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48 घंटे में बरसा 106 मिलीमीटर पानी
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106 mm of rain in 48 hours
- फोटो : BANDA
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बांदा। मौसम विभाग की यलो अलर्ट की चेतावनी सही निकली। लगभग 48 घंटों से रुक-रुककर हो रही कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश ने उमस और गर्मी तो काफूर कर दी, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ा दी। खेत जलमग्न होने से धान को छोड़कर अन्य किस्मों की फसलों के खराब होने के आसार बढ़ गए। दो दिनों में करीब 106 मिलीमीटर (एमएम) बारिश दर्ज की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई माह में अब तक औसत से 50 एमएम बारिश ज्यादा हो गई। जुलाई माह खत्म होने में अभी दो दिन शेष हैं। सोमवार की शाम से शुरू हुई बारिश का सिलसिला बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। मंगलवार को 46 एमएम और बृहस्पतिवार को 60 एमएम (कुल 106 मिलीमीटर) बारिश रिकार्ड की गई। सर्द हवाएं चलने से लोगों को ठंड का भी अहसास रहा। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री से लुढ़क कर 29 डिग्री सेल्सियस पर टिका रहा। उधर, बांदा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ/मौसम जानकार डा. दिनेश साहा ने बताया कि तीन साल बाद जुलाई माह में औसत से ज्यादा बारिश रिकार्ड हुई। अब तक लगभग 310 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
पिछले वर्ष 262 एमएम बारिश हुई थी। यहां जुलाई माह में 230 से 260 एमएम बारिश का औसत है। उन्होंने यह भी बताया कि लगातार हो रही बारिश से धान के अलावा दलहन और तिलहन की फसल को नुकसान होगा। खेत जलमग्न होने से मूंग, उर्द, तिल, ज्वार व बाजरा आदि फसलों के खराब (गलने) होने का खतरा पैदा हो गया है। जिनमें बुआई नहीं हो पाई, उनमें बुआई के लिए किसानों को खेत सूखने का इंतजार करना होगा। ऐसे में बुआई पिछड़ेगी और फसल कमजोर होगी। जुलाई माह तक खरीफ फसल की बुआई हो जाना चाहिए।
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जलभराव से सड़कें गड्ढों में तब्दील
बांदा। दो दिनों से हो रही लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित रहा। जगह-जगह जलभराव की नौबत रही। शहर की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गईं। हाईवे में डामरीकरण बहने से गिट्टियां उखड़ गईं। गड्ढों के चलते राहगीरों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। उधर, अलीगंज, लोहिया पुल, सर्वोदय नगर, शंभू नगर, खुटला, कालूकुआं, निम्नीपार, कटरा, नोनिया मोहाल आदि निचले इलाकों में बारिश और नाले-नालियों का गंदा पानी घरों में घुस गया। (संवाद)
जलभराव से धराशाई हो गए कच्चे घर
अतर्रा/बबेरू/नरैनी। अतर्रा के चूड़ी गली, तेल गली, सुनार गली, दामूगंज, बजरंग नगर, सुलक थोक, सिविल लाइन, ब्रह्मनगर, आजाद नगर आदि मोहल्ले में नाला-नालियों की सफाई न होने से गंदा पानी लोगों के घरों और दुकानों में घुस गया। बबेरू में जल निकासी न होने पर जलभराव से कच्चे मकान धराशाई हो गए। सड़कों व गलियों में पानी भर गया।
नरैनी में दो दिन से हो रही बारिश से जगह-जगह जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। कमासिन में बारिश से दादौं रोड, ओरन रोड व बारी रोड में जलभराव से गंदा पानी लोगों के घरों में घुस गया। जानकारी मिलने पर प्रधान रागिनी ने जेसीबी मशीन से नाली खुदवाकर जलनिकासी की व्यवस्था कराई। ओरन तिराहे पर रात को पेड़ गिरने से देर तक आवागमन अवरुद्ध रहा। (संवाद)
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आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई माह में अब तक औसत से 50 एमएम बारिश ज्यादा हो गई। जुलाई माह खत्म होने में अभी दो दिन शेष हैं। सोमवार की शाम से शुरू हुई बारिश का सिलसिला बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। मंगलवार को 46 एमएम और बृहस्पतिवार को 60 एमएम (कुल 106 मिलीमीटर) बारिश रिकार्ड की गई। सर्द हवाएं चलने से लोगों को ठंड का भी अहसास रहा। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री से लुढ़क कर 29 डिग्री सेल्सियस पर टिका रहा। उधर, बांदा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ/मौसम जानकार डा. दिनेश साहा ने बताया कि तीन साल बाद जुलाई माह में औसत से ज्यादा बारिश रिकार्ड हुई। अब तक लगभग 310 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
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पिछले वर्ष 262 एमएम बारिश हुई थी। यहां जुलाई माह में 230 से 260 एमएम बारिश का औसत है। उन्होंने यह भी बताया कि लगातार हो रही बारिश से धान के अलावा दलहन और तिलहन की फसल को नुकसान होगा। खेत जलमग्न होने से मूंग, उर्द, तिल, ज्वार व बाजरा आदि फसलों के खराब (गलने) होने का खतरा पैदा हो गया है। जिनमें बुआई नहीं हो पाई, उनमें बुआई के लिए किसानों को खेत सूखने का इंतजार करना होगा। ऐसे में बुआई पिछड़ेगी और फसल कमजोर होगी। जुलाई माह तक खरीफ फसल की बुआई हो जाना चाहिए।
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जलभराव से सड़कें गड्ढों में तब्दील
बांदा। दो दिनों से हो रही लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित रहा। जगह-जगह जलभराव की नौबत रही। शहर की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गईं। हाईवे में डामरीकरण बहने से गिट्टियां उखड़ गईं। गड्ढों के चलते राहगीरों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। उधर, अलीगंज, लोहिया पुल, सर्वोदय नगर, शंभू नगर, खुटला, कालूकुआं, निम्नीपार, कटरा, नोनिया मोहाल आदि निचले इलाकों में बारिश और नाले-नालियों का गंदा पानी घरों में घुस गया। (संवाद)
जलभराव से धराशाई हो गए कच्चे घर
अतर्रा/बबेरू/नरैनी। अतर्रा के चूड़ी गली, तेल गली, सुनार गली, दामूगंज, बजरंग नगर, सुलक थोक, सिविल लाइन, ब्रह्मनगर, आजाद नगर आदि मोहल्ले में नाला-नालियों की सफाई न होने से गंदा पानी लोगों के घरों और दुकानों में घुस गया। बबेरू में जल निकासी न होने पर जलभराव से कच्चे मकान धराशाई हो गए। सड़कों व गलियों में पानी भर गया।
नरैनी में दो दिन से हो रही बारिश से जगह-जगह जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। कमासिन में बारिश से दादौं रोड, ओरन रोड व बारी रोड में जलभराव से गंदा पानी लोगों के घरों में घुस गया। जानकारी मिलने पर प्रधान रागिनी ने जेसीबी मशीन से नाली खुदवाकर जलनिकासी की व्यवस्था कराई। ओरन तिराहे पर रात को पेड़ गिरने से देर तक आवागमन अवरुद्ध रहा। (संवाद)