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भूख से जूझ रहे गोशाला में संरक्षित मवेशी

Wed, 04 Aug 2021 10:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 10:57 PM IST
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Cattle protected in the cowshed battling hunger
Cattle protected in the cowshed battling hunger - फोटो : BANDA
करतल। अन्ना पशुओं को संरक्षित व बेहतर देखभाल के उद्देश्य से गांवों में बनाई गईं गोशालाओं का हाल बुरा है। पशुओं के खाने के लिए चारा-भूसा के लाले हैं। छह महीने से चारा-भूसा का भुगतान नहीं हुआ। भरपेट भोजन न मिलने से गोशाला में संरक्षित पशुओं के जिस्म जर्जर हो रहे हैं। असमय दम तोड़ रहे हैं।
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रगौली भटपुरा गोशाला में इन दिनों 460 गोवंश संरक्षित हैं। गोशाला संचालक धनंजय सिंह ने बताया कि पिछले तीन महीने से भूसा और चारा आदि के नाम पर कोई भुगतान नहीं किया गया। सीमावर्ती मध्य प्रदेश समेत तमाम गांवों से उधार भूसा खरीदकर पशुओं का भेंट भरा। अब कोई किसान उधार भूसा देने को तैयार नहीं है।
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इससे गोवंश कमजोर होकर दम तोड़ रहे हैं। मरने वाले गोवंशों को वहीं जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफन करा दिया जाता है। इसके अलावा गोवंशों की देखरेख के लिए लगे 6 कर्मचारियों को पिछले 6 माह से मजदूरी भी नहीं मिली। बारिश का पानी जमा होने से गोशाला में तालाब बन गया।
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ग्राम प्रधान रन्नो पटेल ने बताया कि रगौली, महाराजपुर, बिल्हरका, पुंगरी, कनाय आदि गांवों से उधार भूसा लिया जा चुका है। मध्य प्रदेश के सरवरिया पन्ना चौकी, भवानीपुर, राजापुर आदि गांवों से भी उधार भूसा लेकर गोवंशों को खिलाया जा चुका है। अब कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी मनोज सिंह ने बताया कि भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। शीघ्र पूरा बकाया भुगतान कराया जाएगा।
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