विकलांग पत्नी की हत्या में उम्र कैद
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बांदा। दहेज के लिए युवती की हत्या कर देने के मामले में अदालत ने अभियुक्त पति को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। इसी मामले में आरोपी सास-ससुर बरी हो गए। हमीरपुर जनपद के पाटनपुर गांव निवासी श्यामबाबू पुत्र रामदास धुरिया ने 26 अगस्त 2012 को कोतवाली नगर में दी तहरीर में कहा था कि विकलांग पुत्री संगीता की शादी 5 जुलाई 2012 को भुजरख (तिंदवारी) गांव निवासी प्रेमचंद्र पुत्र राजबहादुर धुरिया के साथ हुई थी। लेकिन शहर के कालूकुआं मोहल्ले में किराये के मकान में रहते थे। शादी में हैसियत के मुताबिक दहेज दिया।
ससुरालीजन 50 हजार रुपये दहेज की मांग करते हुए उसे ताना देते और मारते-पीटते थे। 23 अगस्त की रात पति प्रेमचंद्र छोटे गैस सिलेंडर व धारदार हथियार मारकर संगीता को मरणासन्न कर भाग गया। लहूलुहान हालत में मकान मालिक व अन्य किरायेदारों ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने धारा 498-ए, 304-बी, 302 आईपीसी व दहेज अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली। विवेचक ने पति और सास व ससुर के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया। सहायक शासकीय अधिवक्ता शिवभूषण वर्मा ने छह गवाह पेश किए। अपर सेशन न्यायाधीश पंचम तहसीलदार सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पति प्रेमचंद्र को दोषी पाते हुए धारा 302 में आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त जेल भुगतना होगी। दहेज अधिनियम में सास व ससुर को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। अभियुक्त प्रेमचंद्र जेल में है।