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बांदा में अवैध खनन के अभिलेख है सीबीआई के पास

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jan 2019 10:46 PM IST
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बांदा। अवैध खनन में सीबीआई जांच से बांदा जिला भी अछूता नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों पर यहां करीब 28 माह पूर्व (अगस्त 2016 को) सीबीआई टीम ने खनिज विभाग कार्यालय पर छापा मारकर खनन संबंधित तमाम अभिलेख कब्जे में ले लिए थे। माना जा रहा है कि बालू से कमाई करने वाले बांदा वालों पर भी सीबीआई का शिकंजा कस सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुलाई 2016 में सीबीआई को अवैध खनन की जांच के आदेश दिए थे। हमीरपुर के अधिवक्ता विजय द्विवेदी ने अवैध खनन की शिकायत की थी। हाईकोर्ट ने छह हफ्ते में सीबीआई को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। उसी दौरान 21 अगस्त को सीबीआई टीम बांदा आई थी।


रविवार को छुट्टी होने के बावजूद खनिज कार्यालय खुलवाकर खदानों से संबंधित कई अभिलेख कब्जे में ले लिए थे। तत्कालीन खनिज अधिकारी और लिपिक आदि से पूछताछ की थी। अभिलेख अभी भी सीबीआई के कब्जे में हैं। इस बीच अक्तूबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर रोक लगा दी थी। इससे बालू माफिया ने राहत की सांस ली थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जांच से रोक हटा ली।

शनिवार को हमीरपुर और जालौन समेत 14 स्थानों पर सीबीआई टीम ने छापे मारे। इनमें बांदा-हमीरपुर के स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र के सपा के निर्वाचित मौजूदा एमएलसी रमेश कुमार मिश्र का हमीरपुर स्थित मकान भी शामिल है। सीबीआई की जांच में नियम कानूनों की अनदेखी कर खदानों के किए गए पट्टे, अवैध खनन, पट्टा क्षेत्र में खनन, प्रतिबंधित मशीनों का इस्तेमाल इत्यादि शामिल हैं। ये गुनाह बालू माफियाओं ने बांदा में भी खूब किए हैं। ऐसे में किसी भी दिन सीबीआई के शिकंजे में बांदा के बालू कारोबारी भी फंस सकते हैं।

बांदा की दो खदानें हमीरपुर की जांच में
बांदा। हमीरपुर में सीबीआई द्वारा खदानों की की जा रही जांच में बांदा जिले की दो खदानें भी दायरे में आ सकती हैं। ये पैलानी और सिंधनकलां की खदानें हैं। वर्ष 2012 में सपा सरकार में इन दोनों खदानों के ई-टेंडर करने के बजाय लीज (पट्टे) पर खदानें दे दी गई थीं।

दोनों खदानों में हमीरपुर के बालू कारोबारी ही खनन करा रहे थे। इनमें एक महिला भी थी, जिसका सपा सरकार में काफी रसूख था। वह लखनऊ में रहकर यहां खदान चलवा रही थी। कयास लगाया जा रहा है कि सीबीआई दोनों खदानों की भी जांच कर सकती है। उधर, खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह का कहना है कि सीबीआई को कहीं भी जांच का अधिकार है।

नामजद के अलावा भी फंस सकते हैं सीबीआई जांच में
बांदा। सीबीआई द्वारा बुधवार को अपनी विशेष अपराध-तृतीय, नई दिल्ली में दर्ज कराई गई एफआईआर में नामजद 11 आरोपियों में 7 आरोपी बुंदेलखंड के हैं। हमीरपुर की तत्कालीन डीएम व खनिज अधिकारियों और कर्मचारियों के अतिरिक्त सीबीआई ने अज्ञात कर्मचारियों और आम लोगों को भी अभियुक्त बनाया है। ऐसे में माना जा रहा है कि सीबीआई की जांच में और लोग भी फंस सकते हैं। इन सभी पर चोरी, धन उगाही, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश में धारा 120बी, 379, 384, 420, 511 आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा 13 (2) व 13(1)(डी) लगाई गई है।

बुधवार (2 जनवरी) को सीबीआई के पुलिस अधीक्षक बसिल करकेत्ता द्वारा विशेष अपराध-तृतीय सीजीओ कांप्लेक्स, लोधी रोड, नई दिल्ली में दर्ज कराई गई एफआईआर में हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा है कि जांच में पाया गया है कि सरकारी कर्मियों (नामजद) ने आपराधिक षड्यंत्र करके अवैध रूप से खनन के पट्टे दिए और उनका नवीनीकरण किया। ई-टेंडरिंग प्रक्रिया को लागू नहीं किया।

इसमें शामिल सभी ने अवैध खनन और खनिज चोरी में सहयोग देकर धन लाभ कमाया। सीबीआई ने कहा है कि नामजद लोगों के अलावा तत्कालीन (वर्ष 2012 से 2016 तक) की अवधि में खनिज मंत्रीगण की भूमिका विवेचना का विषय होगी।

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