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जमीन गिरवी रखकर खोली गोशाला
Sat, 19 Jan 2019 12:11 AM IST
gaurav gaurav
बांदा
बांदा
Published by: gaurav gaurav
Updated Sat, 19 Jan 2019 12:11 AM IST
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अपनी गोशाला में अन्ना गायों की देखरेख करते ब्रजेश तिवारी।
- फोटो : अमर उजाला
बांदा। बुंदेलखंड में गायों को अन्ना छोडने की सिर चढ़कर बोल रही परंपरा के बीच कुछ ऐसे उदाहरण भी हैं जो पशु पालकों को आईना दिखा रहे हैं। इन्हीं में एक हैं नरैनी तहसील क्षेत्र के नहरी गांव में ब्रजेश कुमार तिवारी। वह चार सालों से गोसेवा में लगे हैं। अपनी पूरी पांच एकड़ जमीन को गोआश्रय केंद्र में बदल दिया है। यहां पल रहीं करीब एक सैकड़ा गायों के चारा-भूसा, पानी की व्यवस्था अपनी बेटी की कमाई से कर रहे हैं। बेटी दिल्ली में नौकरी करती है।
चार साल पहले ब्रजेश ने 30 गायों से गोशाला शुरू की थी। इसके लिए अपनी चार एकड़ जमीन गिरवी रख दी। उससे मिले पैसों से चारा-भूसा का इंतजाम किया। इस समय गोशाला में एक सैकड़ा से अधिक गोवंश पल रहे हैं। इनके भरण पोषण में 35 से 40 हजार रुपये प्रति माह खर्च आ रहा है। इस खर्च में अधिकांश हिस्सा दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रही बेटी द्वारा वहन किया जाता है।
शेष खर्च के लिए ब्रजेश ग्रामीणों से चंदा वसूल लेते हैं। वह कहते हैं कि गोवंश को भूखा-प्यासा लावारिस अवस्था में घूमते देख उन्हें दुख होता है। इसीलिए वह यह पुनीत कार्य अपनाए हुए हैं।
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सहायता की भी संस्तुति
ब्रजेश तिवारी की अन्ना पशुओं के प्रति सेवा की भावना को देखते हुए पशुधन विभाग के प्रमुख सचिव ने उनकी गोशाला के लिए 7 लाख 66 हजार रुपये की सहायता के लिए गोसेवा आयोग लखनऊ को पत्र भेजा है।
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चार साल पहले ब्रजेश ने 30 गायों से गोशाला शुरू की थी। इसके लिए अपनी चार एकड़ जमीन गिरवी रख दी। उससे मिले पैसों से चारा-भूसा का इंतजाम किया। इस समय गोशाला में एक सैकड़ा से अधिक गोवंश पल रहे हैं। इनके भरण पोषण में 35 से 40 हजार रुपये प्रति माह खर्च आ रहा है। इस खर्च में अधिकांश हिस्सा दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रही बेटी द्वारा वहन किया जाता है।
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शेष खर्च के लिए ब्रजेश ग्रामीणों से चंदा वसूल लेते हैं। वह कहते हैं कि गोवंश को भूखा-प्यासा लावारिस अवस्था में घूमते देख उन्हें दुख होता है। इसीलिए वह यह पुनीत कार्य अपनाए हुए हैं।
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ब्रजेश तिवारी की अन्ना पशुओं के प्रति सेवा की भावना को देखते हुए पशुधन विभाग के प्रमुख सचिव ने उनकी गोशाला के लिए 7 लाख 66 हजार रुपये की सहायता के लिए गोसेवा आयोग लखनऊ को पत्र भेजा है।