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बुंदेलखंड में पराली जलाने में 63 फीसदी की कमी
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बांदा। बुंदेलखंड में पराली जलाने की परंपरा में कमी आ रही है। सातों जिलों में इस वर्ष पूर्व की अपेक्षा पराली जलाने में 63 फीसदी की कमी आई है। महोबा, हमीरपुर और जालौन में पराली जलाने की एक भी घटना सामने नहीं आई हैं। बांदा में भी काफी कमी हुई है। यह आंकड़े और दावे कृषि विभाग के हैं।
शुक्रवार को सिमौनी धाम कृषि मेले में तीन दिवसीय एग्रो क्लाइमेटिक जोन मेले में अंतिम दिन उप निदेशक (कृषि) विजय कुमार ने बुंदेलखंड में पराली पर चर्चा की। यहां के किसानों को इस बात के लिए सराहा कि उनमें पराली जलाने को लेकर जागरुकता आई है। उप निदेशक ने बताया कि बांदा जनपद में पिछले साल पराली जलाने की 50 घटनाएं दर्ज हुईं थीं। इस वर्ष सिर्फ 14 स्थानों पर पराली जलाने की सूचना है। निदेशक ने वायु प्रदूषण, पराली, जल संकट, जल संरक्षण, मिट्टी में कम होती उर्वरकता आदि पर भी चर्चा की। कृषि वैज्ञानिक जुगुल किशोर तिवारी ने बताया कि बुंदेलखंड में मुख्य रूप से चार प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। इसमें राकर, कांवर, मार और पड़ुवा शामिल हैं। मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने के उपाय भी बताए।
जोन स्तरीय किसान मेले में झांसी और चित्रकूट मंडल के सभी सात जनपदों के किसानों ने भाग लिया। बांदा से 1200, हमीरपुर व महोबा से 100-100, चित्रकूट से 90, जालौन व ललितपुर से 50-50 और झांसी से 51 किसानों ने मेले में प्रतिभाग किया।
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शुक्रवार को सिमौनी धाम कृषि मेले में तीन दिवसीय एग्रो क्लाइमेटिक जोन मेले में अंतिम दिन उप निदेशक (कृषि) विजय कुमार ने बुंदेलखंड में पराली पर चर्चा की। यहां के किसानों को इस बात के लिए सराहा कि उनमें पराली जलाने को लेकर जागरुकता आई है। उप निदेशक ने बताया कि बांदा जनपद में पिछले साल पराली जलाने की 50 घटनाएं दर्ज हुईं थीं। इस वर्ष सिर्फ 14 स्थानों पर पराली जलाने की सूचना है। निदेशक ने वायु प्रदूषण, पराली, जल संकट, जल संरक्षण, मिट्टी में कम होती उर्वरकता आदि पर भी चर्चा की। कृषि वैज्ञानिक जुगुल किशोर तिवारी ने बताया कि बुंदेलखंड में मुख्य रूप से चार प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। इसमें राकर, कांवर, मार और पड़ुवा शामिल हैं। मिट्टी की उर्वरकता बढ़ाने के उपाय भी बताए।
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जोन स्तरीय किसान मेले में झांसी और चित्रकूट मंडल के सभी सात जनपदों के किसानों ने भाग लिया। बांदा से 1200, हमीरपुर व महोबा से 100-100, चित्रकूट से 90, जालौन व ललितपुर से 50-50 और झांसी से 51 किसानों ने मेले में प्रतिभाग किया।
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