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5वीं शताब्दी की पत्थर की मुहर मिली
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 24 Jun 2015 11:48 PM IST
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ऐतिहासिक कालिंजर के बारे में यहां पाए जाने वाले शिलालेखों से समय-समय पर कालिंजर का इतिहास पता चलता रहा है। इसी क्रम में बांदा इंटेक के चैप्टर संयोजक हारिस जमां खां कालिंजर दुर्ग पर लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने दुर्ग के पास पत्थर की एक सील (मुहर) हासिल प्राप्त करने का दावा किया है।
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इंटेक चैप्टर के संयोजक हारिस जमां खां के मुताबिक गौर पत्थर पर अंडाकार आकृति में यह मुहर 5वीं शताब्दी के राजा प्रवर सेन की बताई गई है। वह गुप्त कालीन शासक थे। पत्थर की मुहर में तत्कालीन भाषा में महाराजा श्री प्रवर सेन शाशनम खुदा हुआ है।
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जमां बताते हैं कि उन्हें यह मुहर कालिंजर दुर्ग के दक्षिण भाग में स्थित सुखना नाले में मिली है। राजा प्रवर सेन के शासन में वित्त संबंधी कार्यों में यह मुहर प्रयोग होती थी। उन्होंने दावा किया कि कालिंजर में राजा प्रवर सेन का काफी दिनों तक शासन रहा। उन्होंने कहा कि इस मुहर से कालिंजर के इतिहासकारों को एक नई दिशा मिलेगी।
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