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कर्मचारी बदल गए, रात होते ही एजेंट नदारद
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Sun, 01 Nov 2015 11:34 PM IST
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बांदा। मतपत्रों से मतदान कराना अधिकारियों से लेकर प्रत्याशियों और उनके गणना एजेंटों तक के लिए भारी मशक्कत भरा साबित हुआ। सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक लगातार 12 घंटे की मतगणना में मात्र छह या सात राउंड ही गणना हो पाई। कम से कम 19 और अधिकतम 29 राउंड तक मतगणना होनी है।
ऐसे में रविवार की पूरी रात और सोमवार का अधिकांश दिन भी मतगणना के हवाले रहेगा। उधर, रात आठ बजे पहली पाली के मतगणना कर्मियों की छुट्टी हो गई। दूसरे पाली के कर्मचारी आ गए। लेकिन प्रत्याशियों के एजेंटों को ऐसा बदलाव या रिलीवर की कोई सुविधा नहीं थी। लिहाजा ज्यों-ज्यों रात गहराई त्यों-त्यों प्रत्याशियों के एजेंट नदारद होते गए। सुबह से शाम तक एजेंटों गैलरी खचाखच भरी थी। रात में यह गिने-चुने बचे। तमाम एजेंट तो अपने प्रत्याशी की दुर्दशा का नजारा देखकर शाम को ही खिसक लिए। यही हाल मतगणना केंद्रों के बाहर पंडालों का था।
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ऐसे में रविवार की पूरी रात और सोमवार का अधिकांश दिन भी मतगणना के हवाले रहेगा। उधर, रात आठ बजे पहली पाली के मतगणना कर्मियों की छुट्टी हो गई। दूसरे पाली के कर्मचारी आ गए। लेकिन प्रत्याशियों के एजेंटों को ऐसा बदलाव या रिलीवर की कोई सुविधा नहीं थी। लिहाजा ज्यों-ज्यों रात गहराई त्यों-त्यों प्रत्याशियों के एजेंट नदारद होते गए। सुबह से शाम तक एजेंटों गैलरी खचाखच भरी थी। रात में यह गिने-चुने बचे। तमाम एजेंट तो अपने प्रत्याशी की दुर्दशा का नजारा देखकर शाम को ही खिसक लिए। यही हाल मतगणना केंद्रों के बाहर पंडालों का था।
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