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Banda News: आधी-अधूरी तैयारियों के साथ कोरोना से निपटने की तैयारी

Thu, 22 Dec 2022 11:19 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Dec 2022 11:19 PM IST
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Banda: Preparation to deal with Corona with half-hearted preparations
मंडलीय चिकित्सालय में कोविड वार्ड में शोपीस बने वेंटीलेटर। - फोटो : BANDA
बांदा। कोरोना को लेकर अलर्ट जारी होने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग भी तैयारियों में जुट गया है। दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से मौतों का आंकड़ा बढ़ा तो शासन का पूरा ध्यान ऑक्सीजन प्लांट पर रहा। वेंटिलेटर की संख्या भी पर्याप्त हो गई। कोरोना के बाद सब कुछ सामान्य स्थिति में आया तो उपकरण धूल फांकने लगे। वो चाहे वेंटिलेटर हों या फिर ऑक्सीजन प्लांट।
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जिम्मेदारों का दावा है कि समय-समय पर ऑक्सीजन प्लांट और वेंटिलेटर की टेस्टिंग होती है। फिलहाल सभी चालू हालत में हैं। हालांकि असलियत कुछ और है। उधर, यह भी दावा किया जा रहा है कि कोरोना से निपटने के बंदोबस्त पूरे हैं। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में 30 बेड आरक्षित हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल के 200 बेड वाले मंडलीय चिकित्सालय में 100 बेड आरक्षित हैं। इनमें 23 बेड वेंटिलेर से लैस हैं। पांच रिजर्व में रखे गए हैं।
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रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में 960 व 660 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) क्षमता के दो ऑक्सीजन प्लांट हैं। अभी तक सिर्फ 960 एलपीएम ऑक्सीजन प्लांट चालू था। 660 एलपीएम प्लांट मामूली खामियों से बंद था। हालांकि अब इसके भी ठीक होने का दावा किया गया है। खपत कम होने से 660 एलपीएम ऑक्सीजन प्लांट सिर्फ टेस्टिंग के लिए चालू किया जाता है।
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इसी तरह यहां कुल 125 वेंटिलेटर हैं। आईसीयू के 15 बेड में लगे वेंटिलेटर तो चालू हैं, लेकिन अन्य बेडों के वेंटिलेटर फिलहाल शोपीस हैं। मरीजों की संख्या कम होने से इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा। ऐसा न हो जरूरत पड़ने पर ये धोखा दे जाएं। प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव का कहना है कि ऑक्सीजन प्लांट और वेंटिलेटर की समय-समय पर टेस्टिंग होती रहती है। फिलहाल सभी चालू हैं। शासन से निर्देश प्राप्त होने पर तैयारी पूरी कर ली गई है।
बंद रहता है 500 एलपीएम ऑक्सीजन प्लांट
जिला अस्पताल में ऑक्सीजन के दो प्लांट हैं। इनमें एक 960 एलपीएम और दूसरा 500 एलपीएम क्षमता का है। 960 एलपीएम प्लांट चालू रहता है, लेकिन जरूरत न होने से 500 एलपीएम ऑक्सीजन प्लांट अब तक बंद रहा। कोविड को लेकर शासन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद गुरुवार को इसकी टेस्टिंग की गई। साथ ही यहां 28 वेंटिलेटर हैं। इनमें 21 वेंटिलेटर आईसीयू में हैं और दो वेंटिलेटर से लैस बेड ट्रॉमा सेंटर हैं।

पांच आरक्षित किए गए हैं, लेकिन जरूरत न पड़ने से अधिकांश वेंटिलेटर शोपीस बने हैं। कमोवेश मेडिकल कॉलेज जैसी स्थिति यहां भी है। जरूरत के समय यह काम कर सकेंगे, इस पर संशय है। सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र ने बताया कि टेक्नीशियन प्रदीप कुमार हर माह वेंटिलेटर की टेस्टिंग करते हैं। फिलहाल सभी चालू हालत में हैं। मंडलीय चिकित्सालय में 100 बेड आरक्षित हैं। इनमें आईसीयू में 21, पीकू (पीडियाट्रिक केयर यूनिट) में 32 और सामान्य वार्ड में 48 बेड हैं। कोविड के दौरान इसे एल-2 अस्पताल बनाया गया था।

मेडिकल कालेज में यूं रख दिए गए वेंटीलेटर।

मेडिकल कालेज में यूं रख दिए गए वेंटीलेटर।- फोटो : BANDA

मंडलीय चिकित्सालय के पास स्थित ऑक्सीजन प्लांट में लटकता ताला।

मंडलीय चिकित्सालय के पास स्थित ऑक्सीजन प्लांट में लटकता ताला।- फोटो : BANDA

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