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चार सिनेमाघरों को तोड़कर बन गए माल

Tue, 22 Dec 2015 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा।
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा। Updated Tue, 22 Dec 2015 11:43 PM IST
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Breaking four theaters became goods
बांदा। शहर के चार सिनेमाघरों को धराशाई कर वहां व्यवसायिक ऊंची इमारतें खड़ी कर दी गईं। लाखों रुपये का रोजाना कारोबार हो रहा है लेकिन शासनादेश के तहत इन टाकीज परिसरों में सिनेमाघर अब तक निर्माण नहीं कराए गए। दो टाकीज परिसरों में मॉल (बाजार) तो चालू हो गए लेकिन सिनेमाहाल अगले साल चालू करने की बात कही जा रही है। मनोरंजन कर विभाग भी चुप्पी साधे है।
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हर माह लाखों रुपये के मनोरंजन कर शासन को चपत लग रही है।  बांदा शहर में कई दशकों से चल रही प्रकाश टाकीज और एक ही परिसर में स्थित मयूर, मल्हार और मृदंग टाकीजों को कई साल पहले बंद कर दिया गया। इन सिनेमाघरों से मनोरंजन कर के रूप में प्रदेश सरकार को हर माह लगभग 10-12 लाख रुपये राजस्व मिलता था। इन टाकीजों की इमारत ध्वस्त कर दी गई।
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उनके स्थान पर कई मंजिला व्यवसायिक इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। दोनों ही टाकीजों में मॉल चल रहे हैं। शासन की नीति और आदेश है कि कोई भी किसी भी टाकीज को उसी शर्त में व्यवसायिक रूप में बदला जा सकता है जब उसी परिसर मेें आधुनिक सुविधाओं से लैस सिनेमाघर भी निर्माण कराया जाए। इन टाकीजों के मालिक मनोरंजन कर विभाग के अधिकारियों को मिलाजुलाकर इस शासनादेश की अनदेखी कर रहे हैं। दोनों ही परिसरों में अब तक सिनेमाघर चालू नहीं हो पाईं।
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इस बारे में जिला मनोरंजन कर अधिकारी मुकेश कुमार टाकीज मालिकों के सुर में सुर मिलाते हैं। उनका कहना है कि भूस्वामी की इच्छा पर निर्भर है कि वह कब टाकीज बनवाए। वह कहते हैं कि मॉल चालू होने से पहले टाकीज बनाने का  कोई आदेश नहीं है। उधर, कहा जा रहा है कि अगले वर्ष 2016 तक टाकीजों का निर्माण पूरा हो जाएगा।
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