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लेखपालों की हड़ताल ने रोका नौकरियों का रास्ता
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 08 Sep 2016 11:30 PM IST
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सदर तहसील मेें खसरा-खतौनी कक्ष में काम करतीं प्रशिक्षु लेखपाल।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। लेखपालों की हड़ताल बेरोजगारों, छात्र-छात्राओं और किसानों पर भारी पड़ रही है। बेरोजगार नौकरी के लिए आवेदनपत्र में लगाए जाने वाले आय, निवास और जाति प्रमाणपत्र नहीं हासिल कर पा रहे हैं। छात्र-छात्राओं को फीस माफी और दाखिले के लिए इन्हीं प्रमाणपत्रों की दरकार है।
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ये भी लेखपालों के चक्कर लगा रहे हैं। किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए खसरा-खतौनी की नकल नहीं मिल पा रही है। पूरे जिले में 17,600 से ज्यादा प्रमाणपत्र के आवेदन फंसे पड़े हैं। प्रशासन ने उनके प्रमाणपत्र जारी करने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की है।
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विभिन्न नौकरियों में आवेदन करने वाले बेरोजगारों और स्कूल-कालेजों के छात्र-छात्राओं को लेखपालों की हड़ताल का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। शासन ने लेखपालों की हड़ताल पर अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लगा दिया है।
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फिर भी लेखपाल हड़ताल पर अड़े हैं। प्रशासन भी कुछ खास सख्ती के मूड में नजर नहीं आ रहा है। हालांकि बाढ़ पीड़ितों के सर्वे में लेखपालों के स्थान पर संग्रह अमीन और प्रशिक्षु लेखपालों को लगाया गया है। लेखपाल छह सूत्री मांगों को लेकर 22 अगस्त से हड़ताल पर हैं। ये लेखपाल संवर्ग में उत्पन्न एसीपी विसंगति दूर करने, पदनाम उप राजस्व निरीक्षक, योग्यता स्नातक करते हुए वेतन ग्रेड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।