वारंटीन बैरक में बंद मुख्तार अंसारी के साथी यूसुफ चिश्ती, आलम, कल्लू पंडित व लालजी यादव ने बंदी चांद को मारना शुरू कर दिया। उसकी चीखने की आवाज पर वादी और अन्य कर्मचारी बचाने गए तो आरोपियों ने जेल कर्मियों पर पथराव कर बैरक में भाग गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed