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कुपोषित बच्चों पर ज्यादा मंडरा रहा कोरोना का खतरा
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पोषण केंद्र में भर्ती बच्चे की देखभाल करती मां।
- फोटो : BANDA
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बांदा। कोरोना महामारी के खतरे के बीच कुपोषण ग्रस्त बच्चों को ज्यादा देखभाल की जरूरत है। इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इसी के मद्देनजर डीएम ने पोषण पुनर्वास केंद्रों को खुला रखने और गंभीर कुपोषित बच्चों को केंद्रों में भर्ती कराने के निर्देश दिए हैं।
डीएम अमित सिंह बंसल ने स्वास्थ्य विभाग व बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को निर्देश दिए कि कुपोषित बच्चों को तत्काल जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाए। कोरोना मरीजों की निगरानी में जुटी आशा कार्यकर्ता घरों के भ्रमण के दौरान अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित करें और उन्हें अस्पताल पहुंचाएं ताकि उनकी उचित देखभाल हो सके।
सीडीओ हरिश्चंद्र वर्मा ने बताया कि हर हफ्ते इसकी समीक्षा होगी। कहा कि बच्चे की भूख और पोषण स्तर में कमी आए तो तत्काल स्वास्थ्य विभाग या एएनएम को दिखाएं। जरूरत पड़ने पर पर एनआरसी में 14 दिन के लिए भर्ती कराएं। वहां बच्चे के साथ मां या अभिभावक के रहने का भी इंतजाम होता है। इस दौरान मां 100 रुपये प्रतिदिन दिए जाते है, जिसमें 50 रुपये खाते में और 50 रुपये की दर से भोजन दिया जाता है। चार फालोअप के दौरान प्रति फालोअप 100 रुपये मां के भोजन के लिए और 40 रुपये बच्चे के भोजन के लिए दिए जाते हैं।
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साबुन और साफ पानी से 20 सेकेंड तक धोएं हाथ
बांदा। कोरोना महामारी के दौरान माताओं को सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। बच्चे को खाना खिलाने से पहले, खाना पकाने या परोसने से पहले, शौच के बाद और बच्चे के मल निपटान के बाद आवश्यक रूप से साबुन और साफ पानी से कम से कम 20 सेकेंड तक हाथ धोएं।
यूनिसेफ के मंडलीय समन्वयक पवन मिश्रा का कहना है कि कुपोषण के शुरुआती दौर में ही ध्यान दिया जाए तो घर पर ही बच्चे को ठीक किया जा सकता है। घर में बना हुआ ताजा साफ सुथरा खाना दिन में तीन-चार बार बच्चे को दें। उसकी पसंद का खाना दें। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से प्राप्त अनुपूरक आहार से बनी रेसिपी भी बच्चे को खिलाएं।
बताया कि दूध की बोतल, चूसनी का प्रयोग बिल्कुल न करें। छह माह से छोटे बच्चे को ऊपर का दूध, पानी न दें। साफ हाथों से साफ कटोरी में साफ पानी दें। बच्चा लंबे समय से चिड़चिड़ा रहा है या मां का दूध नहीं पी रहा है तो डाक्टर को दिखाएं।
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डीएम अमित सिंह बंसल ने स्वास्थ्य विभाग व बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को निर्देश दिए कि कुपोषित बच्चों को तत्काल जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाए। कोरोना मरीजों की निगरानी में जुटी आशा कार्यकर्ता घरों के भ्रमण के दौरान अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित करें और उन्हें अस्पताल पहुंचाएं ताकि उनकी उचित देखभाल हो सके।
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सीडीओ हरिश्चंद्र वर्मा ने बताया कि हर हफ्ते इसकी समीक्षा होगी। कहा कि बच्चे की भूख और पोषण स्तर में कमी आए तो तत्काल स्वास्थ्य विभाग या एएनएम को दिखाएं। जरूरत पड़ने पर पर एनआरसी में 14 दिन के लिए भर्ती कराएं। वहां बच्चे के साथ मां या अभिभावक के रहने का भी इंतजाम होता है। इस दौरान मां 100 रुपये प्रतिदिन दिए जाते है, जिसमें 50 रुपये खाते में और 50 रुपये की दर से भोजन दिया जाता है। चार फालोअप के दौरान प्रति फालोअप 100 रुपये मां के भोजन के लिए और 40 रुपये बच्चे के भोजन के लिए दिए जाते हैं।
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साबुन और साफ पानी से 20 सेकेंड तक धोएं हाथ
बांदा। कोरोना महामारी के दौरान माताओं को सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। बच्चे को खाना खिलाने से पहले, खाना पकाने या परोसने से पहले, शौच के बाद और बच्चे के मल निपटान के बाद आवश्यक रूप से साबुन और साफ पानी से कम से कम 20 सेकेंड तक हाथ धोएं।
यूनिसेफ के मंडलीय समन्वयक पवन मिश्रा का कहना है कि कुपोषण के शुरुआती दौर में ही ध्यान दिया जाए तो घर पर ही बच्चे को ठीक किया जा सकता है। घर में बना हुआ ताजा साफ सुथरा खाना दिन में तीन-चार बार बच्चे को दें। उसकी पसंद का खाना दें। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से प्राप्त अनुपूरक आहार से बनी रेसिपी भी बच्चे को खिलाएं।
बताया कि दूध की बोतल, चूसनी का प्रयोग बिल्कुल न करें। छह माह से छोटे बच्चे को ऊपर का दूध, पानी न दें। साफ हाथों से साफ कटोरी में साफ पानी दें। बच्चा लंबे समय से चिड़चिड़ा रहा है या मां का दूध नहीं पी रहा है तो डाक्टर को दिखाएं।