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मेडिकल कालेज में प्रोफेसर समेत 51 पद खाली
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बांदा। फैकल्टी मामले में राजकीय मेडिकल कालेज एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा। वर्ष 2022 में छठवें सत्र में 5वें बैच की मान्यता जरूर हासिल हो गई, पर आचार्य (प्रोफेसर), सह आचार्य (एसोसिएट प्रोफेसर) और सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) के बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं।
इससे एमबीबीएस छात्र-छात्राओं की पढ़ाई के साथ मरीजों के बेहतर उपचार पर असर पड़ रहा है। चिकित्सा शिक्षक/डाक्टर के लगभग 230 स्वीकृत पद हैं। इनमें 51 खाली हैं। चिकित्सा शिक्षक के 16 पद रिक्त हैं। मनोरोग विभाग में कोई डाक्टर नहीं है।
मेडिकल कालेज की शुरूआत वर्ष 2016 में हुई थी। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (अब एनएमसी) द्वारा 100 सीट की मान्यता के बाद आनन-फानन स्थायी और अस्थायी पदों पर भर्ती कर एमबीबीएस कक्षाएं शुरू कर दी गईं। वर्ष 2020-21 में मान्यता न मिलने पर पांचवें सत्र में प्रवेश पिछड़ गया।
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नतीजे में वर्ष 2021-22 में कमियां पूरी होने के बाद पांचवें सत्र की मान्यता हासिल हुई। मौजूदा में यहां 500 एमबीबीएस छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन फैकल्टी की कमी चिकित्सा शिक्षा को प्रभावित कर रही है। कई महत्वपूर्ण पदों पर आचार्य, सह आचार्य और सहायक आचार्य नहीं हैं।
मौजूदा में यहां 179 पद भरे हैं। 51 रिक्त पदों के अलावा जेआर (जूनियर रेजीडेंट), सर्जरी, चेस्ट, स्त्री, नेत्र और हड्डी रोग विभाग में सभी पद भरे हैं। प्रधानाचार्य डा.मुकेश कुमार यादव ने बताया कि शासन को पत्र भेजकर रिक्त पदों पर नियुक्ति का अनुरोध किया गया है। इसके लिए कई बार पत्र भेजा गया। मंजूरी मिलते ही संविदा पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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इससे एमबीबीएस छात्र-छात्राओं की पढ़ाई के साथ मरीजों के बेहतर उपचार पर असर पड़ रहा है। चिकित्सा शिक्षक/डाक्टर के लगभग 230 स्वीकृत पद हैं। इनमें 51 खाली हैं। चिकित्सा शिक्षक के 16 पद रिक्त हैं। मनोरोग विभाग में कोई डाक्टर नहीं है।
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मेडिकल कालेज की शुरूआत वर्ष 2016 में हुई थी। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (अब एनएमसी) द्वारा 100 सीट की मान्यता के बाद आनन-फानन स्थायी और अस्थायी पदों पर भर्ती कर एमबीबीएस कक्षाएं शुरू कर दी गईं। वर्ष 2020-21 में मान्यता न मिलने पर पांचवें सत्र में प्रवेश पिछड़ गया।
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नतीजे में वर्ष 2021-22 में कमियां पूरी होने के बाद पांचवें सत्र की मान्यता हासिल हुई। मौजूदा में यहां 500 एमबीबीएस छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन फैकल्टी की कमी चिकित्सा शिक्षा को प्रभावित कर रही है। कई महत्वपूर्ण पदों पर आचार्य, सह आचार्य और सहायक आचार्य नहीं हैं।
मौजूदा में यहां 179 पद भरे हैं। 51 रिक्त पदों के अलावा जेआर (जूनियर रेजीडेंट), सर्जरी, चेस्ट, स्त्री, नेत्र और हड्डी रोग विभाग में सभी पद भरे हैं। प्रधानाचार्य डा.मुकेश कुमार यादव ने बताया कि शासन को पत्र भेजकर रिक्त पदों पर नियुक्ति का अनुरोध किया गया है। इसके लिए कई बार पत्र भेजा गया। मंजूरी मिलते ही संविदा पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी।