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Balrampur News: जमीन भी चली गई, मुआवजा भी न मिला
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बलरामपुर। बलरामपुर-भड़रिया तटबंध के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का मुआवजा डेढ़ दशक बाद भी किसानों को नहीं मिल सका है। मुआवजे के लिए किसान अधिकारियों का चक्कर लगा रहे हैं। तहसील दिवस से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक पर शिकायत के बावजूद कहीं सुनवाई नहीं होे रही है।
राप्ती नदी की बाढ़ से तटवर्ती गांवों को बचाने के लिए करीब 15 साल पहले ड्रेनेज खंड बलरामपुर द्वारा बलरामपुर-भड़रिया तटबंध का निर्माण कराया गया था। इसके लिए क्षेत्र के ऐलनपुर, किलौली, लालनगर, विरदा, महुआधनी व बाघाजोत सहित तमाम गांवों की जमीन अधिग्रहीत की गई थी।
अधिकांश किसानों को जमीन अधिग्रहण का पैसा उसी समय दे दिया गया मगर कुछ किसान इससे वंचित रह गए। तत्कालीन अधिकारियों ने बजट मिलने पर भुगतान का भरोसा दिलाया था लेकिन अभी तक उन्हें मुुआवजा नहीं मिल सका है। जिन किसानों को मुआवजा नहीं मिला, वो आज भी संपूर्ण समाधान दिवस से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक पर शिकायत कर रहे हैं।
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विभागीय अधिकारियों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुआवजा दिलाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन उनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। इतना ही नहीं किसानों की बची हुई जमीन भी इस बार आई बाढ़ में राप्ती नदी की कटान में समा गई। अब किसानों के समक्ष रोजी-रोटी चलाना भी मुश्किल हो गया है।
ऐलनपुर निवासी इलियास ने बताया कि तटबंध निर्माण के लिए उनकी तीन बीघे जमीन ली गई थी लेकिन अभी तक मुआवजा नहीं मिला। वह अधिकारियों से मुआवजा मांगते-मांगते थक गए हैं। लालनगर निवासी जग्गू ने बताया कि चार बीघा जमीन अधिग्रहीत की गई थी। अधिकारियों ने बजट मिलने पर मुआवजा देने का भरोसा दिलाया था लेकिन अभी तक पैसा नहीं मिला। परिवार चलाने के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है।
बाघाजोत के रहने वाले हीरालाल गौतम ने बताया कि दर्जनों बार प्रार्थनापत्र देने पर भी मुआवजा नहीं मिला। हरिराम ने बताया कि वह ड्रेनेज खंड के अधिकारियों से लगातार मुआवजे की मांग करते रहे मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
इसी तरह राम अवतार, बकरीदी, अंसार अहमद, शादाब अहमद, विनोद, दिनेश, रामप्रसाद, रमेश, गुलबीबी, ताज मोहम्मद, छोटकन, रूपकला, लीलावती, ऊषा, बरसाती, मेवालाल, बजरंगी, हीरालाल, खुरशेद व संदीप आदि को भी मुआवजे का इंतजार है।
एडीएम प्रदीप कुमार का कहना है कि मुआवजे की धनराशि को लेकर विभाग और किसानों में सहमति नहीं बन पाने के कारण कुछ किसानों को मुआवजे का भुगतान नहीं हो पाया था। अब किसानों ने अपनी सहमति दे दी है। जल्द ही सभी किसानों को तटबंध निर्माण के लिए अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा मिल जाएगा।
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राप्ती नदी की बाढ़ से तटवर्ती गांवों को बचाने के लिए करीब 15 साल पहले ड्रेनेज खंड बलरामपुर द्वारा बलरामपुर-भड़रिया तटबंध का निर्माण कराया गया था। इसके लिए क्षेत्र के ऐलनपुर, किलौली, लालनगर, विरदा, महुआधनी व बाघाजोत सहित तमाम गांवों की जमीन अधिग्रहीत की गई थी।
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अधिकांश किसानों को जमीन अधिग्रहण का पैसा उसी समय दे दिया गया मगर कुछ किसान इससे वंचित रह गए। तत्कालीन अधिकारियों ने बजट मिलने पर भुगतान का भरोसा दिलाया था लेकिन अभी तक उन्हें मुुआवजा नहीं मिल सका है। जिन किसानों को मुआवजा नहीं मिला, वो आज भी संपूर्ण समाधान दिवस से लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल तक पर शिकायत कर रहे हैं।
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विभागीय अधिकारियों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुआवजा दिलाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन उनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। इतना ही नहीं किसानों की बची हुई जमीन भी इस बार आई बाढ़ में राप्ती नदी की कटान में समा गई। अब किसानों के समक्ष रोजी-रोटी चलाना भी मुश्किल हो गया है।
ऐलनपुर निवासी इलियास ने बताया कि तटबंध निर्माण के लिए उनकी तीन बीघे जमीन ली गई थी लेकिन अभी तक मुआवजा नहीं मिला। वह अधिकारियों से मुआवजा मांगते-मांगते थक गए हैं। लालनगर निवासी जग्गू ने बताया कि चार बीघा जमीन अधिग्रहीत की गई थी। अधिकारियों ने बजट मिलने पर मुआवजा देने का भरोसा दिलाया था लेकिन अभी तक पैसा नहीं मिला। परिवार चलाने के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है।
बाघाजोत के रहने वाले हीरालाल गौतम ने बताया कि दर्जनों बार प्रार्थनापत्र देने पर भी मुआवजा नहीं मिला। हरिराम ने बताया कि वह ड्रेनेज खंड के अधिकारियों से लगातार मुआवजे की मांग करते रहे मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
इसी तरह राम अवतार, बकरीदी, अंसार अहमद, शादाब अहमद, विनोद, दिनेश, रामप्रसाद, रमेश, गुलबीबी, ताज मोहम्मद, छोटकन, रूपकला, लीलावती, ऊषा, बरसाती, मेवालाल, बजरंगी, हीरालाल, खुरशेद व संदीप आदि को भी मुआवजे का इंतजार है।
एडीएम प्रदीप कुमार का कहना है कि मुआवजे की धनराशि को लेकर विभाग और किसानों में सहमति नहीं बन पाने के कारण कुछ किसानों को मुआवजे का भुगतान नहीं हो पाया था। अब किसानों ने अपनी सहमति दे दी है। जल्द ही सभी किसानों को तटबंध निर्माण के लिए अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा मिल जाएगा।