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Banda News: तानाशाह सोच ने की थी लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश

Thu, 26 Jun 2025 11:24 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 26 Jun 2025 11:24 PM IST
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Dictatorial thinking tried to crush democracy
महिला महाविद्यालय में गोष्ठी को संबोधित करते मुख्य वक्ता। - फोटो : स्रोत : संगठन
बांदा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने महिला महाविद्यालय में आपातकाल की विभीषिका के 50 वर्ष पूरे होने पर आपातकालीन संघर्ष गाथा विषय पर संगोष्ठी की। लोकतंत्र रक्षक सेनानी ने कहा कि उस समय तानाशाह के सोच के जरिए लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश की गई थी।
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लोकतंत्र सेनानी अखिलेश श्रीवास्तव व मैयादीन सोनी आपातकाल के संघर्ष बताते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि आज का दिन हमें उस काले अध्याय की याद दिलाता है, भारत के लोकतंत्र को एक तानाशाह सोच ने कुचलने की कोशिश की थी। 25 जून 1975 को देश में आपातकाल थोप दिया गया। संविधान को ताक पर रखकर, न्यायपालिका को दबाकर और जनता की आवाज को कुचलने का घिनौना प्रयास हुआ।
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मुख्य वक्ता डॉ.दीपाली गुप्ता ने कहा कि हम नहीं भूल सकते कि किस तरह से गरीबों को जबरन नसबंदी का शिकार बनाया गया। युवाओं की आवाज को लाठियों से दबाया गया। पत्रकारों की कलम को कैद में डाल दिया गया। संविधान की आत्मा को जंजीरों में जकड़ा गया। वो दौर था जब ‘सरकार’ ने खुद को ‘देश’ समझ लिया और सत्ता की रक्षा के नाम पर हर आवाज को कुचलने की कोशिश की। डॉ. अशोक सिंह गौर व डॉ. शैलेश सिंह ने भी चर्चा की। संचालन आयुषी त्रिपाठी ने किया। लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. जितेंद्र वाजपेयी, डॉ. विक्रम बाला, विभाग संगठन मंत्री शिवम पांडेय, दिव्यांशु, गोविंद, कार्तिकेय, नीतीश, आशीष, राज, अभय, श्लोक, स्वतंत्र साहू, रामेंद्र, वंश,अनामिका, मानसी आदि मौजूद रहीं।
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