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Banda News: खतौनी न मिलने से अटकी 37 हजार की फार्मर रजिस्ट्री
Sun, 04 Oct 2026 10:59 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sun, 04 Oct 2026 10:59 PM IST
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फोटो 10- किसान कामता गुप्ता। संवाद
बांदा। जिले में चकबंदी, नाम में विसंगति और भूमि के अंश का मिलान न होने से 37 हजार किसान फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं।
इसका खामियाजा उन्हें खाद-बीज लेने से लेकर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पाने तक भुगतना पड़ रहा है। चकबंदी प्रक्रिया के कारण खतौनी उपलब्ध न होने से कुछ गांवों में रजिस्ट्री का काम अटका है। ऐसे में किसानों को खाद के लिए कृषि विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
जिले में करीब 2,88,258 किसान पंजीकृत हैं। इनमें से 2,51,258 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो चुकी है। शेष 37 हजार किसान अब भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं। रजिस्ट्री नहीं होने से पात्र किसानों की सम्मान निधि अटकने का खतरा है। खाद वितरण में भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार की ओर से किसान की पहचान और कृषि भूमि के सत्यापन के लिए फार्मर रजिस्ट्री को महत्वपूर्ण बनाया गया है। ऐसे में राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी या चकबंदी के कारण खतौनी नहीं मिलने से किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में पिछड़ रहे हैं।
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चकबंदी की प्रक्रिया से गुजर रहे गांवों में किसानों की जमीन से संबंधित अभिलेख और खतौनी उपलब्ध नहीं होने के कारण ऑनलाइन रजिस्ट्री में बाधा आ रही है। कुछ किसानों के नाम राजस्व अभिलेख और आधार में अलग-अलग दर्ज होने या जमीन में उनके हिस्से का सही मिलान नहीं होने से आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
इन विसंगतियों को दूर कराने के लिए किसानों को राजस्व और कृषि विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। समस्या का समय से समाधान नहीं होने पर खाद की जरूरत के समय उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
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वर्जन
समितियों को स्पष्ट निर्देश है कि अगर ऐसा कोई किसान आता है तो पुरानी खतौनी को देखकर उन्हें खाद मुहैया कराई जाए। अगर विभाग में कोई आता है तो उसे तुरंत अपनी समिति पर जाकर खाद लेने के लिए निर्देशित किया जाता है। समिति को भी तुरंत खाद देने के लिए कहा जाता है। पीएम सम्मान निधि में दिक्कत आ रही है। इसके लिए शासन से वैकल्पिक निर्देश के लिए पत्र लिखा गया है। करीब 39 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया जारी है।
एके यादव, उप कृषि निदेशक बांदा।
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राजस्व अभिलेखों की विसंगतियां दूर कराने की मांग
पैलानी। तहसील के खप्टिहा कलां में फार्मर रजिस्ट्री का काम करीब 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके बावजूद नाम में अंतर और भूमि के अंश का मिलान नहीं होने से कुछ किसान वंचित हैं।
कस्बे के अनुराग तिवारी और उनके पुत्र राज यादव की फार्मर रजिस्ट्री भी नाम के मिलान में विसंगति के कारण नहीं हो सकी है। इससे उन्हें किसान सम्मान निधि और खाद हासिल करने में दिक्कत हो रही है। किसानों को उम्मीद है कि राजस्व अभिलेखों की विसंगतियां दूर कर रजिस्ट्री पूरी कराई जाएगी, ताकि उन्हें योजनाओं का लाभ लेने के लिए भटकना न पड़े।
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ये दस्तावेज जरूरी
फार्मर रजिस्ट्री में किसान का आधार कार्ड, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और कृषि भूमि से संबंधित खतौनी या अन्य मान्य राजस्व अभिलेख जरूरी होते हैं। भूमि के विवरण का किसान के नाम और हिस्से से मिलान भी आवश्यक है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए पात्रता के साथ किसान का आधार आधारित सत्यापन, बैंक खाते का विवरण और भूमि अभिलेखों का सत्यापन भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में नाम, आधार, बैंक खाते या भूमि संबंधी विवरण में अंतर होने पर पहले उसका सुधार कराना जरूरी है। चकबंदी वाले गांवों में अभिलेख उपलब्ध कराने और विसंगतियों का समाधान करने में देरी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
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बोले किसान-पीएम सम्मान निधि नहीं मिल रही
फार्मर रजिस्ट्री नहीं बनने के कारण अब तक पीएम सम्मान निधि से नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही खाद लेने के लिए भी दौड़ना पड़ता है।
-कामता गुप्ता, खप्टिहा कलां।
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गांव खम्हौरा में खेत हैं। आधार कार्ड में पिता के नाम की त्रुटि होने के कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। सम्मान निधि एवं सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
-यशराज सिंह, शास्त्री नगर अतर्रा।
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इसका खामियाजा उन्हें खाद-बीज लेने से लेकर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पाने तक भुगतना पड़ रहा है। चकबंदी प्रक्रिया के कारण खतौनी उपलब्ध न होने से कुछ गांवों में रजिस्ट्री का काम अटका है। ऐसे में किसानों को खाद के लिए कृषि विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
जिले में करीब 2,88,258 किसान पंजीकृत हैं। इनमें से 2,51,258 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो चुकी है। शेष 37 हजार किसान अब भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं। रजिस्ट्री नहीं होने से पात्र किसानों की सम्मान निधि अटकने का खतरा है। खाद वितरण में भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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सरकार की ओर से किसान की पहचान और कृषि भूमि के सत्यापन के लिए फार्मर रजिस्ट्री को महत्वपूर्ण बनाया गया है। ऐसे में राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी या चकबंदी के कारण खतौनी नहीं मिलने से किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में पिछड़ रहे हैं।
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चकबंदी की प्रक्रिया से गुजर रहे गांवों में किसानों की जमीन से संबंधित अभिलेख और खतौनी उपलब्ध नहीं होने के कारण ऑनलाइन रजिस्ट्री में बाधा आ रही है। कुछ किसानों के नाम राजस्व अभिलेख और आधार में अलग-अलग दर्ज होने या जमीन में उनके हिस्से का सही मिलान नहीं होने से आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
इन विसंगतियों को दूर कराने के लिए किसानों को राजस्व और कृषि विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। समस्या का समय से समाधान नहीं होने पर खाद की जरूरत के समय उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
वर्जन
समितियों को स्पष्ट निर्देश है कि अगर ऐसा कोई किसान आता है तो पुरानी खतौनी को देखकर उन्हें खाद मुहैया कराई जाए। अगर विभाग में कोई आता है तो उसे तुरंत अपनी समिति पर जाकर खाद लेने के लिए निर्देशित किया जाता है। समिति को भी तुरंत खाद देने के लिए कहा जाता है। पीएम सम्मान निधि में दिक्कत आ रही है। इसके लिए शासन से वैकल्पिक निर्देश के लिए पत्र लिखा गया है। करीब 39 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया जारी है।
एके यादव, उप कृषि निदेशक बांदा।
राजस्व अभिलेखों की विसंगतियां दूर कराने की मांग
पैलानी। तहसील के खप्टिहा कलां में फार्मर रजिस्ट्री का काम करीब 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके बावजूद नाम में अंतर और भूमि के अंश का मिलान नहीं होने से कुछ किसान वंचित हैं।
कस्बे के अनुराग तिवारी और उनके पुत्र राज यादव की फार्मर रजिस्ट्री भी नाम के मिलान में विसंगति के कारण नहीं हो सकी है। इससे उन्हें किसान सम्मान निधि और खाद हासिल करने में दिक्कत हो रही है। किसानों को उम्मीद है कि राजस्व अभिलेखों की विसंगतियां दूर कर रजिस्ट्री पूरी कराई जाएगी, ताकि उन्हें योजनाओं का लाभ लेने के लिए भटकना न पड़े।
ये दस्तावेज जरूरी
फार्मर रजिस्ट्री में किसान का आधार कार्ड, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और कृषि भूमि से संबंधित खतौनी या अन्य मान्य राजस्व अभिलेख जरूरी होते हैं। भूमि के विवरण का किसान के नाम और हिस्से से मिलान भी आवश्यक है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए पात्रता के साथ किसान का आधार आधारित सत्यापन, बैंक खाते का विवरण और भूमि अभिलेखों का सत्यापन भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में नाम, आधार, बैंक खाते या भूमि संबंधी विवरण में अंतर होने पर पहले उसका सुधार कराना जरूरी है। चकबंदी वाले गांवों में अभिलेख उपलब्ध कराने और विसंगतियों का समाधान करने में देरी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
बोले किसान-पीएम सम्मान निधि नहीं मिल रही
फार्मर रजिस्ट्री नहीं बनने के कारण अब तक पीएम सम्मान निधि से नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही खाद लेने के लिए भी दौड़ना पड़ता है।
-कामता गुप्ता, खप्टिहा कलां।
गांव खम्हौरा में खेत हैं। आधार कार्ड में पिता के नाम की त्रुटि होने के कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। सम्मान निधि एवं सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
-यशराज सिंह, शास्त्री नगर अतर्रा।

फोटो 10- किसान कामता गुप्ता। संवाद