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सीएम से मिली मदद से साहूकारों का कर्ज चुकाएंगे देवराज
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 11 Oct 2015 11:47 PM IST
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बांदा। चार दशक से कटे पैर में लाठी बांधकर खेती
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किसानी कर रहे देवराज सीएम से मिले पांच लाख रुपये से पहले साहूकारों का
कर्ज चुकाएंगे। बाकी पैसा बेटे की पढ़ाई पर खर्च करेंगे।
प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार देवराज को अब अफसर हाथोंहाथ ले रहे हैं। उनकी सरकारी मेहमान की तरह खातिरदारी हो रही है। रविवार को छुट्टी के बावजूद अफसरों ने देवराज को कलेक्ट्रेट में ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई। डीएम ने खुद साइकिल पर सवार किया।
बबेरू तहसील के पतवन गांव में धनपत का डेरा निवासी मात्र 1.39 हेक्टेयर जमीन के काश्तकार देवराज 40 साल से कटे दाहिने पैर में लाठी बांधकर कष्टदाई जिंदगी बिता रहे थे। इसी स्थिति में खेती कर रहे थे। उनमें हिम्मत और हौसला कूट-कूट कर भरा है।
अब उनकी उम्र 65 बरस पार कर गई है, फिर भी वही जज्बा है। ‘अमर उजाला’ में फोटो सहित खबर छपने के बाद गुमनाम रहे देवराज की मानो लाटरी खुल गई। समाजसेवी आशीष सागर ने भी देवराज को मीडिया तक पहुंचाने में भरपूर मदद की।
सीएम के आदेश पर जिला प्रशासन देवराज को लखनऊ ले गया। डाक्टर शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विद्यालय में कटे पैर के स्थान पर कृत्रिम पैर लगाया गया। रविवार को सुबह कलेक्ट्रेट में डीएम सुरेश कुमार ने देवराज को शासन से मिली ट्राई साइकिल सौंपी।
डीएम ने खुद देवराज को साइकिल पर बैठाया। कवरेज के लिए बाकायदा मीडिया को बुलाया गया था। देवराज ने कहा कि सीएम से मिलने वाले पांच लाख रुपये में साहूकारों का कर्ज अदा करेगा। बेटा बीए में पढ़ रहा है, उसकी पढ़ाई आगे भी कराएगा। एसपी आरपी पांडेय, एडीएम डीएस पांडेय, जिला समाज कल्याण अधिकारी केके सिंह, प्रशासनिक अधिकारी सईद अहमद, डीएम के ओएसडी मुहीब अहमद भी मौजूद रहे।
अभी तक भले ही देवराज को अफसरों ने कोई तवज्जो न दी हो पर सीएम की नजरें इनायत होते ही अफसर भी उनके कद्रदान हो गए। कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम ने देवराज को अपने ठीक बगल बैठाया। डीएम की दूसरी तरफ एडीएम डीएस पांडेय बैठे।
डीएम सुरेश कुमार ने कहा कि किसानों को देवराज से प्रेरणा लेना चाहिए। जिंदगी में तकलीफें होती हैं पर उनसे भागना नहीं चाहिए। उधर, देवराज की पैरवी करने वाले समाजसेवी आशीष सागर का कहना है कि मीडिया में यह मुद्दा उछलने पर सीएम और डीएम को सुध आई। कहा कि जिले में और भी ऐसे परेशान किसान परिवार हैं, जिनकी मदद की जानी चाहिए।
प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार देवराज को अब अफसर हाथोंहाथ ले रहे हैं। उनकी सरकारी मेहमान की तरह खातिरदारी हो रही है। रविवार को छुट्टी के बावजूद अफसरों ने देवराज को कलेक्ट्रेट में ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई। डीएम ने खुद साइकिल पर सवार किया।
बबेरू तहसील के पतवन गांव में धनपत का डेरा निवासी मात्र 1.39 हेक्टेयर जमीन के काश्तकार देवराज 40 साल से कटे दाहिने पैर में लाठी बांधकर कष्टदाई जिंदगी बिता रहे थे। इसी स्थिति में खेती कर रहे थे। उनमें हिम्मत और हौसला कूट-कूट कर भरा है।
अब उनकी उम्र 65 बरस पार कर गई है, फिर भी वही जज्बा है। ‘अमर उजाला’ में फोटो सहित खबर छपने के बाद गुमनाम रहे देवराज की मानो लाटरी खुल गई। समाजसेवी आशीष सागर ने भी देवराज को मीडिया तक पहुंचाने में भरपूर मदद की।
सीएम के आदेश पर जिला प्रशासन देवराज को लखनऊ ले गया। डाक्टर शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विद्यालय में कटे पैर के स्थान पर कृत्रिम पैर लगाया गया। रविवार को सुबह कलेक्ट्रेट में डीएम सुरेश कुमार ने देवराज को शासन से मिली ट्राई साइकिल सौंपी।
डीएम ने खुद देवराज को साइकिल पर बैठाया। कवरेज के लिए बाकायदा मीडिया को बुलाया गया था। देवराज ने कहा कि सीएम से मिलने वाले पांच लाख रुपये में साहूकारों का कर्ज अदा करेगा। बेटा बीए में पढ़ रहा है, उसकी पढ़ाई आगे भी कराएगा। एसपी आरपी पांडेय, एडीएम डीएस पांडेय, जिला समाज कल्याण अधिकारी केके सिंह, प्रशासनिक अधिकारी सईद अहमद, डीएम के ओएसडी मुहीब अहमद भी मौजूद रहे।
अभी तक भले ही देवराज को अफसरों ने कोई तवज्जो न दी हो पर सीएम की नजरें इनायत होते ही अफसर भी उनके कद्रदान हो गए। कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम ने देवराज को अपने ठीक बगल बैठाया। डीएम की दूसरी तरफ एडीएम डीएस पांडेय बैठे।
डीएम सुरेश कुमार ने कहा कि किसानों को देवराज से प्रेरणा लेना चाहिए। जिंदगी में तकलीफें होती हैं पर उनसे भागना नहीं चाहिए। उधर, देवराज की पैरवी करने वाले समाजसेवी आशीष सागर का कहना है कि मीडिया में यह मुद्दा उछलने पर सीएम और डीएम को सुध आई। कहा कि जिले में और भी ऐसे परेशान किसान परिवार हैं, जिनकी मदद की जानी चाहिए।