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बाल मुंडवाकर वैन की डिकी में फरार हुई थीं उमा भारती
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बांदा के पूर्व भाजपा विधायक राजकुमार शिवहरे और उमा भारती।
- फोटो : BANDA
बांदा। अयोध्या आंदोलन में बांदा की भूमिका भी अहम रही। इस आंदोलन के शुरुआती दौर में अपनी खास भूमिका निभाने वाली साध्वी उमा भारती कारसेवा में शामिल होने के लिए बेहद नाटकीय ढंग से बांदा से अयोध्या पहुंची थीं। यहां के तत्कालीन बजरंग दल के युवा नेता राजकुमार शिवहरे ने पूरे प्रदेश में चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस की परवाह किए बगैर 31 अक्तूबर 1990 को अपनी मारुति वैन की डिकी में कंबल ओढ़ाकर छिपाते हुए अयोध्या पहुंचाया था। उमा भारती ने पुलिस को चकमा देने के लिए अपने बाल मुंडवा लिए थे।
नब्बे के दशक में मुलायम सिंह सरकार में अयोध्या में कारसेवा का जबरदस्त बिगुल बजा था। पूरे प्रदेश में कारसेवकों की गिरफ्तारी हो रही थीं। इसी दौरान भाजपा की फायर ब्रांड हिंदूवादी नेता उमा भारती सहित मध्य प्रदेश के तमाम भाजपा नेताओं को चित्रकूट में गिरफ्तार कर बांदा शहर लाया गया। यहां पीडब्ल्यूडी बंगले में बनाई गई अस्थायी जेल में रखा गया। 30 अक्तूबर 1990 को कारसेवकों पर गोलियां चलीं। अगले ही दिन यहां बंद उमा भारती ने अयोध्या पहुंचने की रणनीति बनाई। उस समय बांदा में राजकुमार शिवहरे बजरंग दल के नगर अध्यक्ष थे। उमा भारती 31 अक्तूबर की सुबह शहर के महेश्वरी देवी मंदिर पहुंचीं। मंदिर के पास मौजूद कालका नाई से अपने सिर के बाल मुंडवाए।
राजकुमार शिवहरे बताते हैं कि उमा भारती ने उन्हें मंदिर में बुलवाया और अयोध्या तक पहुंचाने को कहा। वह तुरंत राजी हो गए। रात करीब 11 बजे डाक बंगले में शौचालय वाले दरवाजे से उमा भारती को निकालकर अपनी मारुति वैन की डिकी में लिटा दिया। कंबल ओढ़ा दिया। डाक बंगले के बाहर उमा भारती के भाई स्वामी प्रसाद सिंह और तत्कालीन विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह मौजूद थे। उन्हें भी वैन में बैठा लिया । रातों रात तिंदवारी- फतेहपुर होकर सुबह छह बजे फैजाबाद सीमा पर पहुंच गए। वहां कर्फ्यू लागू होने से प्रवेश नहीं मिला। इस पर एक पुलिस अधिकारी से रास्ता पूछकर करीब 50 किलोमीटर कच्चे रास्तों से वैन ले जाकर सुबह 10 बजे अयोध्या पहुंचे। उमा भारती ने वहां मौजूद अशोक सिंघल से मुलाकात की।
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उमा भारती को फरार कराने का खामियाजा उठाना पड़ा था
बांदा। राजकुमार शिवहरे (बाद में भाजपा के टिकट पर बांदा सदर से विधायक भी चुने गए) बताते हैं कि उमा भारती को हिरासत से फरार कराकर अयोध्या पहुंचाने का खमियाजा उन्हें काफी भुगतना पड़ा। बांदा में उनके पिता और भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया। संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। कुर्की का भी आदेश हो गया। बकौल राजकुमार उनमें युवा जोश और राम मंदिर के प्रति जज्बा सिर चढ़कर बोल रहा था। वह कतई भयभीत नहीं हुए। राजकुमार शिवहरे आज भी भाजपा में सक्रिय हैं।
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नब्बे के दशक में मुलायम सिंह सरकार में अयोध्या में कारसेवा का जबरदस्त बिगुल बजा था। पूरे प्रदेश में कारसेवकों की गिरफ्तारी हो रही थीं। इसी दौरान भाजपा की फायर ब्रांड हिंदूवादी नेता उमा भारती सहित मध्य प्रदेश के तमाम भाजपा नेताओं को चित्रकूट में गिरफ्तार कर बांदा शहर लाया गया। यहां पीडब्ल्यूडी बंगले में बनाई गई अस्थायी जेल में रखा गया। 30 अक्तूबर 1990 को कारसेवकों पर गोलियां चलीं। अगले ही दिन यहां बंद उमा भारती ने अयोध्या पहुंचने की रणनीति बनाई। उस समय बांदा में राजकुमार शिवहरे बजरंग दल के नगर अध्यक्ष थे। उमा भारती 31 अक्तूबर की सुबह शहर के महेश्वरी देवी मंदिर पहुंचीं। मंदिर के पास मौजूद कालका नाई से अपने सिर के बाल मुंडवाए।
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राजकुमार शिवहरे बताते हैं कि उमा भारती ने उन्हें मंदिर में बुलवाया और अयोध्या तक पहुंचाने को कहा। वह तुरंत राजी हो गए। रात करीब 11 बजे डाक बंगले में शौचालय वाले दरवाजे से उमा भारती को निकालकर अपनी मारुति वैन की डिकी में लिटा दिया। कंबल ओढ़ा दिया। डाक बंगले के बाहर उमा भारती के भाई स्वामी प्रसाद सिंह और तत्कालीन विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह मौजूद थे। उन्हें भी वैन में बैठा लिया । रातों रात तिंदवारी- फतेहपुर होकर सुबह छह बजे फैजाबाद सीमा पर पहुंच गए। वहां कर्फ्यू लागू होने से प्रवेश नहीं मिला। इस पर एक पुलिस अधिकारी से रास्ता पूछकर करीब 50 किलोमीटर कच्चे रास्तों से वैन ले जाकर सुबह 10 बजे अयोध्या पहुंचे। उमा भारती ने वहां मौजूद अशोक सिंघल से मुलाकात की।
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उमा भारती को फरार कराने का खामियाजा उठाना पड़ा था
बांदा। राजकुमार शिवहरे (बाद में भाजपा के टिकट पर बांदा सदर से विधायक भी चुने गए) बताते हैं कि उमा भारती को हिरासत से फरार कराकर अयोध्या पहुंचाने का खमियाजा उन्हें काफी भुगतना पड़ा। बांदा में उनके पिता और भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया। संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए। कुर्की का भी आदेश हो गया। बकौल राजकुमार उनमें युवा जोश और राम मंदिर के प्रति जज्बा सिर चढ़कर बोल रहा था। वह कतई भयभीत नहीं हुए। राजकुमार शिवहरे आज भी भाजपा में सक्रिय हैं।