{"_id":"66d0b6875a43d8de0205bcf9","slug":"sisters-of-the-groups-will-increase-economic-prosperity-through-animal-husbandry-balrampur-news-c-99-1-brp1008-113677-2024-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: पशुपालन से समूहों की दीदी बढ़ाएंगी आर्थिक समृद्धि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: पशुपालन से समूहों की दीदी बढ़ाएंगी आर्थिक समृद्धि
Thu, 29 Aug 2024 11:27 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 29 Aug 2024 11:27 PM IST
विज्ञापन
महिला सशक्तीकरण : मुर्गी व बकरी पालन योजना से जोड़ने की तैयारी
छह ब्लॉकों के 60 गांवों में पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलेगा अभियान
बलरामपुर। बिहार की तर्ज पर समूहों की दीदी को पशुपालन का तौर तरीका सिखाने की तैयारी की जा रही है। मुर्गी व बकरी पालन योजना से समूहों की दीदी को जोड़ा जाएगा। छह ब्लॉकों के 60 गांवों में पॉयलेट प्रोजेक्ट के तौर पर अभियान चलाया जाएगा। पशु सखियां समूहों की दीदी को पशुपालन से लाभ कमाने का तरीका सिखाएंगी। पशुपालन के जरिए समूहों की दीदी अपनी आर्थिक समृद्धि को बढ़ा सकेंगी।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन व पशुपालन विभाग संयुक्त रूप से जिले के छह ब्लॉकों में समूहों की दीदी से मुर्गी व बकरी पालन का पॉयलेट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। जिले के छह ब्लॉकों के 60 पशु सखियों को ए-हेल्प एजेंट का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी पशु चिकित्सालयों के साथ समन्वय बनाना है, ताकि आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाएं जैसे एथनो-वेट प्रथाओं, पशु रोगों की रोकथाम, समय पर टीकाकरण, कृमिनाशक दवाएं, कृत्रिम गर्भाधान, पशु बीमा गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराया जा सके। पशु सखियां समूहों की दीदियों की पशुपालन में मदद करेंगी। आजीविका निधि से डेढ़ लाख रुपये व ग्राम संगठन से दो लाख रुपये का ऋण दिलाने में मदद करेंगी। समूहों की दीदियों के पशुओं की बिक्री के लिए पशु सखियां बाजार लगवाएंगी, इसके लिए जिले में 36 कलस्टर बनाए गए हैं। (संवाद)
पशु सखियों की आय में होगी बढ़ोत्तरी
जिला मिशन प्रबंधक अनिल कुमार दुबे ने बताया कि ए-हेल्प कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पशु सखियों की आय को बढ़ावा देना है, जिससे उनकी वार्षिक आय 60,000 रुपये तक बढ़ सकती है। पशु सखियों को आवश्यक कौशल और ज्ञान से लैस करने के लिए प्रशिक्षण योजनाएं विकसित की गई हैं ताकि वे अपनी भूमिकाओं को प्रभावी ढंग से निभा सकें। ए हेल्प कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए मंच तैयार है।
विज्ञापन
पशु सखियाें का काम
पशु सखियां किसानों को सलाह देंगी कि वे अपने पशुओं की देखभाल कैसे करें। किसान समूहों और बाजारों से जोड़कर उन्हें बेचने के लिए पालने के फायदे बताएंगी। पशुपालकों को पशु सखियां पशुओं का टीकाकरण, आवास प्रबंधन, पशुओं की स्वच्छता, नस्ल सुधार व अच्छी नस्ल पालकर उत्पादन बढ़ाने के बारे में बताएंगी।
शीघ्र प्रशिक्षण कराने की तैयारी
जिले की 60 पशु सखियों को मंडल मुख्यालय गोंडा में शीघ्र प्रशिक्षण दिलाने की तैयारी की जा रही है। दो बैच में 30-30 पशु सखियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
-मंजू त्रिवेदी, डीसी एनआरएलएम
विज्ञापन
छह ब्लॉकों के 60 गांवों में पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलेगा अभियान
बलरामपुर। बिहार की तर्ज पर समूहों की दीदी को पशुपालन का तौर तरीका सिखाने की तैयारी की जा रही है। मुर्गी व बकरी पालन योजना से समूहों की दीदी को जोड़ा जाएगा। छह ब्लॉकों के 60 गांवों में पॉयलेट प्रोजेक्ट के तौर पर अभियान चलाया जाएगा। पशु सखियां समूहों की दीदी को पशुपालन से लाभ कमाने का तरीका सिखाएंगी। पशुपालन के जरिए समूहों की दीदी अपनी आर्थिक समृद्धि को बढ़ा सकेंगी।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन व पशुपालन विभाग संयुक्त रूप से जिले के छह ब्लॉकों में समूहों की दीदी से मुर्गी व बकरी पालन का पॉयलेट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। जिले के छह ब्लॉकों के 60 पशु सखियों को ए-हेल्प एजेंट का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी पशु चिकित्सालयों के साथ समन्वय बनाना है, ताकि आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाएं जैसे एथनो-वेट प्रथाओं, पशु रोगों की रोकथाम, समय पर टीकाकरण, कृमिनाशक दवाएं, कृत्रिम गर्भाधान, पशु बीमा गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराया जा सके। पशु सखियां समूहों की दीदियों की पशुपालन में मदद करेंगी। आजीविका निधि से डेढ़ लाख रुपये व ग्राम संगठन से दो लाख रुपये का ऋण दिलाने में मदद करेंगी। समूहों की दीदियों के पशुओं की बिक्री के लिए पशु सखियां बाजार लगवाएंगी, इसके लिए जिले में 36 कलस्टर बनाए गए हैं। (संवाद)
विज्ञापन
पशु सखियों की आय में होगी बढ़ोत्तरी
जिला मिशन प्रबंधक अनिल कुमार दुबे ने बताया कि ए-हेल्प कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पशु सखियों की आय को बढ़ावा देना है, जिससे उनकी वार्षिक आय 60,000 रुपये तक बढ़ सकती है। पशु सखियों को आवश्यक कौशल और ज्ञान से लैस करने के लिए प्रशिक्षण योजनाएं विकसित की गई हैं ताकि वे अपनी भूमिकाओं को प्रभावी ढंग से निभा सकें। ए हेल्प कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए मंच तैयार है।
विज्ञापन
पशु सखियाें का काम
पशु सखियां किसानों को सलाह देंगी कि वे अपने पशुओं की देखभाल कैसे करें। किसान समूहों और बाजारों से जोड़कर उन्हें बेचने के लिए पालने के फायदे बताएंगी। पशुपालकों को पशु सखियां पशुओं का टीकाकरण, आवास प्रबंधन, पशुओं की स्वच्छता, नस्ल सुधार व अच्छी नस्ल पालकर उत्पादन बढ़ाने के बारे में बताएंगी।
शीघ्र प्रशिक्षण कराने की तैयारी
जिले की 60 पशु सखियों को मंडल मुख्यालय गोंडा में शीघ्र प्रशिक्षण दिलाने की तैयारी की जा रही है। दो बैच में 30-30 पशु सखियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
-मंजू त्रिवेदी, डीसी एनआरएलएम