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Banda News: बांदाः मंडल में रासायनिक खाद से बंजर की कगार पर है खेती

Tue, 06 Dec 2022 11:18 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 06 Dec 2022 11:18 PM IST
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Farming is on the verge of barren due to chemical fertilizers in Mandal
बांदा। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से चित्रकूट धाम मंडल के खेत बंजर होने की कगार पर पहुंच रहे हैं। जमीन से नाइट्रोजन और फास्फोरस जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व तेजी से घट रहे हैं। पोटाश भी कम हो रहा है। आलम यह है कि चारों जिलों के खेतों में नाइट्रोजन और फास्फोरस न्यूनतम (लो) स्तर पर पहुंच गया है। मृदा नमूनों के परीक्षण से यह स्थिति सामने आई। जमीन की घटती उत्पादन क्षमता भी चिंता का सबब बन रही है।
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मृदा विभाग के मुताबिक, चित्रकूट धाम मंडल में सबसे बुरी स्थिति बांदा और हमीरपुर जनपदों की है। यहां के खेतों में नाइट्रोजन और फास्फोरस का स्तर बेहद कम है। इसके बाद बाद चित्रकूट और महोबा जनपद है। इसका सीधा असर फसल उत्पादन में पड़ रहा है। फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान अधिक रासायनिक खाद जैसे यूरिया और डीएपी का इस्तेमाल करते हैं। फसल उत्पादन तो बेहतर होता है पर जमीन के पोषकतत्व तेजी से गायब हो रहे हैं। नतीजे में खेत बंजर की कगार पर पहुंच रहे हैं।
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मृदा विभाग के शोध सहायक श्रीकृष्णा ने बताया कि चारों जिलों में खेतों की हालत ऐसी है कि पांच फीट गहराई तक पोषक तत्व गायब हो रहे हैं। पूर्व में लगभग 40 हजार मिट्टी के नमूनों की जांच की गई। सभी नमूनों में आर्गेनिक कार्बन (नाइट्रोजन) और फास्फोरस कम मिला है। यह स्थिति जमीन को बंजर की कगार पर पहुंचाने वाली है। इसकी मुख्य वजह खाद और अंधाधुंध कीटनाशक का इस्तेमाल है।
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उधर, बड़ोखर खुर्द गांव निवासी प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने बताया कि बुंदेलखंड की मिट्टी से कार्बन की मात्रा तेजी से कम हो रही है। उपजाऊ जमीन में करीब तीन फीसदी कार्बन तत्व होने चाहिए, लेकिन यह 0.3 फीसदी पर है। खेती-किसानी वालों के लिए जमीन की यह स्थिति चिंताजनक है। जमीन में अच्छे पोषकतत्व नहीं होंगे तो फसल पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। अत्यधिक खाद के इस्तेमाल से आने वाले समय में जमीनें बंजर हो जाएंगी। गोबर आदि अन्य जैविक खाद से ही खेत में पोषकतत्व बढ़ सकेंगे।
अबकी मंडल में 19 हजार नमूने जांचने का लक्ष्य
बांदा। कोरोना काल शुरू होने के दौरान वर्ष 2020 से मृदा नमूनों की जांच नहीं हो रही है। मिट्टी के नमूनों की जांच में इस्तेमाल होने वाले रसायन की खरीद के लिए शासन स्तर से बजट भी नहीं मिला। नतीजे में मिट्टी जांच बंद रही। शोध सहायक के मुताबिक, इस वर्ष शासन ने पुन: मिट्टी जांच के आदेश दिए हैं। चित्रकूटधाम मंडल में 19,200 नमूने जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। करीब 40 फीसदी बजट भी जारी हो गया है। इनमें बांदा जिले में 8000 नमूनों की जांच होगी। हमीरपुर में करीब 6000 और चित्रकूट व महोबा में लगभग 2500-2500 नमूने जांचे जाएंगे।

पोषकतत्व की कमी से फसल पर असर
नाइट्रोजन : खेत में इसकी कमी से उत्पादन पर असर पड़ता है। दाना कमजोर और हल्का होता है। फसल पीड़ी पड़ जाती है।
फास्फोरस : गेहूं हो या धान दाना सिकुड़कर हल्का हो जाता है। उत्पादन क्षमता घटती है।
पोटाश : इस पोषक तत्व की कमी से जड़ कमजोर होती है। पौधा झुकने लगता है। उत्पादन में गिरावट आती है।
वर्जन
रासायनिक खाद व कीटनाशक के इस्तेमाल से खेत के पोषकतत्व पर बुरा असर पड़ता है। उपज प्रभावित होती है। मिट्टी से केंचुआ समेत अन्य सूक्ष्य जीव भी नष्ट हो जाते हैं। खेत में आग लगाने से भी जमीन की ताकत खत्म होती है। जैविक खाद के इस्तेमाल से खेत में पोषक तत्व बढ़ेंगे, साथ ही उपज भी बढ़ेगी। - नरेंद्र कुमार, उप निदेशक भूमि संरक्षण, बांदा।
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