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अन्ना गायों पर तीन जिलों के किसान आमने-सामने
अमर उजाला ब्यूरो/बांदा
Updated Sat, 30 Dec 2017 10:55 PM IST
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बांदा/मटौंध। बुंदेलखंड में अन्ना गायें कानून और शांति व्यवस्था के लिए चुनौती बन गई हैं। फसलों को बचाने के लिए ‘मरता क्या न करता’ की तर्ज पर किसान आपस में ही टकरा रहे हैं। ताजी घटना में चित्रकूटधाम मंडल के बांदा, महोबा और हमीरपुर जनपदों के सीमावर्ती गांवों के किसानों के बीच शुक्रवार की रात खूनी संघर्ष बाल-बाल बच गया। महोबा के जनपद के किसान अन्ना गाय हांक कर बांदा जनपद की सीमा में दाखिल कर रहे थे।
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मटौंध क्षेत्र में पानी संकट के चलते 40 फीसदी किसानों ने रबी की बुवाई नहीं की। 60 फीसदी किसानों ने गेहूं, चना, सरसों आदि फसलें बोई तो उन्हें अन्ना मवेशियों का डर सता रहा है। कड़ाके की ठंड में रात-दिन किसान खेतों में डेरा डाले फसलें ताक रहे हैं। शुक्रवार की रात महोबा जनपद के रेवई और हमीरपुर जिले के सिरसी गांव के लगभग आधा सैकड़ा किसान लगभग दो सैकड़ा गायों को हांक कर बांदा जनपद के मटौंध में ले आए। खेतों में फसल ताक रहे किसानों ने झुंड देखा तो एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया। तनातनी हो गई। एक-दूसरे को मारने के लिए हवा में लाठियां उठा लीं। किसानों के तीखे विरोध के चलते आखिरकार रेवई और सिरसी गांव के किसानों को अन्ना गायें वापस ले जाना पड़ीं।
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मटौंध क्षेत्र के किसान बबलू सिंह, दाऊ सिंह, चतुर सिंह, परशुराम कुशवाहा, भैरम कुशवाहा, नन्हे कुशवाहा आदि ने बताया कि अन्ना मवेशियों की रोकथाम के लिए शासन-प्रशासन ने शीघ्र कड़े कदम नहीं उठाए तो खूनी संघर्ष होने लगेगा। उन्होंने बताया कि मटौंध में बने कान्हा गोशाला में लगभग एक हजार गायें बंद हैं। किसान व ग्रामीण चंदाकर चारा-भूसा का इंतजाम कर रहे हैं। उधर, इस बाबत मटौंध थाना इंस्पेक्टर अनीता सिंह चौहान ने बताया कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है।
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