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प्रबंध निदेशक ने मांगें शासन को भेजने का किया वादा

Sat, 14 Sep 2019 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2019 11:39 PM IST
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Labor leaders talk to management on closed mills
बांदा की बंद पड़ी कताई मिल। - फोटो : BANDA
बांदा। प्रदेश में बांदा समेत चार जिलों में बंद पड़ी कताई मिलों के मुद्दे पर मिल प्रबंधन और मजदूर नेताओं के बीच पहली बार हुई द्विपक्षीय वार्ता में मजदूरों को उम्मीद जागी है। प्रबंधन ने समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया है।
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बांदा स्थित कताई मिल समेत रसड़ा (बलिया), जौनपुर और मेजा (प्रयागराज) की कताई मिलें लंबे अरसे से बंद हैं। यूपी स्टेट यार्न कंपनी लिमिटेड प्रबंधन ने इन्हें बीमार/घाटे में बताकर बंद कर दिया था। बांदा की कताई मिल 3 दिसंबर 1998 को बंद हुई थी। उस समय मिल में 1350 मजदूर काम कर रहे थे। लगभग 10 हजार किलो कच्चे सूत का उत्पादन हो रहा था।
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मिल बंदी के बाद से ही मजदूर और उनके संगठन लगातार मिल चालू करने और बकाया भुगतान के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन मामला इलाहाबाद ट्रिब्यूनल कोर्ट और भारत सरकार के वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड (बायफर) तक पहुंच चुका है।
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कोर्ट के आदेशों और मजदूरों के बढ़ते दबाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश स्टेट यार्न कंपनी लिमिटेड प्रबंधन ने चारों मिलों की मजदूर संघर्ष समिति के प्रतिनिधि सदस्यों को वार्ता के लिए 12 सितंबर (गुरुवार) को कानपुर स्थित मुख्यालय बुलाया था। उद्योग निदेशालय कार्यालय, कानपुर में प्रबंध निदेशक से कताई मिल मजदूर संघर्ष समिति के प्रतिनिधि रामप्रवेश यादव (बांदा), जयप्रकाश वर्मा रसड़ा (बलिया), अनिल कुमार (जौनपुर) और रघुनंदन प्रसाद गुप्त मेजा (प्रयागराज) से सीधी वार्ता हुई।

बांदा मिल के प्रतिनिधि मजदूर नेता रामप्रवेश यादव ने बताया कि बातचीत संतोषजनक रही। प्रबंध निदेशक ने सकारात्मक रवैया अपनाते हुए भरोसा दिलाया है कि मांगें शासन स्तर की हैं। लिहाजा समाधान के लिए शासन को अग्रसारित किया जाएगा। चारों मजदूर प्रतिनिधियों ने प्रबंध निदेशक को संयुक्त हस्ताक्षरों से अपना 10 सूत्री मांगपत्र सौंपा। वीआरएस और लेड ऑफ वेतन तथा सर्विस सेवा का लाभ दिलाने की मांग की। ऑन रोल छूटे कर्मचारियों का वीआरएस और क्षतिपूर्ति की राशि भी दिए जाने की मांग की।
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