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तहबाजारी ठेकेदारों ने की 21 लाख की अनियमितता
Updated Thu, 15 Jun 2017 11:55 PM IST
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बांदा। जिला पंचायत की खनिज तहबाजारी व दुकानों के आवंटन में ठेकेदारों द्वारा करीब 21 लाख रुपये जमा करने में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। ठेकेदारों ने वसूली के बाद कई-कई दिन बाद पैसा रोक कर सरकारी कोष में जमा किया। जिला पंचायत वित्तीय परामर्शदाता व वित्त एवं लेखाधिकारी ने अधिनियम का हवाला देकर इसे अस्थाई गबन बताते हुए मंडलायुक्त से इसकी शिकायत की है। डीएम ने इसे गंभीर मानते हुए सीडीओ से जांच के बाद पत्रावली तलब की हैं।
वित्त एवं लेखाधिकारी वीके तिवारी ने अपने पत्र में कहा है कि मुख्य विकास अधिकारी के आदेश पर उन्होंने तहबाजारी से संबंधित पत्रवलियों का अवलोकन किया है। इससे स्पष्ट है कि पहली से 18 मई तक विभागीय वसूली गई तहबाजारी विलंब से जमा की गई। पहली से 11 मई तक 11.20 लाख रुपये वसूले गए।
यह धनराशि 12 मई को जमा हुई। 12 से 15 मई तक 5.35 लाख वसूले गए यह धनराशि 15 को जमा हुई। 15 से 18 मई तक 4.62 लाख वसूले गए। यह पैसा 18 मई को जमा किया गया। इसके अलावा विभागीय वसूली की रसीदों का लेखा-जोखा नहीं उपलब्ध कराया गया। न ही रसीदों की प्रविष्टि स्टाक रजिस्टर में पाई गई। इस संबंध में सीडीओ को 30 मई को अवगत कराया था।
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उधर, बबेरू की जिला पंचायत की दुकानों के आवंटन में जमा कराई गई प्रीमियम एवं जमानत धनराशि की वापसी के लिए पत्रावली प्राप्त होने पर स्पष्ट हुआ है कि 8.50 लाख रुपये नीलामी तिथि व स्वीकृत के दो माह तक जिला निधि में जमा नहीं की गई। 30 दिसंबर 2016 को चुन्ना प्रसाद के नाम प्रीमियम की 1.52 लाख रुपये की रसीद (प्रपत्र-5, रसीद संख्या 216780) काटी गई।
यह धनराशि जिला निधि में 21 मार्च को जमा की गई। जबकि इसे तत्काल जमा करने का प्राविधान है। लेखाधिकारी ने लिखा है कि जिला निधि में समय-समय पर धनराशि जमा न किया जाना अस्थाई रूप से गबन है। उधर, जिलाधिकारी डॉ.सरोज कुमार ने वित्त एवं लेखाधिकारी के पत्र का हवाला देते हुए सीडीओ से इस मामले में जांच करने और संबंधित पत्रावलियां पेश करने को कहा है।
-वसूली के बाद कई-कई दिन नहीं जमा किया पैसा
-लेखाधिकारी ने सीडीओ से की शिकायत
-डीएम ने जांच के बाद फाइल तलब की
अमर उजाला ब्यूरो
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वित्त एवं लेखाधिकारी वीके तिवारी ने अपने पत्र में कहा है कि मुख्य विकास अधिकारी के आदेश पर उन्होंने तहबाजारी से संबंधित पत्रवलियों का अवलोकन किया है। इससे स्पष्ट है कि पहली से 18 मई तक विभागीय वसूली गई तहबाजारी विलंब से जमा की गई। पहली से 11 मई तक 11.20 लाख रुपये वसूले गए।
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यह धनराशि 12 मई को जमा हुई। 12 से 15 मई तक 5.35 लाख वसूले गए यह धनराशि 15 को जमा हुई। 15 से 18 मई तक 4.62 लाख वसूले गए। यह पैसा 18 मई को जमा किया गया। इसके अलावा विभागीय वसूली की रसीदों का लेखा-जोखा नहीं उपलब्ध कराया गया। न ही रसीदों की प्रविष्टि स्टाक रजिस्टर में पाई गई। इस संबंध में सीडीओ को 30 मई को अवगत कराया था।
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उधर, बबेरू की जिला पंचायत की दुकानों के आवंटन में जमा कराई गई प्रीमियम एवं जमानत धनराशि की वापसी के लिए पत्रावली प्राप्त होने पर स्पष्ट हुआ है कि 8.50 लाख रुपये नीलामी तिथि व स्वीकृत के दो माह तक जिला निधि में जमा नहीं की गई। 30 दिसंबर 2016 को चुन्ना प्रसाद के नाम प्रीमियम की 1.52 लाख रुपये की रसीद (प्रपत्र-5, रसीद संख्या 216780) काटी गई।
यह धनराशि जिला निधि में 21 मार्च को जमा की गई। जबकि इसे तत्काल जमा करने का प्राविधान है। लेखाधिकारी ने लिखा है कि जिला निधि में समय-समय पर धनराशि जमा न किया जाना अस्थाई रूप से गबन है। उधर, जिलाधिकारी डॉ.सरोज कुमार ने वित्त एवं लेखाधिकारी के पत्र का हवाला देते हुए सीडीओ से इस मामले में जांच करने और संबंधित पत्रावलियां पेश करने को कहा है।
-वसूली के बाद कई-कई दिन नहीं जमा किया पैसा
-लेखाधिकारी ने सीडीओ से की शिकायत
-डीएम ने जांच के बाद फाइल तलब की
अमर उजाला ब्यूरो