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मुआवजा है या मजाक, दीजिए जवाब

Mon, 13 Apr 2015 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Mon, 13 Apr 2015 11:53 PM IST
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farmers Anger over compensation

सिंचित पर 9,000 और असिंचित पर 4500 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा देने के सरकारी दावों की यहां के प्रशासन ने हवा निकाल दी है। बड़ी संख्या में किसानों को सिर्फ 750 रुपये के चेक दिए गए हैं। नाराज किसानों और किसान नेताओं ने सोमवार को इन चेकों को हवा में लहराते हुए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया।

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बारिश और ओलावृष्टि के बाद प्रदेश सरकार ने घोषणा की थी कि सिंचित और असिंचित भूमि पर क्रमश: 9,000 और 4500 रुपये प्रति हेक्टेयर का न्यूनतम मुआवजा दिया जाएगा। बाद में सरकार ने मुआवजा और बढ़ाने का भरोसा दिया था, लेकिन यहां राजस्व विभाग के अधिकारियों ने ऐसा सर्वे किया कि किसानों को 750 रुपये के चेक थमा दिए गए।
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मुआवजे की इस रकम के निर्धारण का क्या मानक है? इसका जवाब लेखपाल से लेकर तहसीलदार और एसडीएम तक नहीं दे रहे। सोमवार को भारतीय किसान यूनियन नेताओं के साथ कई गांवों के किसानों ने चेक हाथों में लेकर प्रदर्शन किया। किसान लवकुश, महेंद्र प्रसाद, कमला को मात्र साढ़े सात-सात सौ के चेक मिले हैं।
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दिलीप पुत्र नर्वदा और उसके भाई लवकुश कुमार को 4500 तो इंद्रपाल को 972 रुपये के चेक मिला है। ऐसा कैसे हुआ। दोनों का फसल करीब-करीब बराबर बर्बाद हुई। यह भी आरोप लगाया कि अतर्रा तहसील के संग्रामपुर में लेखपाल ने सर्वे के नाम पर 100 से 3000 रुपये तक वसूले हैं।


इसकी जांच कराई जाए। इस मौके पर किसान यूनियन नेता बैजनाथ अवस्थी, बलराम तिवारी आदि शामिल रहे। उधर, बबेरू तहसील के दफ्तरा गांव के ग्रामीणों ने एडीएम को दिए ज्ञापन में मात्र 750 रुपये का चेक दिए जाने पर विरोध जताया। आंदोलन की चेतावनी दी। ग्रामीणों ने इस मुआवजे को मजाक की संज्ञा दी।


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