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Balrampur News: ई-बाल से पीने योग्य बनेगा सूर्यकुंड का पानी
Sat, 26 Aug 2023 06:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 26 Aug 2023 06:35 PM IST
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फोटो -7
देवीपाटन स्थित सूर्यकुंड के जल को शुद्ध करने पहुंची वैज्ञानिकों की टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
तुलसीपुर (बलरामपुर)। शक्तिपीठ देवीपाटन स्थित सूर्यकुंड के पानी को पीने योग्य बनाने की कवायद शुरू हो गई है। सूर्यकुंड के पानी को शुद्ध करने के लिए बायोटेक्नोलाॅजी के वैज्ञानिकों की टीम देवीपाटन पहुंच गई है। सूर्यकुंड में ई-बाल डालने से आठ माह बाद इसका पानी पूरी तरह शुद्ध होकर पीने योग्य बन जाएगा।
बायोटेक्नोलाॅजी के वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत कुमार शर्मा ने बताया कि उनकी टीम ने पानी को शुद्ध करने के लिए ई-बाल विकसित किया है। ई-बाल डालने से पानी के लिए आवश्यक 14 प्रकार के सूक्ष्मजीवों का निर्माण होता है। यही सूक्ष्मजीव जल को पूरी तरह से स्वच्छ कर देते हैं। तालाब, सरोवर व कुओं में स्नान करने पर साबुन, सर्फ व शैंपू में प्रयुक्त केमिकल जल को स्वच्छ करने वाले सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देते हैं, जिससे पानी दूषित हो जाता है।
पेयजल की किल्लत को देखते हुए ई-बाल विकसित किया गया है। एक ई-बाल की कीमत लगभग 9 रुपये आती है। एक एकड़ क्षेत्रफल एवं 15 से 18 फीट गहरे तालाब या जलाशय में आठ महीने के अंदर 620 ई-बाल डालने से जलाशय का पानी पूरी तरह शुद्ध होकर पीने योग्य हो जाएगा। एक ई-बाल में छह करोड़ सूक्ष्मजीव उत्पन्न होते हैं। ऐसे में एक बार पानी शुद्ध होने के बाद दोबारा ई-बाल डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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शनिवार को शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर के महंत मिथलेश नाथ योगी की उपस्थिति में वैज्ञानिकों की टीम ने पहले सूर्यकुंड के पानी की जांच की। पानी में गंदगी के स्तर की पहचान करने के बाद ई-बाल के असर का अध्ययन किया। बायोटेक्नोलाॅजी के वैज्ञानिकों ने बताया कि सूर्यकुंड के पानी को पीने योग्य बनाने के लिए आठ माह का समय लिया जाएगा। हर 15 दिन में 60 ई-बाल डाली जाएगी। आठ माह के अंदर सूर्यकुंड का पानी पूरी तरह शुद्ध होकर पीने योग्य बन जाएगा। वैज्ञानिकों की टीम में मनीष कुमार, नितेश राय व अरुण गुप्ता आदि भी शामिल रहे।
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देवीपाटन स्थित सूर्यकुंड के जल को शुद्ध करने पहुंची वैज्ञानिकों की टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
तुलसीपुर (बलरामपुर)। शक्तिपीठ देवीपाटन स्थित सूर्यकुंड के पानी को पीने योग्य बनाने की कवायद शुरू हो गई है। सूर्यकुंड के पानी को शुद्ध करने के लिए बायोटेक्नोलाॅजी के वैज्ञानिकों की टीम देवीपाटन पहुंच गई है। सूर्यकुंड में ई-बाल डालने से आठ माह बाद इसका पानी पूरी तरह शुद्ध होकर पीने योग्य बन जाएगा।
बायोटेक्नोलाॅजी के वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत कुमार शर्मा ने बताया कि उनकी टीम ने पानी को शुद्ध करने के लिए ई-बाल विकसित किया है। ई-बाल डालने से पानी के लिए आवश्यक 14 प्रकार के सूक्ष्मजीवों का निर्माण होता है। यही सूक्ष्मजीव जल को पूरी तरह से स्वच्छ कर देते हैं। तालाब, सरोवर व कुओं में स्नान करने पर साबुन, सर्फ व शैंपू में प्रयुक्त केमिकल जल को स्वच्छ करने वाले सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देते हैं, जिससे पानी दूषित हो जाता है।
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पेयजल की किल्लत को देखते हुए ई-बाल विकसित किया गया है। एक ई-बाल की कीमत लगभग 9 रुपये आती है। एक एकड़ क्षेत्रफल एवं 15 से 18 फीट गहरे तालाब या जलाशय में आठ महीने के अंदर 620 ई-बाल डालने से जलाशय का पानी पूरी तरह शुद्ध होकर पीने योग्य हो जाएगा। एक ई-बाल में छह करोड़ सूक्ष्मजीव उत्पन्न होते हैं। ऐसे में एक बार पानी शुद्ध होने के बाद दोबारा ई-बाल डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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शनिवार को शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर के महंत मिथलेश नाथ योगी की उपस्थिति में वैज्ञानिकों की टीम ने पहले सूर्यकुंड के पानी की जांच की। पानी में गंदगी के स्तर की पहचान करने के बाद ई-बाल के असर का अध्ययन किया। बायोटेक्नोलाॅजी के वैज्ञानिकों ने बताया कि सूर्यकुंड के पानी को पीने योग्य बनाने के लिए आठ माह का समय लिया जाएगा। हर 15 दिन में 60 ई-बाल डाली जाएगी। आठ माह के अंदर सूर्यकुंड का पानी पूरी तरह शुद्ध होकर पीने योग्य बन जाएगा। वैज्ञानिकों की टीम में मनीष कुमार, नितेश राय व अरुण गुप्ता आदि भी शामिल रहे।