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केन और यमुना लाल निशान पार, आधा सैकड़ा गांव घिरे
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बांदा में रेलवे पुल तले उफनाती केन नदी।
- फोटो : BANDA
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बांदा। यमुना और केन नदियों की बाढ़ ने और गंभीर रूप ले लिया है। यह दोनों नदियां खतरे का निशान पार कर गई हैं। नदियों के किनारे आबाद आधा सैकड़ा से ज्यादा गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है। हालांकि गंगऊ और बरियारपुर बांधों से छूट रहे पानी में भारी कमी आई है। लगभग एक-एक लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज घट गया है। इससे नदियों का जल स्तर भी घटने का आसार है।
शनिवार को शाम बांदा में केन नदी का जल स्तर खतरे का निशान 104 मीटर पार करके 15 सेंटीमीटर और ज्यादा चढ़ गई। उधर, चिल्ला घाट में यमुना नदी खतरे के निशान 100 मीटर से 5 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग ने बाढ़ बुलेटिन जारी कर प्रशासन को सूचना भेजी है। प्रशासन, राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच गए हैं। नदी किनारे आबाद गांवों के ग्रामीणों को सतर्क कर दिया गया है।
हालांकि नदियों को उफना रहे गंगऊ और बरियारपुर बांधों से डिस्चार्ज हो रहे पानी में काफी कमी आई है। शनिवार को गंगऊ बांध से 82,490 क्यूसेक और बरियारपुर से 88,889 क्यूसिक पानी उफनाकर केन नदी में गिर रहा था। बीते 24 घंटों के दौरान इसमें लगभग एक-एक लाख क्यूसेक की कमी आई है। एक दिन पूर्व शुक्रवार को गंगऊ से 1,83,000 और बरियारपुर से 1,49,000 क्यूसिक पानी डिस्चार्ज हो रहा था।
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गंगऊ बांध के अवर अभियंता वेद और बरियारपुर के अवर अभियंता भीखम सिंह ने बताया कि बांधों में पर्याप्त कर्मचारी मौजूद हैं। रात-दिन नजर रखी जा रही है। प्रशासन और उच्चाधिकारियों को सूचनाएं प्रेषित की जा रही हैं। डीएम हीरालाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों, कानूनगो और लेखपालों व बाढ़ राहत चौकियों में लगाए गए कर्मचारियों को राहत और बचाव कार्यों में पूरी मुस्तैदी से जुटने का निर्देश दिया है। इसमें ढिलाई पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
केन नदी की बाढ़ से प्रभावित गांव
बांदा सदर तहसील- कनवारा, छनिहा डेरा, ब्रम्हाडेरा, हलुवा डेरा, टिकरी, धांधू डेरा, पिपरी, चटगन, चटचटगन, मरौली, केवटरा, चिलेहटा, छोटा पुरवा, ग्योड़ी बाबा आदि।
नरैनी तहसील- बरियारी, मानपुर खुर्द, कछार पुरवा, मड़ैयन, रागौल, गोविंदपुर, केवटों का पुरवा।
पैलानी तहसील- तारा, खजुरी, शंकर पुरवा, रेहुंटा, सिंधन कलां, सिंधन खुर्द, खप्टिहा कलां, सांड़ी, गुडग़वां, खैरेई, बरेहटा आदि।
यमुना नदी से प्रभावित गांव
बबेरू तहसील- कटार, खेरा, जोरावरपुर, चरका, डीरा, लखनपुर, औदहा। पैलानी तहसील- अमचौली, सबादा, चिल्ला, लोमर, सादी मदनपुर, तारा, खजुरी, सिंधनकलां आदि।
रपटे के ऊपर पानी, कई गांव घिरे
कमासिन। यमुना नदी का जलस्तर बढने से सहयोगी नदियां भी उफान पर हैं। बागै व रयान नदी का पानी औदहा-इटर्रा रपटे के ऊपर से बह रहा है। कई गांवों का सड़क संपर्क मुख्यालय से टूट गया है। कुचौली, घोषण, इटर्रा, लोहरा आदि गांव घिर गए हैं। इटर्रा व औदहा में रयान नदी पर बना रपटा डूब गया है। नावें लगाई गई हैं। प्रशासनिक अधिकारी बाढ़ पर नजर रखे हुए हैं। लेखपालों को गांवों में लगाया गया है। बाढ़ राहत चौकियां खोल दी गई हैं। ब्यूरो
बाढ़ में टावर गिरे, पांच गांवों की बिजली ठप
बेंदाघाट। यमुना में बाढ़ से काजीटोला व जलालपुर गांवों के पास 33 केवी हाईटेंशन लाइन के चार टावर गिर गए हैं। यह लाइन जौहरपुर सब स्टेशन के लिए निकली है। टावर गिरने से बेंदा, जौहरपुर, अमलीकौर, छापर और भुजरख गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। इन गांवों की जलापूर्ति भी बाधित है। ग्रामीणों शिवबली सिंह, संतोष सिंह, शिवकरन सिंह, साधू निषाद, मतगंजन सिंह आदि ने बेंदा ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विवेक सिंह से मिलकर टावर जल्द दुरुस्त कराकर आपूर्ति बहाल कराने की मांग की। प्रधान प्रतिनिधि ने एसडीएम संदीप कुमार और बिजली विभाग के एसडीओ केके कमल को फोन पर सूचना दी। उन्होंने शीघ्र लाइन दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया है।
खेतों में फसल डूबी, सड़कों पर पानी भरा
खप्टिहा कलां/चिल्ला। केन नदी और चंद्रावल नदी की बाढ़ से बरेहटा व अमारा गांव का सड़क संपर्क टूट गया है। कई गांवों की सैकड़ों बीघा खेत जलमग्न हो गए हैं। लाखों रुपये की फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। उधर, सड़कों में पानी भर जाने से सिर्फ नाव से ही आवागमन बचा है। ग्रामीणों ने बाढ़ प्रभावित इन इलाकों में नाव के साथ मोटर बोट की मांग की है। चिल्ला क्षेत्र में भी तिली, अरहर, ज्वार, मूंग आदि की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। तारा गांव में कई खेत पानी में डूब गए हैं।
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शनिवार को शाम बांदा में केन नदी का जल स्तर खतरे का निशान 104 मीटर पार करके 15 सेंटीमीटर और ज्यादा चढ़ गई। उधर, चिल्ला घाट में यमुना नदी खतरे के निशान 100 मीटर से 5 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग ने बाढ़ बुलेटिन जारी कर प्रशासन को सूचना भेजी है। प्रशासन, राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच गए हैं। नदी किनारे आबाद गांवों के ग्रामीणों को सतर्क कर दिया गया है।
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हालांकि नदियों को उफना रहे गंगऊ और बरियारपुर बांधों से डिस्चार्ज हो रहे पानी में काफी कमी आई है। शनिवार को गंगऊ बांध से 82,490 क्यूसेक और बरियारपुर से 88,889 क्यूसिक पानी उफनाकर केन नदी में गिर रहा था। बीते 24 घंटों के दौरान इसमें लगभग एक-एक लाख क्यूसेक की कमी आई है। एक दिन पूर्व शुक्रवार को गंगऊ से 1,83,000 और बरियारपुर से 1,49,000 क्यूसिक पानी डिस्चार्ज हो रहा था।
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गंगऊ बांध के अवर अभियंता वेद और बरियारपुर के अवर अभियंता भीखम सिंह ने बताया कि बांधों में पर्याप्त कर्मचारी मौजूद हैं। रात-दिन नजर रखी जा रही है। प्रशासन और उच्चाधिकारियों को सूचनाएं प्रेषित की जा रही हैं। डीएम हीरालाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों, कानूनगो और लेखपालों व बाढ़ राहत चौकियों में लगाए गए कर्मचारियों को राहत और बचाव कार्यों में पूरी मुस्तैदी से जुटने का निर्देश दिया है। इसमें ढिलाई पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
केन नदी की बाढ़ से प्रभावित गांव
बांदा सदर तहसील- कनवारा, छनिहा डेरा, ब्रम्हाडेरा, हलुवा डेरा, टिकरी, धांधू डेरा, पिपरी, चटगन, चटचटगन, मरौली, केवटरा, चिलेहटा, छोटा पुरवा, ग्योड़ी बाबा आदि।
नरैनी तहसील- बरियारी, मानपुर खुर्द, कछार पुरवा, मड़ैयन, रागौल, गोविंदपुर, केवटों का पुरवा।
पैलानी तहसील- तारा, खजुरी, शंकर पुरवा, रेहुंटा, सिंधन कलां, सिंधन खुर्द, खप्टिहा कलां, सांड़ी, गुडग़वां, खैरेई, बरेहटा आदि।
यमुना नदी से प्रभावित गांव
बबेरू तहसील- कटार, खेरा, जोरावरपुर, चरका, डीरा, लखनपुर, औदहा। पैलानी तहसील- अमचौली, सबादा, चिल्ला, लोमर, सादी मदनपुर, तारा, खजुरी, सिंधनकलां आदि।
रपटे के ऊपर पानी, कई गांव घिरे
कमासिन। यमुना नदी का जलस्तर बढने से सहयोगी नदियां भी उफान पर हैं। बागै व रयान नदी का पानी औदहा-इटर्रा रपटे के ऊपर से बह रहा है। कई गांवों का सड़क संपर्क मुख्यालय से टूट गया है। कुचौली, घोषण, इटर्रा, लोहरा आदि गांव घिर गए हैं। इटर्रा व औदहा में रयान नदी पर बना रपटा डूब गया है। नावें लगाई गई हैं। प्रशासनिक अधिकारी बाढ़ पर नजर रखे हुए हैं। लेखपालों को गांवों में लगाया गया है। बाढ़ राहत चौकियां खोल दी गई हैं। ब्यूरो
बाढ़ में टावर गिरे, पांच गांवों की बिजली ठप
बेंदाघाट। यमुना में बाढ़ से काजीटोला व जलालपुर गांवों के पास 33 केवी हाईटेंशन लाइन के चार टावर गिर गए हैं। यह लाइन जौहरपुर सब स्टेशन के लिए निकली है। टावर गिरने से बेंदा, जौहरपुर, अमलीकौर, छापर और भुजरख गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। इन गांवों की जलापूर्ति भी बाधित है। ग्रामीणों शिवबली सिंह, संतोष सिंह, शिवकरन सिंह, साधू निषाद, मतगंजन सिंह आदि ने बेंदा ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विवेक सिंह से मिलकर टावर जल्द दुरुस्त कराकर आपूर्ति बहाल कराने की मांग की। प्रधान प्रतिनिधि ने एसडीएम संदीप कुमार और बिजली विभाग के एसडीओ केके कमल को फोन पर सूचना दी। उन्होंने शीघ्र लाइन दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया है।
खेतों में फसल डूबी, सड़कों पर पानी भरा
खप्टिहा कलां/चिल्ला। केन नदी और चंद्रावल नदी की बाढ़ से बरेहटा व अमारा गांव का सड़क संपर्क टूट गया है। कई गांवों की सैकड़ों बीघा खेत जलमग्न हो गए हैं। लाखों रुपये की फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। उधर, सड़कों में पानी भर जाने से सिर्फ नाव से ही आवागमन बचा है। ग्रामीणों ने बाढ़ प्रभावित इन इलाकों में नाव के साथ मोटर बोट की मांग की है। चिल्ला क्षेत्र में भी तिली, अरहर, ज्वार, मूंग आदि की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। तारा गांव में कई खेत पानी में डूब गए हैं।