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Banda News: सिनेमा के जन इतिहास से लेकर प्रतिरोध की अभिव्यक्ति पर चर्चा

Sun, 21 Sep 2025 12:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Sun, 21 Sep 2025 12:29 AM IST
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Discussion on public history of cinema and expression of resistance
फोटो - 21 - जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते वक्ता। संवाद
बांदा। शिक्षा का अधिकाधिक केंद्रीकरण करते हुए समवर्ती सूची के इस विषय में राज्यों की पहल को पूरी तरह से खत्म कर देना शिक्षा पर फांसीवादी हिंदुत्व का हमला है। इसके साथ पाठ्यक्रम में ऐसे बदलाव करना जिसकी भारतीय इतिहास और समाज संबंधी सांप्रदायिक सोच को बढ़ावा मिले।
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यह बातें बड़ोखर खुर्द गांव में प्रेम सिंह की बगिया सभागार में जनवादी लेखक संघ के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंचल चौहान ने बताई। वहीं, सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार की शुरुआत सरोकार का सिनेमा पर संजय जोशी की प्रस्तुति से हुई। जिसमें उन्होंने सिनेमा के जन इतिहास से लेकर प्रतिरोध की अभिव्यक्ति की दृश्य पर चर्चा की और प्रोजेक्टर से प्रस्तुति की गई।
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इसके बाद महासचिव संजीव कुमार ने सांगठनिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में पिछले तीन वर्षों के साहित्य रचना विकास , प्रवृत्तियों और चुनौतियों पर चर्चा हुई। इस संगठनिक सत्र की अध्यक्षता चंचल चौहान, इब्बार रब्बी , राम प्रकाश त्रिपाठी, मृणाल और रेखा अवस्थी के अध्यक्ष मंडल ने की। महासचिव द्वारा प्रस्तुत की गई सांगठनिक रिपोर्ट पर विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों द्वारा चर्चा जारी रही जो रविवार को आखिरी दिन पूरी होगी। वहीं, नए राष्ट्रीय नेतृत्व का भी चुनाव होगा और विभिन्न विषयों पर प्रस्ताव पेश किया जाएंगे।
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शाम के सांस्कृतिक सत्र में कविता सत्र की शुरुआत केदारनाथ अग्रवाल की कविता बसंती हवा पर कथक नृत्य से हुई। कथक गुरु श्रद्धा निगम की उपस्थिति में उनकी छात्राओं द्वारा पेश किया गया। उसके बाद देश भर के आए कवियों ने कविता सत्र में अपनी कविताओं का पाठ किया।

कोट
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व्यापक अर्थों में हम पिछले एक दशक से ऐसे सामाजिक यथार्थ के बीच हैं जिसे फासीवाद और नव उदारवाद के जहरीले गठजोड़ के रूप में देखा जा सकता है। जहां धार्मिक अल्पसंख्यक, दलित आदिवासी और महिलाओं की दुर्दशा ही हुई है।
- इब्बार रब्बी, कवि, दिल्ली
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भारत को धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य से हिंदू राष्ट्र में तब्दील कर देने की मुहिम जारी है। इसे संविधान के बुनियादी ढांचे को बदलकर मंजिल तक पहुंचाया जा सकता है। कानूनविद सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले को बहस में लाते रहें जिसमें संविधान के बुनियादी ढांचे की अपरिवर्तनीयता की बात की गई है।
- शुभा, लेखक, हरियाणा

फोटो - 21 - जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते वक्ता। संवाद

फोटो - 21 - जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते वक्ता। संवाद

फोटो - 21 - जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते वक्ता। संवाद

फोटो - 21 - जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते वक्ता। संवाद

फोटो - 21 - जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते वक्ता। संवाद

फोटो - 21 - जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते वक्ता। संवाद

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