{"_id":"5e1b628d8ebc3e879b780264","slug":"it-is-unfair-to-consider-creator-dudhanath-as-just-a-storyteller-banda-news-knp5380207124","type":"story","status":"publish","title_hn":"रचनाकार दूधनाथ को सिर्फ कहानीकार मानना नाइंसाफी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रचनाकार दूधनाथ को सिर्फ कहानीकार मानना नाइंसाफी
विज्ञापन
It is unfair to consider creator Dudhanath as just a storyteller
- फोटो : BANDA
बांदा। हिंदी के मशहूर रचनाकार दूधनाथ सिंह की पुण्यतिथि पर रविवार को जिला सहकारी संघ स्थित केदार सभागार में गोष्ठी हुई। लखनऊ से आए जलेश के राज्य सचिव युवा आलोचक नलिन रंजन सिंह ने कहा कि दूधनाथ सिंह की चर्चा सिर्फ कहानीकार या उपन्यासकार के रूप में करना उनके साथ नाइंसाफी है।
उन्होंने कहा कि सही मायनों में दूधनाथ सिंह बहुत बड़े आलोचक और संपादक थे। डा. शशि भूषण मिश्रा ने कहा कि दूधनाथ साधोत्तरी कथा की उपलब्धि हैं। दूधनाथ सिंह के विद्यार्थी रह चुके सुधीर सिंह (अध्यक्ष डीसीडीएफ) उनकी नपनी कहानी और डायरी के अप्रकाशित अंशों का पाठ किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर कवि केशव तिवारी ने भी संबोधित किया। जनवादी लेखक संघ के तत्वाधान में आयोजित गोष्ठी में डा. चद्रिंका प्रसाद दीक्षित, आनंद सिन्हा, बाबूलाल गुप्त, रामविशाल सिंह, डा. रामगोपाल गुप्त, प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह, डा. अंकिता तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार अरुण खरे, विमल पांडेय, विजय शंकर परमार भी मौजूद रहे। इलाहाबाद के धर्मेंद्र यादव ने केदार बाबू का गीत प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सही मायनों में दूधनाथ सिंह बहुत बड़े आलोचक और संपादक थे। डा. शशि भूषण मिश्रा ने कहा कि दूधनाथ साधोत्तरी कथा की उपलब्धि हैं। दूधनाथ सिंह के विद्यार्थी रह चुके सुधीर सिंह (अध्यक्ष डीसीडीएफ) उनकी नपनी कहानी और डायरी के अप्रकाशित अंशों का पाठ किया।
विज्ञापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर कवि केशव तिवारी ने भी संबोधित किया। जनवादी लेखक संघ के तत्वाधान में आयोजित गोष्ठी में डा. चद्रिंका प्रसाद दीक्षित, आनंद सिन्हा, बाबूलाल गुप्त, रामविशाल सिंह, डा. रामगोपाल गुप्त, प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह, डा. अंकिता तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार अरुण खरे, विमल पांडेय, विजय शंकर परमार भी मौजूद रहे। इलाहाबाद के धर्मेंद्र यादव ने केदार बाबू का गीत प्रस्तुत किया।
विज्ञापन