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गोशाला में घपले के आरोपियों पर हो सकती है कार्रवाई
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छतैनी में गोशाला के बाहर चर रहीं अन्ना गायें।
- फोटो : BANDA
अतर्रा। नरैनी तहसील के छतैनी गांव की गोशाला में घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं। पशुपालन विभाग की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। किसी भी समय कार्रवाई हो सकती है।
छतैनी गोशाला में 530 अन्ना पशु पंजीकृत रहे हैं। इनके भरण-पोषण के लिए सरकार की ओर से 30 रुपये प्रति पशु की दर से धनराशि दी जाती रही है, जबकि पशुओं को अपना पेट आसपास के जंगल में घूम-फिरकर भरना पड़ता है। बताया जा रहा है कि गोशाला के नाम पर लगभग 35 लाख रुपये हड़पे गए हैं।
पशुपालन विभाग के कर्मचारी रोजाना गोशाला और जंगलों में चरते पशुओं की फोटो निर्धारित वेबसाइट पर डालते रहे हैं। दूसरी तरफ गोशाला संचालक ग्राम पंचायत भूसा आदि के बिल बाउचर लगाकर बजट ठिकाने लगाते रहे। विधायक राजकरन कबीर ने मुख्यमंत्री और मंडलायुक्त को पत्र भेजकर इसकी शिकायत और जांच को लिखा था।
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आरोप है कि एक ही भूसे के ढेर को हर माह नया दिखाकर प्रतिमाह 4.72 लाख रुपये निकाले जाते रहे। उधर, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने कहा है कि अन्ना पशुओं का हक खाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए वे मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे। उन्होंने मंडलायुक्त से अनुरोध किया कि यहां के लिए गठित की जा रही जांच समिति में संबंधित अधिकारियों को शामिल न किया जाए।
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छतैनी गोशाला में 530 अन्ना पशु पंजीकृत रहे हैं। इनके भरण-पोषण के लिए सरकार की ओर से 30 रुपये प्रति पशु की दर से धनराशि दी जाती रही है, जबकि पशुओं को अपना पेट आसपास के जंगल में घूम-फिरकर भरना पड़ता है। बताया जा रहा है कि गोशाला के नाम पर लगभग 35 लाख रुपये हड़पे गए हैं।
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पशुपालन विभाग के कर्मचारी रोजाना गोशाला और जंगलों में चरते पशुओं की फोटो निर्धारित वेबसाइट पर डालते रहे हैं। दूसरी तरफ गोशाला संचालक ग्राम पंचायत भूसा आदि के बिल बाउचर लगाकर बजट ठिकाने लगाते रहे। विधायक राजकरन कबीर ने मुख्यमंत्री और मंडलायुक्त को पत्र भेजकर इसकी शिकायत और जांच को लिखा था।
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आरोप है कि एक ही भूसे के ढेर को हर माह नया दिखाकर प्रतिमाह 4.72 लाख रुपये निकाले जाते रहे। उधर, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने कहा है कि अन्ना पशुओं का हक खाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए वे मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे। उन्होंने मंडलायुक्त से अनुरोध किया कि यहां के लिए गठित की जा रही जांच समिति में संबंधित अधिकारियों को शामिल न किया जाए।