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गांव पर 10 फीसदी राशि भी खर्च नहीं कर रहे ठेकेदार
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अछरौड़ में केन नदी में बालू खनन करतीं मशीनें।
- फोटो : BANDA
बांदा। गांव की तरक्की के सब्जबाग दिखाकर बालू खदान ठेका लेने वाले अब वादाखिलाफी कर रहे हैं। खनिज और पर्यावरण विभाग दोनों ही चुप्पी साधे हैं। बालू भरे ट्रक गांव की गलियां ध्वस्त कर रहे हैं। ग्राम पंचायत की संपत्ति को पहुंच रहे नुकसान से लेखपाल ने भी आगाह कराते हुए एसडीएम को रिपोर्ट दी है।
मामला मंडल मुख्यालय की सीमा के नजदीक सदर तहसील के अछरौड़ गांव की खदान का है। यहां खंड संख्या-दो का पट्टा मुरैना की एक फर्म को मिला है। पट्टे से पहले 26 जुलाई 2019 को पर्यावरण विभाग ने गांव के नजदीक आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों को खुली बैठक में बताया था कि खदान की कुल लागत 14 करोड़ 22 लाख 40 हजार रुपये है। इसका 10 प्रतिशत अंश/पैसा ग्राम विकास कार्य (शौचालय, हैंडपंप, साइकिल वितरण, सोलर लाइट, स्कूल की मरम्मत व रखरखाव आदि) में लगाया जाएगा।
खुली बैठक में यह भरोसा लिखित रूप से दिलाया गया था। लोक सुनवाई में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहायक वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. माधवी कमलवंशी और एडीएम (वित्त एवं राजस्व) संतोष बहादुर सिंह के हस्ताक्षर हैं। लोक सुनवाई में तत्कालीन खान निरीक्षक राजेश कुमार और मेसर्स इनवायरमेंटल रिसर्च एंड एनालिसिस, लखनऊ की परामर्शी अपूर्वा सिंह भी उपस्थित थीं। गांव के रवि त्रिपाठी आदि बताते हैं कि कई माह बीत जाने के बाद भी खदान संचालकों ने गांव के लिए धेलाभर काम नहीं किया। उल्टा नुकसान पहुंच रहा है।
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लोक सुनवाई में ग्राम विकास के इस मद पर धनराशि प्रस्तावित है
शौचालय 6,00,000
हैंडपंप 1,94,800
साइकिल वितरण 3,50,000
गांव में सोलर लाइट 6,30,000
प्राइमरी पाठशाला की मरम्मत व रखरखाव 10,70,000
योग 28,44,800
लेखपाल ने एसडीएम को भेजी रिपोर्ट
बांदा। अछरौड़ खदान (पट्टा संख्या-दो) को लेकर यहां के लेखपाल रामसिंह ने हाल ही में एसडीएम बांदा को दी अपनी जांच रिपोर्ट में अवगत कराया है कि उजरेहटा गांव से बालू ट्रक निकाले जा रहे हैं। इससे पक्के खड़ंजे को क्षति पहुंच रही है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय के पीछे रास्ता बना लिया है। रिपोर्ट में कहा है कि ग्राम पंचायत संपत्ति को क्षति पहुंचाने और उसका दुरुपयोग करने पर पट्टाधारक के विरुद्ध राजस्व संहिता की धारा-67 (1) की कार्रवाई की गई है।
खनिज अधिकारी ने नियंत्रण बोर्ड पर फोड़ा ठीकरा
बांदा। जिला खनिज अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि पट्टेधारक द्वारा जमा की गई राशि की 10 फीसदी रकम से ग्राम पंचायत का विकास कराने की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/पर्यावरण विभाग की है। खनिज विभाग इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।
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मामला मंडल मुख्यालय की सीमा के नजदीक सदर तहसील के अछरौड़ गांव की खदान का है। यहां खंड संख्या-दो का पट्टा मुरैना की एक फर्म को मिला है। पट्टे से पहले 26 जुलाई 2019 को पर्यावरण विभाग ने गांव के नजदीक आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों को खुली बैठक में बताया था कि खदान की कुल लागत 14 करोड़ 22 लाख 40 हजार रुपये है। इसका 10 प्रतिशत अंश/पैसा ग्राम विकास कार्य (शौचालय, हैंडपंप, साइकिल वितरण, सोलर लाइट, स्कूल की मरम्मत व रखरखाव आदि) में लगाया जाएगा।
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खुली बैठक में यह भरोसा लिखित रूप से दिलाया गया था। लोक सुनवाई में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहायक वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. माधवी कमलवंशी और एडीएम (वित्त एवं राजस्व) संतोष बहादुर सिंह के हस्ताक्षर हैं। लोक सुनवाई में तत्कालीन खान निरीक्षक राजेश कुमार और मेसर्स इनवायरमेंटल रिसर्च एंड एनालिसिस, लखनऊ की परामर्शी अपूर्वा सिंह भी उपस्थित थीं। गांव के रवि त्रिपाठी आदि बताते हैं कि कई माह बीत जाने के बाद भी खदान संचालकों ने गांव के लिए धेलाभर काम नहीं किया। उल्टा नुकसान पहुंच रहा है।
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लोक सुनवाई में ग्राम विकास के इस मद पर धनराशि प्रस्तावित है
शौचालय 6,00,000
हैंडपंप 1,94,800
साइकिल वितरण 3,50,000
गांव में सोलर लाइट 6,30,000
प्राइमरी पाठशाला की मरम्मत व रखरखाव 10,70,000
योग 28,44,800
लेखपाल ने एसडीएम को भेजी रिपोर्ट
बांदा। अछरौड़ खदान (पट्टा संख्या-दो) को लेकर यहां के लेखपाल रामसिंह ने हाल ही में एसडीएम बांदा को दी अपनी जांच रिपोर्ट में अवगत कराया है कि उजरेहटा गांव से बालू ट्रक निकाले जा रहे हैं। इससे पक्के खड़ंजे को क्षति पहुंच रही है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय के पीछे रास्ता बना लिया है। रिपोर्ट में कहा है कि ग्राम पंचायत संपत्ति को क्षति पहुंचाने और उसका दुरुपयोग करने पर पट्टाधारक के विरुद्ध राजस्व संहिता की धारा-67 (1) की कार्रवाई की गई है।
खनिज अधिकारी ने नियंत्रण बोर्ड पर फोड़ा ठीकरा
बांदा। जिला खनिज अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि पट्टेधारक द्वारा जमा की गई राशि की 10 फीसदी रकम से ग्राम पंचायत का विकास कराने की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/पर्यावरण विभाग की है। खनिज विभाग इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।