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सूदखोरों का सितम जारी, प्रशासन की क्या लाचारी ?

Wed, 21 Feb 2018 11:32 PM IST
Updated Wed, 21 Feb 2018 11:32 PM IST
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सूदखोरों का सितम जारी, प्रशासन की क्या लाचारी ?

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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। सूदखोरों का सितम थम नहीं रहा। एक और युवक उनका शिकार हो गया। यहां कहावत है कि न खाता न बही, सूदखोर जो कहें वही सही। मामूली सी रकम लेकर सूदखोरों के जाल में फंसने वाले तमाम निरीह नागरिकों का हश्र यही होता है कि वे जान गंवाएं या घर-द्वार बेचे। खुलेआम मनी लांड्रिंग एक्ट का उल्लंघन हो रहा है। बिना रजिस्ट्रेशन के सूद का कारोबार चल रहा है। जिन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया है वे भी नियमों का पालन नहीं कर रहे। पर प्रशासन खामोश है।

सूदखोरी का मकड़जाल समूचे बुंदेलखंड में फैला है। पूर्व में ही सूदखोरी से तंग आकर यहां कई लोग जान गवां चुके हैं। कुछ वर्षों पूर्व ‘अमर उजाला’ ने सूदखोरों के खिलाफ मुहिम चलाई थी। तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. रजनीश दुबे ने इसमें विशेष दिलचस्पी लेकर सूदखोरों के खिलाफ शिकंजा कसा और दर्जनों सूदखोरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। कई को जेल भिजवा दिया। इस सख्ती से कुछ दिन तो सूदखोर सहमे रहे अब फिर उनके हौसले परवान चढ़े हुए हैं। मंडल मुख्यालय बांदा में मंगलवार को युवा सराफा कारीगर मुकेश सोनी (38) ने सूदखोर से तंग आकर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उधर, इस बाबत अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) गंगाराम गुप्ता ने कहा कि अधिनियम की शर्तों और कानूनों का उल्लंघन करके साहूकारी करने वालों पर प्रशासन सख्ती करेगा।
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सूदखोरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने शहर के छोटी बाजार में सराफ द्वारा सूदखोरी से तंग आकर की गई आत्महत्या के बारे में बताया कि सुसाइड नोट में जिस सूदखोर का जिक्र किया गया है उसके बारे में जांच कराई जा रही है कि पंजीकृत था या नहीं। दूसरी तरफ कोतवाली के वरिष्ठ उप निरीक्षक ताराचंद्र ने बुधवार को शाम बताया कि मृतक सराफ के परिजनों ने फिलहाल कोई तहरीर नहीं दी है। बताया कि तहरीर न मिलने पर सुसाइड नोट के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
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बांदा। उत्तर प्रदेश साहूकार विनियम अधिनियम-2008 की धारा 12 के मुताबिक लाइसेंसधारी साहूकारी कर्ज दे सकते हैं। वह भी निर्धारित शर्तों और नियमों के मुताबिक। साहूकार अपने द्वारा दिए गए कर्ज पर वाणिज्यिक (कामर्शियल) बैंक द्वारा निर्धारित दर से ब्याज ले सकता है। बिना लाइसेंस ब्याज पर कर्ज देना प्रतिबंधित है। इस पर धारा-22 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अधिनियम की धारा-11 में कहा गया है कि गिरवी रखी गई वस्तु को साहूकार अमानत की तरह रखेगा। इकरारनामे में मूलधन का उल्लेख और रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज होना चाहिए। कर्जदार किस्त वापस करे तो एक गवाह के सामने साहूकार इसे लेकर रसीद देगा। बिना रजिस्ट्रेशन के साहूकारी करने या शर्तों का उल्लंघन करने पर छह माह तक की जेल और पांच हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। एक्ट की धारा-23 में प्राविधान है कि कर्जदार का उत्पीड़न किया तो तीन माह की कैद या 500 रुपये जुर्माना अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं।


बांदा। मंडल मुख्यालय में महिलाएं भी साहूकार हैं। पूरे जनपद में लगभग 85 साहूकार पंजीकृत हैं। इनमें 22 महिलाएं हैं। कुछ तो पूरे परिवार का पंजीकरण कराए हैं। कई पंजीकृत साहूकार विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी हैं। बांदा शहर में 63 साहूकार पंजीकृत हैं। इनके अलावा बबेरू में 15, तिंदवारी में चार, अतर्रा में तीन साहूकार पंजीकृत हैं।

-खुलेआम हो रहा मनी लांड्रिंग एक्ट का उल्लंघन
-युवा सराफ ने सूदखोरी से तंग आकर ही दी जान
-पूर्व में मंडलायुक्त ने सूदखोरों पर कसा था शिकंजा
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