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नौ माह में 90 फीसदी परिवारों को नहीं मिला 100 दिन काम
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बांदा। 118 करोड़ की मनरेगा योजना नौ माह में 100 दिन का काम 90 फीसदी परिवारों को भी नहीं दे पाई। 100 दिन काम पाने वाले मजदूरों का ग्राफ सिर्फ 10 फीसदी है।
मनरेगा योजना का बजट इस वर्ष 118 करोड़ का है। इसमें 70 करोड़ मजदूरी पर खर्च किए जाने हैं। बजट का सर्वाधिक हिस्सा श्रम यानी मजदूरी पर खर्च किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में शासन ने जिले में 34 लाख 95 हजार मानव दिवस सृजित करने के साथ ही 36,500 परिवारों को 100 दिन का रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन बीते 9 माह में मात्र 25 लाख मानव दिवस व 3850 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला है।
सबसे फिसड्डी बिसंडा और महुआ ब्लाक हैं। बिसंडा मे 3813 में 242 और महुआ में 5837 परिवारों में महज 308 परिवारों को ही 100 दिन काम मिला है। बबेरू में 4749 में 619, बड़ोखर में 4514 में 704, जसपुरा में 2490 में 233, कमासिन में 4280 में 502, नरैनी में 6459 में 787, तिंदवारी में 4558 में 455 श्रमिक परिवारों को 100 दिन का काम मिला है।
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उपायुक्त (मनरेगा) राघवेंद्र तिवारी का कहना है कि 100 दिन का रोजगार देने की प्रगति को बढ़ाया जाएगा। खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि श्रमिक यदि रोजगार मांगने नहीं आ रहे तो उनके घर जाकर उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित करें और रोजगार मुहैया कराएं।
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मनरेगा योजना का बजट इस वर्ष 118 करोड़ का है। इसमें 70 करोड़ मजदूरी पर खर्च किए जाने हैं। बजट का सर्वाधिक हिस्सा श्रम यानी मजदूरी पर खर्च किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में शासन ने जिले में 34 लाख 95 हजार मानव दिवस सृजित करने के साथ ही 36,500 परिवारों को 100 दिन का रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन बीते 9 माह में मात्र 25 लाख मानव दिवस व 3850 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला है।
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सबसे फिसड्डी बिसंडा और महुआ ब्लाक हैं। बिसंडा मे 3813 में 242 और महुआ में 5837 परिवारों में महज 308 परिवारों को ही 100 दिन काम मिला है। बबेरू में 4749 में 619, बड़ोखर में 4514 में 704, जसपुरा में 2490 में 233, कमासिन में 4280 में 502, नरैनी में 6459 में 787, तिंदवारी में 4558 में 455 श्रमिक परिवारों को 100 दिन का काम मिला है।
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उपायुक्त (मनरेगा) राघवेंद्र तिवारी का कहना है कि 100 दिन का रोजगार देने की प्रगति को बढ़ाया जाएगा। खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि श्रमिक यदि रोजगार मांगने नहीं आ रहे तो उनके घर जाकर उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित करें और रोजगार मुहैया कराएं।