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भारत बंद में बैंक रहे बंद, 45 करोड़ का व्यवसाय ठप

Wed, 08 Jan 2020 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jan 2020 11:57 PM IST
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Bank closed in Bharat bandh, business worth 45 crores stalled
इलाहाबाद बैंक में प्रदर्शन करते अधिकारी व कर्मचारी। - फोटो : BANDA
बांदा। केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में विभिन्न श्रमिक संगठनों और दलों द्वारा आयोजित भारत बंद का मिलाजुला असर रहा। सबसे ज्यादा प्रभाव बैंक सेवाओं पर पड़ा। लगभग 45 करोड़ रुपये का बैंक व्यवसाय प्रभावित हुआ। लगभग 35 करोड़ रुपये का लेन-देन और करीब 10 करोड़ रुपये के चेकों की क्लीयरिंग शामिल है। बैंक कर्मियों ने प्रदर्शन और सभाएं कीं। अन्य संगठनों ने भी धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन के जरिये केंद्र सरकार का विरोध किया। उधर, आम कारोबार और व्यवसाय बंद से प्रभावित नहीं हुआ।
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बुधवार को भारत बंद के आह्वान पर भारतीय स्टेट बैंक को छोड़कर अधिकांश बैंक बंद रहे। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन की बांदा यूनिट के जिला मंत्री रावेंद्र कुमार शुक्ल ने बताया कि बैंकों के विलय, कारपोरेट घरानों से वसूली में कठोर उपायों की मांग, वेतन पुनरीक्षण, भर्ती आदि मुद्दों पर एआईबीईए, एआईबीओए, बैफी, इंबैफ, इंबोक आदि संगठनों ने संयुक्त रूप से बंद का आह्वान किया था। इसके चलते राष्ट्रीयकृत बैंक, ग्रामीण बैंक और कोआपरेटिव बैंकों की शाखाएं बंद रहीं।
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बैंकों में गेट पर कर्मियों ने प्रदर्शन किए। बाद में सभी बैंकों के कर्मियों ने सिविल लाइन स्थित इलाहाबाद बैंक कार्यालय में संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। यूपीबीयू जिला मंत्री रामेंद्र शुक्ल, अध्यक्ष नितिन श्रीवास्तव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेंद्र कश्यप सहित इंद्रनाथ मित्रा, हरीनारायण तिवारी, अंकुर श्रीवास्तव, अरुण, कृष्ण कुमार, देवीदीन, राजकुमार, राकेश गुप्ता, जितेंद्र सागर, राघवेंद्र त्रिपाठी, आसिफ अली और रिटायरीज यूनियन के अध्यक्ष मुमताज खां व मंत्री राघवेंद्र शुक्ल शामिल रहे।
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जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक (एलडीएम) अभिजीत सिंह ने बताया कि हड़ताल में लगभग 15 बैंकों के कर्मचारी शामिल रहे। इसमें अधिकारी नहीं थे। लगभग 35 करोड़ का लेन-देन और 10 करोड़ रुपये की क्लीरिंग प्रभावित हुई। खाताधारक भी भटकते रहे। उधर, भारत बंद का असर आम जनजीवन पर खास नजर नहीं आया। बाजार और कारोबार चलते रहे। यातायात सेवाओं में भी बाधा नहीं आई।
बीएसएनएल में हड़ताल, कर्मियों का धरना
बांदा। भारत बंद आह्वान में भारत संचार निगम लिमिटेड कर्मचारी संघ (बीएसएनएलईयू) भी शामिल हुई। यहां दूरसंचार जिला प्रबंधक कार्यालय परिसर में हड़ताल के साथ धरना दिया। यूनियन के सचिव सीबी श्रीवास्तव सहित बुद्धसेन पटेल, सूर्यभान सिंह पटेल, सुदामा प्रसाद, रामविशाल चौरसिया आदि शामिल रहे। जिला सचिव सीबी श्रीवास्तव ने बताया कि मुख्य 14 मांगें शामिल हैं। इसमें निजीकरण पर रोक, नियोक्ता के पक्ष में कानून में संशोधन का विरोध, मूलवृद्धि पर नियंत्रण आदि शामिल हैं।
वामपंथी दलों ने भी किया समर्थन
बांदा। वामपंथी दलों ने भी भारत बंद का समर्थन करते हुए भागीदारी की। सीपीआई, सीपीआई माले गुट, निर्माण मजदूर यूनियन, किसान सभा, कताई मिल मजदूर मोर्चा, स्टूडेंट फेडरेशन और लोकतांत्रिक जनता दल ने संयुक्त रूप से भारत बंद का समर्थन करते हुए यहां प्रदर्शन किया और कलक्ट्रेट में राष्ट्रपति को संबोधित 10 सूत्री मांगपत्र सौंपा।

इसमें नागरिक संशोधन कानून और एनआरसी वापस लेने, जेएनयू में की गई हिंसा की न्यायिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई, न्यूनतम मजदूरी 21 हजार करने, फसल की लागत का डेढ़ गुना दाम, किसानों के सभी कर्जे माफ करने आदि मांगें शामिल रहीं। ज्ञापन देने वालों में भाकपा के राज्य काउंसिल सदस्य डा. रामचंद्र सरस, देवीदयाल, अच्छे अली, अनिल चतुर्वेदी, जयकरन प्रजापति, विद्यानंद शुक्ल, नरेंद्र यादव, श्यामसुंदर राजपूत, मदन भाई पटेल, भाकपा माले और कताई मिल मजदूर मोर्चा के रामप्रवेश यादव, लोकतांत्रिक जनता दल के जिलाध्यक्ष हरिमोहन गुप्ता आदि शामिल रहे।

बिजली कर्मियों की सभा को संबोधित करते अवर अभियंता कांता प्रसाद।

बिजली कर्मियों की सभा को संबोधित करते अवर अभियंता कांता प्रसाद।- फोटो : BANDA

कलक्ट्रेट में अधिकारी को ज्ञापन देते भाकपा नेता।

कलक्ट्रेट में अधिकारी को ज्ञापन देते भाकपा नेता।- फोटो : BANDA

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