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लॉकडाउन में सारथी साबित हो रहे बैंक मित्र
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तिंदवारी। सरकार से मिलने वाली आर्थिक मदद और लाभार्थियों के बीच बैंक मित्र महत्वपूर्ण कड़ी बने हैं। लाभार्थियों को बैंक की भागदौड़ से बचाकर उन्हें घर बैठे सरकारी योजना का कैश पहुंचा रहे हैं।
एक ओर जहां लॉकडाउन में लोग घरों में कैद हैं, वहीं बैंक मित्र रोजाना बैंकों से लाभार्थियों के घरों तक चहलकदमी करते नजर आ रहे है। महिलाओं के जन धन खाते में आए पांच सौ रुपये हो या उज्ज्वला योजना का पैसा अथवा मनरेगा मजदूरी। बैंक में इन योजनाओं का पैसा लाभार्थियों को उनके घर पहुंचा रहे हैं। उन्हें साप्ताहिक अवकाश के दिन भी इस काम से छुट्टी नहीं मिलती। कई बैंक मित्र तो अपने जेब से खर्च कर बैंकों के बाहर टेंट लगवाकर सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था करा रहे हैं।
उधर, बैंक मित्रों की भूमिका से बैंकों को काफी सुविधा हो रही है। बैंकों में लाभार्थियों की भीड़ नहीं जुट रही। सोनरही और तेरहीमाफी गांव के बैंक मित्र अभिलाष कुमार गुप्त बताते हैं कि लॉकडाउन में आम दिनों की अपेक्षा चार गुना ज्यादा काम पड़ रहा है।
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अब तक वह लाभार्थियों को डेढ़ हजार से ज्यादा मॉस्क और लंच पैकेट बंटवा चुके हैं। इसी तरह माटा-कल्याणपुर के बैंक मित्र सत्यकांत सिंह का कहना है कि लॉकडाउन की गाइड लाइन का पालने करते हुए वह लाभार्थियों को घरों पर जाकर पैसे का भुगतान कर रहे हैं। लू धूप की मशक्कत से बचकर घर बैठे सरकारी योजनाओं का लाभ पा रहे लाभार्थी खुश हैं।
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एक ओर जहां लॉकडाउन में लोग घरों में कैद हैं, वहीं बैंक मित्र रोजाना बैंकों से लाभार्थियों के घरों तक चहलकदमी करते नजर आ रहे है। महिलाओं के जन धन खाते में आए पांच सौ रुपये हो या उज्ज्वला योजना का पैसा अथवा मनरेगा मजदूरी। बैंक में इन योजनाओं का पैसा लाभार्थियों को उनके घर पहुंचा रहे हैं। उन्हें साप्ताहिक अवकाश के दिन भी इस काम से छुट्टी नहीं मिलती। कई बैंक मित्र तो अपने जेब से खर्च कर बैंकों के बाहर टेंट लगवाकर सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था करा रहे हैं।
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उधर, बैंक मित्रों की भूमिका से बैंकों को काफी सुविधा हो रही है। बैंकों में लाभार्थियों की भीड़ नहीं जुट रही। सोनरही और तेरहीमाफी गांव के बैंक मित्र अभिलाष कुमार गुप्त बताते हैं कि लॉकडाउन में आम दिनों की अपेक्षा चार गुना ज्यादा काम पड़ रहा है।
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अब तक वह लाभार्थियों को डेढ़ हजार से ज्यादा मॉस्क और लंच पैकेट बंटवा चुके हैं। इसी तरह माटा-कल्याणपुर के बैंक मित्र सत्यकांत सिंह का कहना है कि लॉकडाउन की गाइड लाइन का पालने करते हुए वह लाभार्थियों को घरों पर जाकर पैसे का भुगतान कर रहे हैं। लू धूप की मशक्कत से बचकर घर बैठे सरकारी योजनाओं का लाभ पा रहे लाभार्थी खुश हैं।