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पत्नी और बच्चों के शव देख पथरा गईं कल्लू की आंखें
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मरका (बांदा)। जयपुर (राजस्थान) में संगमरमर के पत्थर लगाने वाला प्रवासी मजदूर कल्लू यादव पूरा परिवार आग की भेंट चढ़ जाने के बाद खुद भी पथरा गया है। 12 वर्ष से हर सुख-दुख में साथ दे रही पत्नी संगीता और तीन चहेते बच्चों को अचानक खो देने वाला कल्लू शनिवार देर रात जयपुर से गांव पहुंच गया। उसके आने के बाद ही रात में बांदा मेडिकल कालेज में चारों शवों का पोस्टमार्टम हुआ। अंतिम संस्कार मुख्यालय में ही मुक्तिधाम में किया गया।
कल्लू की शादी करीब 12 वर्ष पूर्व संगीता से हुई थी। वह करीब दस साल से जयपुर में प्रवासी मजदूर था। वहां संगमरमर के पत्थर लगाता था। समय-समय पर गांव आकर बच्चों को दुलारता था, लेकिन आमदनी इतनी नहीं थी कि परिवार की परवरिश से पैसा बचाकर पक्का मकान बना सके।
तीन बीघा अनउपजाऊ जमीन में कुछ खास फसल नहीं हो पाती। तंगहाली में जीवन गुजारने के बाद भी उसे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। पत्नी संगीता गांव में खेतिहर मजदूर के रूप में काम करके कुछ कमाकर पति को सहारा दे रही थी।
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घटना के दूसरे दिन रविवार को भी घटनास्थल दुबेन पुरवा में शोक का माहौल रहा। जले मकान की राख और मलवा देखने वाले लोग आते-जाते रहे। कल्लू सहित अन्य खानदानी दोपहर तक बांदा में ही अंतिम संस्कार में व्यस्त रहे।
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कल्लू की शादी करीब 12 वर्ष पूर्व संगीता से हुई थी। वह करीब दस साल से जयपुर में प्रवासी मजदूर था। वहां संगमरमर के पत्थर लगाता था। समय-समय पर गांव आकर बच्चों को दुलारता था, लेकिन आमदनी इतनी नहीं थी कि परिवार की परवरिश से पैसा बचाकर पक्का मकान बना सके।
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तीन बीघा अनउपजाऊ जमीन में कुछ खास फसल नहीं हो पाती। तंगहाली में जीवन गुजारने के बाद भी उसे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। पत्नी संगीता गांव में खेतिहर मजदूर के रूप में काम करके कुछ कमाकर पति को सहारा दे रही थी।
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घटना के दूसरे दिन रविवार को भी घटनास्थल दुबेन पुरवा में शोक का माहौल रहा। जले मकान की राख और मलवा देखने वाले लोग आते-जाते रहे। कल्लू सहित अन्य खानदानी दोपहर तक बांदा में ही अंतिम संस्कार में व्यस्त रहे।