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सर्वश्रेष्ठ काम पर गोपाल रत्न पुरस्कार
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बांदा। पचास से अधिक स्वदेशी नस्लों के पशुओं के पालन समेत कृत्रिम गर्भाधान और दूध उत्पादन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुंदेलखंड के सर्वश्रेष्ठ 63 किसानों और पशुपालकों को गोपाल रत्न पुरस्कार 2021 से नवाजा जाएगा। उक्त तीनों में तीन-तीन पशुपालक पुरस्कार के लिए चयनित किया जाना है।
इस तरह से बुंदेलखंड के सभी सात जिलों में कुल 63 पशुपालक और किसान पुरस्कार के लिए चिह्नित किए जाएंगे। पशुपालन विकास परिषद के प्रदेश प्रभारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. अरविंद कुमार सिंह ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को भेजे पत्र में कहा कि भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने दुग्ध पालन व डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए गोपाल रत्न पुरस्कार 2021 की शुरुआत की है।
हर जिले में 50 से अधिक स्वदेशी प्रजाति के पशु पालन, कृत्रिम गर्भाधान में बेहतर करने वाले व दुग्ध उत्पादन में अच्छा कार्य करने वालों को प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक योजना में तीन किसान यानी जिले में कुल नौ लोगों को गोपाल रत्न पुरस्कार 2021 दिया जाएगा।
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प्रथम पुरस्कार में पांच लाख, द्वितीय में तीन लाख व तृतीय पुरस्कार में दो लाख रुपये दिए जाएंगे। प्रशस्तिपत्र व स्मृति चिन्ह भी दिया जाएगा। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय समिति द्वारा पात्रों का चयन किया जाएगा। समिति में सीडीओ, जिला पशु चिकित्साधिकारी, एसडीएम सदस्य होंगे।
ऑनलाइन किए जाएंगे आवेदन
पुरस्कार के लिए आवेदन मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (कृषि भवन नई दिल्ली) और पशुपालन विभाग (उत्तर प्रदेश) की वेबसाइट पर किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन 15 सितंबर तक भरे जा सकेंगे।
क्या है योजना की अर्हता
स्वदेशी पशु नस्ल पालन पुरस्कार योजना में पशु पालक स्वदेशी प्रजाति व महिषवंश (भैंस) की 17 प्रजाति में से एक प्रजाति के पशुओं का पालन करता हो। सर्वश्रेष्ठ दुग्ध सहकारी समिति/दुग्ध उत्पादन संस्था/डेयरी पशुपालक उत्पादक संघ पुरस्कार योजना में कोआपरेटिव एक्ट/कंपनी एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत, ग्राम स्तर पर गठित दुग्ध सहकारी समिति/दुग्ध उत्पादक संस्था/डेयरी पशुपालक उत्पादक संघ जो कम से कम 100 लीटर दूध का प्रतिदिन संग्रह करता हो। कम से कम 50 पशुपालक उसके सदस्य हों।
विकास खंड अधिकारियों को पत्र भेजा गया है कि वह ग्राम सभा/बीडीसी बैठक बुलाकर सदस्यों को गोपाल रत्न पुरस्कार 2021 की जानकारी उपलब्ध करा दें। साथ ही गांवों में डुग्गी पिटवाकर ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी जाए, ताकि पशुपालक पुरस्कार योजना लाभ पा सकें।
- मनोज अवस्थी, उप निदेशक पशुपालन, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा
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इस तरह से बुंदेलखंड के सभी सात जिलों में कुल 63 पशुपालक और किसान पुरस्कार के लिए चिह्नित किए जाएंगे। पशुपालन विकास परिषद के प्रदेश प्रभारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. अरविंद कुमार सिंह ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को भेजे पत्र में कहा कि भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने दुग्ध पालन व डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए गोपाल रत्न पुरस्कार 2021 की शुरुआत की है।
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हर जिले में 50 से अधिक स्वदेशी प्रजाति के पशु पालन, कृत्रिम गर्भाधान में बेहतर करने वाले व दुग्ध उत्पादन में अच्छा कार्य करने वालों को प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक योजना में तीन किसान यानी जिले में कुल नौ लोगों को गोपाल रत्न पुरस्कार 2021 दिया जाएगा।
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प्रथम पुरस्कार में पांच लाख, द्वितीय में तीन लाख व तृतीय पुरस्कार में दो लाख रुपये दिए जाएंगे। प्रशस्तिपत्र व स्मृति चिन्ह भी दिया जाएगा। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय समिति द्वारा पात्रों का चयन किया जाएगा। समिति में सीडीओ, जिला पशु चिकित्साधिकारी, एसडीएम सदस्य होंगे।
ऑनलाइन किए जाएंगे आवेदन
पुरस्कार के लिए आवेदन मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (कृषि भवन नई दिल्ली) और पशुपालन विभाग (उत्तर प्रदेश) की वेबसाइट पर किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन 15 सितंबर तक भरे जा सकेंगे।
क्या है योजना की अर्हता
स्वदेशी पशु नस्ल पालन पुरस्कार योजना में पशु पालक स्वदेशी प्रजाति व महिषवंश (भैंस) की 17 प्रजाति में से एक प्रजाति के पशुओं का पालन करता हो। सर्वश्रेष्ठ दुग्ध सहकारी समिति/दुग्ध उत्पादन संस्था/डेयरी पशुपालक उत्पादक संघ पुरस्कार योजना में कोआपरेटिव एक्ट/कंपनी एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत, ग्राम स्तर पर गठित दुग्ध सहकारी समिति/दुग्ध उत्पादक संस्था/डेयरी पशुपालक उत्पादक संघ जो कम से कम 100 लीटर दूध का प्रतिदिन संग्रह करता हो। कम से कम 50 पशुपालक उसके सदस्य हों।
विकास खंड अधिकारियों को पत्र भेजा गया है कि वह ग्राम सभा/बीडीसी बैठक बुलाकर सदस्यों को गोपाल रत्न पुरस्कार 2021 की जानकारी उपलब्ध करा दें। साथ ही गांवों में डुग्गी पिटवाकर ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी जाए, ताकि पशुपालक पुरस्कार योजना लाभ पा सकें।
- मनोज अवस्थी, उप निदेशक पशुपालन, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा