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सूखे से भूजल स्तर 20 से 30 फीट गिरा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 22 Nov 2015 11:21 PM IST
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बांदा। सूखे से बुंदेलखंड में राजकीय नलकूप भी जवाब दे रहे हैं। इस साल बारिश न होने से भूजल स्तर 20 से 30 फीट नीचे चला गया है।
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उधर, बिजली के लो वोल्टेज से नलकूपों के आए दिन मोटर और स्टार्टर फुंक रहीं हैं। लापरवाह नलकूप और बिजली विभाग इन्हें महीनों बाद भी दुरुस्त नहीं कर रहा।
मौजूदा समय में जिले के 545 नलकूपों में से 35 नलकूप ट्रांसफार्मर फुंकने और 18 मोटर या स्टार्टर जलने से ठप हैं। 35 नलकूप जलस्तर गिरने से पानी नहीं दे रहे हैं। नलकूप विभाग के अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
शासन ने बुंदेलखंड के सभी जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। साथ ही नलकूप व नहर विभाग को सतर्क करते हुए ज्यादा से ज्यादा समय नलकूप चलाने का आदेश दिया है।
बुंदेलखंड में बांधों में पानी खत्म होने से नहरें सूखी पड़ी हैं। नलकूप विभाग के मुताबिक सामान्य तौर पर इन दिनों नलकूपों का वाटर लेबल 70 से 100 फीट होना चाहिए, लेकिन यह मौजूदा समय में 100 से 120 के बीच पहुंच गया है।
लो वोल्टेज से स्टार्टर और नलकूप की मोटरें फुंक रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक एक फुंकी मोटर ठीक कराने में औसतन 20 से 25 हजार रुपये तक का खर्च आता है। माह भर में 30 से 35 मोटर फुंक रहे हैं।
जिले में करीब ढाई लाख किसान खेतीबाड़ी से जुड़े हैं। कुल 1,57,744 हेक्टेयर क्षेत्रफल सिंचित है। इनमें 65,513 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई नहरों पर निर्भर है।
16 हजार हेक्टेयर राजकीय नलकूपों के भरोसे है। निजी नलकूपों से 64,233 हेक्टेयर की सिंचाई होती है। किसान जगतपाल यादव (जमुनी पुरवा) ने बताया कि 26 से 28 फीट पर कुएं में पानी था।
इससे 30 फीट के सेक्शन से सिंचाई हो जाती थी, लेकिन इस समय पंपसेट के लिए 35 फीट के सेक्शन से सिंचाई करनी पड़ रही है। दो से तीन घंटे में कुएं का पानी खत्म हो जाता है।
जिले में एक साथ सभी नलकूप चलने से जल स्तर में काफी गिरावट आई है। शासन-प्रशासन को भी इसकी जानकारी दी गई है।
किसानों के दबाव में लो वोल्टेज में नलकूप चलाने पड़ रहे हैं। इससे मोटर फुंक रहीं हैं और विभाग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। -लक्ष्मी नारायण, एक्सईएन, नलकूप विभाग