फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   khaad ne bigaade bundelee khet, mittee matiyaamet

खाद ने बिगाड़े बुंदेली खेत, मिट्टी मटियामेट

Sat, 11 Sep 2021 11:28 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 11 Sep 2021 11:28 PM IST
विज्ञापन
khaad ne bigaade bundelee khet, mittee matiyaamet
बांदा। सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड की मिट्टी को उपजाऊ बनाने वाले पोषक तत्व (नाइट्रोजन और फास्फोरस) अब एक मीटर नीचे चले गए हैं, जिससे किसानों के माथे पर गंभीर चिंता की लकीरें पैदा हो गई हैं।
विज्ञापन

पहले यहां मिट्टी के ऊपरी सतह से कुछ नीचे पोषक तत्व मिलते थे, लेकिन अब यह अति न्यूनतम स्तर तक पहुंच गए हैं, जिससे भविष्य में संकट पैदा होने के आसार हो गए हैं।
विज्ञापन

खेती किसानी के विशेषज्ञों का कहना है कि यह सब अत्यधिक रासायनिक खादों के इस्तेमाल करने की वजह से हुआ है। किसानों द्वारा ज्यादा से ज्यादा पैदावार करने के लिए अत्यधिक रासायनिक खादों के इस्तेमाल से यह सब हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मृदा परीक्षण के आंकड़ों के मुताबिक, मिट्टी को उपजाऊ बनाने वाले पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फास्फोरस) एक मीटर गहराई तक खत्म हो गए हैं। किसान और कृषि वैज्ञानिक इसको लेकर खासे चिंतित हैं। मिट्टी की उर्वरा बचाने को लेकर कृषि विश्व विद्यालय शोध भी कर रहा है।
मिट्टी परीक्षण विभाग के अनुसार, वर्ष 2021 में बुंदेलखंड के सातों जनपदों झांसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, महोबा, हमीरपुर व चित्रकूट में 22,559 किसानों के खेतों की मिट्टी में पाए जाने वाले 12 प्रकार के पोषक तत्वों की जांच की गई।
ज्यादातर परीक्षण में सामने आया कि खेतों में दो महत्वपूर्ण पोषक तत्व नाइट्रोजन व फास्फोरस तेजी से घट रहा है। मृदा परीक्षण करने वाले विभाग के अनुसार, मिट्टी में नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर उच्च स्तर 0.80 से घटकर अति न्यून स्तर 0.20 व फास्फोरस प्रति हेक्टेयर 40.0 से घटकर 10.0 स्तर पर पहुंच गया है।
हालांकि, पोटाश का भी स्तर बहुत अच्छा नहीं है। विभाग का कहना है कि निरंतर खेतों की उर्वरा कम होने से इसका उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है। संयुक्त कृषि उप निदेशक कार्यालय के आंकड़ों की मानें तो एक दशक में खेतों की उत्पादन क्षमता में 20 फीसदी गिरावट आई है।
पहले जैविक खादों के प्रयोग से प्रति हेक्टेयर गेहूं की उपज 12 क्विंटल थी। अब रासायनिक खादों से घटकर आठ क्विंटल रह गई है। हालांकि, दिनोंदिन खेतों के पोषक तत्वों के खत्म होने पर कृषि वैज्ञानिकों ने चिंता जाहिर की।
इसके लिए बाकायदा बांदा कृषि विश्वविद्यालय में शोध हो रहा है। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि वह खेतों की उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए रासायनिक तत्वों से तोबा कर जैविक खादों का प्रयोग करें।
वर्ष 2021 में किसानों के खेतों की मिट्टी परीक्षण का ब्योरा
जनपद परीक्षण
झांसी 3,440
ललितपुर 2,800
जालौन 3,850
बांदा 3,879
हमीरपुर 3,443
महोबा 2,855
चित्रकूट 2,292
योग- 22,559
खेतों के प्रमुख पोषक तत्वों की स्थिति (प्रति हेक्टेयर)
तत्व उच्च स्तर न्यून स्तर
नाइट्रोजन 0.80 0.20
फास्फोरस 40.0 10.0
पोटाश 250 100
2021-22 में नहीं हुए मिट्टी के परीक्षण
कोरोना की वजह से सरकार ने मिट्टी के सरकारी नमूनों के परीक्षण को रोक दिया था। सिर्फ प्राइवेट तौर पर पैसा अदा करने में ही किसानों के मिट्टी के नमूनों का परीक्षण किया गया, लेकिन प्राइवेट नमूनों की जांच में किसानों ने भी कोई रुचि नहीं दिखाई।
बुंदेलखंड के झांसी मंडल के तीन जिलों झांसी, ललितपुर और जालौन में 54 और चित्रकूटधाम मंडल के चार जिलों बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा में महज कुल 124 किसानों ने मिट्टी की जांच कराई।
प्राइवेट जांच कराने में देने पड़ते 102 रुपये
किसानों को प्राइवेट तौर पर मिट्टी के छह पोषक तत्वों की जांच में 29 व 12 पोषक तत्वों की जांच में 102 रुपये देना पड़ते हैं। मृदा परीक्षण विभाग का कहना है कि किसानों को प्राइवेट तौर पर मिट्टी की जांच में भी सरकार आधे से ज्यादा की छूट दे रही है।
12 पोषक तत्वों की जांच में महज केमिकल का खर्च दो से तीन सौ रुपये आता है। सरकार इसे महज 102 रुपये में कर रही है।
प्रमुख पोषक तत्वों की कमी से नुकसान
- नाइट्रोजन : इसकी कमी से पौधे की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और पौधे की वृद्धि रुक जाती है। फूल कम आते हैं और फल कुछ ही दिन में जमीन में गिर जाते हैं।

- फास्फोरस : बीज का निर्माण कम होता है। फसल जल्दी पक जाती है। पौध में तल्ले कम निकलते है। सींक की तरह पौध सीधा व कमजोर होता है।
- पोटाश : पत्तियां हरे रंग की हो जाती है। जड़ की बढ़ोतरी कम हो जाती है। तने का बाहरी हिस्सा पीला हो जाता है। साथ ही पौध कमजोर होती है।
मिट्टी परीक्षण में जो पोषक तत्व कम पाए जाते हैं, उसकी जानकारी किसान को दी जाती है। किसानों को पोषक तत्वों की कमी को खत्म करने के उपाय बताए जाते है। जैविक उर्वरक के प्रयोग की सलाह दी जाती है। ताकि पोषक तत्वों की कमी न हों।
- नरेंद्र सिंह, सहायक निदेशक, मिट्टी परीक्षण विभाग चित्रकूटधाम मंडल, बांदा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed