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Balrampur News: तारकोल महंगा होने से 200 से ज्यादा सड़कों का काम ठप
Fri, 17 Apr 2026 11:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 17 Apr 2026 11:16 PM IST
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फोटो-23-बलरामपुर के बालापुर जरवा मार्ग पर अधूरा पड़ा काम ।-संवाद
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बलरामपुर। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब जिले के विकास कार्यों पर नजर आने लगा है। डामर (तारकोल) की कमी और उसकी कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के कारण जिले में करीब 200 से अधिक सड़कों निर्माण ठप हो गया है। इससे न सिर्फ विकास की रफ्तार थम गई है, बल्कि आम लोगों को भी रोजाना आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़क निर्माण में डामर सबसे महत्वपूर्ण सामग्री होती है। वर्तमान हालात में आपूर्ति प्रभावित होने के चलते जिले में डामर की कमी हो गई है। वहीं, कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिला है। पहले डामर करीब 40 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन मिलता था, जो अब बढ़कर 76 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। लागत में अचानक आई इस बढ़ोतरी से ठेकेदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में उन्होंने घाटे से बचने के लिए निर्माण कार्य रोक दिए हैं। जिले के कांदभारी-पिपराडीह संपर्क मार्ग, छतरपुरवा संपर्क मार्ग, महेशभारी-रामपुर बनघुसरा संपर्क मार्ग समेत कई प्रमुख सड़कों का काम पूरी तरह से बंद पड़ा है। अधूरे पड़े निर्माण कार्यों के चलते सड़कों की हालत बदतर होती जा रही है। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी सड़कें लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात और भी खराब हैं, जहां लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
लागत बढ़ी तो ठेकेदार पीछे हटे
लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार संघ के अध्यक्ष अमर सिंह, पंकज सिंधी, अनन्य गौरव मिश्रा और अनिल मिश्रा ने बताया कि डामर की कमी और कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण काम कराना संभव नहीं रह गया है। मौजूदा दरों पर काम करने से भारी नुकसान उठाना पड़ेगा, इसलिए काम रोकना मजबूरी बन गया है। कहा कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। ठेकेदारों ने विभाग से मांग की है कि सड़कों की लागत में बढ़ोतरी की जाए या फिर नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया कराई जाए। उनका कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की तर्ज पर नए रेट के हिसाब से भुगतान किया जाए, तभी काम दोबारा शुरू हो सकता है।
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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि विभाग के पास जितना डामर उपलब्ध है, उसी के आधार पर कम लंबाई और अत्यंत आवश्यक सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। शासन स्तर से अभी तक इस संबंध में कोई नया आदेश नहीं मिला है और पुराने टेंडर के अनुसार ही कार्य कराया जा रहा है।
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सड़क निर्माण में डामर सबसे महत्वपूर्ण सामग्री होती है। वर्तमान हालात में आपूर्ति प्रभावित होने के चलते जिले में डामर की कमी हो गई है। वहीं, कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिला है। पहले डामर करीब 40 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन मिलता था, जो अब बढ़कर 76 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। लागत में अचानक आई इस बढ़ोतरी से ठेकेदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में उन्होंने घाटे से बचने के लिए निर्माण कार्य रोक दिए हैं। जिले के कांदभारी-पिपराडीह संपर्क मार्ग, छतरपुरवा संपर्क मार्ग, महेशभारी-रामपुर बनघुसरा संपर्क मार्ग समेत कई प्रमुख सड़कों का काम पूरी तरह से बंद पड़ा है। अधूरे पड़े निर्माण कार्यों के चलते सड़कों की हालत बदतर होती जा रही है। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी सड़कें लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात और भी खराब हैं, जहां लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
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लागत बढ़ी तो ठेकेदार पीछे हटे
लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार संघ के अध्यक्ष अमर सिंह, पंकज सिंधी, अनन्य गौरव मिश्रा और अनिल मिश्रा ने बताया कि डामर की कमी और कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण काम कराना संभव नहीं रह गया है। मौजूदा दरों पर काम करने से भारी नुकसान उठाना पड़ेगा, इसलिए काम रोकना मजबूरी बन गया है। कहा कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। ठेकेदारों ने विभाग से मांग की है कि सड़कों की लागत में बढ़ोतरी की जाए या फिर नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया कराई जाए। उनका कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की तर्ज पर नए रेट के हिसाब से भुगतान किया जाए, तभी काम दोबारा शुरू हो सकता है।
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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि विभाग के पास जितना डामर उपलब्ध है, उसी के आधार पर कम लंबाई और अत्यंत आवश्यक सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। शासन स्तर से अभी तक इस संबंध में कोई नया आदेश नहीं मिला है और पुराने टेंडर के अनुसार ही कार्य कराया जा रहा है।