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श्रमदान से कर रहे कुएं का जीर्णोद्धार
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बांदा। कुआं तालाब जियाओ अभियान अब गांवों में भी परवान चढ़ रहा है। जिलाधिकारी हीरा लाल द्वारा आए दिन इसे लेकर गांव-गांव में दी जा रही प्रेरणा का असर तहसील के बरुआ स्योढ़ा गांव तक पहुंच गया है। यहां के ग्राम प्रधान ने ग्रामीणों के साथ पुराने कुएं की सफाई के लिए श्रमदान शुरू कर दिया है।
लगभग साढ़े तीन हजार आबादी वाले गांव में सात कुएं हैं। इनमें मात्र रामचंद्रन कुआं में ही पानी बचा है। गांव के सात हैंडपंपों में तीन रिबोर होने को हैं। ग्राम प्रधान परमानंद गोस्वामी और सचिव शैलेंद्र कुमार ने बताया कि कुआं-तालाब जियाओ अभियान के तहत इस कुएं के जीर्णोद्धार का एस्टीमेट तैयार कर लिया गया है। प्रधान ने बताया कि गांव का हरेक व्यक्ति को कम से कम दो पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
उधर, गांव में बनी 12 वर्ष पुरानी पानी की टंकी से आज तक ग्रामीणों को पानी नहीं मिला। जल निगम ने वर्ष 2007 में 92 लाख रुपये की लागत से इसे बनवाया था। बरुआ स्योढ़ा सहित बांस पोखरी और देविन नगर को पानी आपूर्ति होनी थी। पाइप लाइन भी डाल दी गई। लेकिन आपूर्ति नहीं शुरू हुई।
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लगभग साढ़े तीन हजार आबादी वाले गांव में सात कुएं हैं। इनमें मात्र रामचंद्रन कुआं में ही पानी बचा है। गांव के सात हैंडपंपों में तीन रिबोर होने को हैं। ग्राम प्रधान परमानंद गोस्वामी और सचिव शैलेंद्र कुमार ने बताया कि कुआं-तालाब जियाओ अभियान के तहत इस कुएं के जीर्णोद्धार का एस्टीमेट तैयार कर लिया गया है। प्रधान ने बताया कि गांव का हरेक व्यक्ति को कम से कम दो पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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उधर, गांव में बनी 12 वर्ष पुरानी पानी की टंकी से आज तक ग्रामीणों को पानी नहीं मिला। जल निगम ने वर्ष 2007 में 92 लाख रुपये की लागत से इसे बनवाया था। बरुआ स्योढ़ा सहित बांस पोखरी और देविन नगर को पानी आपूर्ति होनी थी। पाइप लाइन भी डाल दी गई। लेकिन आपूर्ति नहीं शुरू हुई।
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