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Balrampur News: छह महीने में उखड़ गई सड़क, गुणवत्ता पर उठे सवाल

Sat, 19 Sep 2026 10:32 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Sat, 19 Sep 2026 10:32 PM IST
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Road crumbles within six months; questions raised about quality
फोटो-18-बलरामपुर के अचलापुर वार्ड जाने वाली जर्जर सड़क ।-संवाद
बलरामपुर। बारिश में शहर से गांव तक सड़कों पर गड्ढे उभर आते हैं। कहीं सड़क की ऊपरी परत उखड़ जाती है तो कहीं जलभराव के कारण सड़क आवागमन के लायक नहीं रह जाती। हर साल मरम्मत के लिए बजट जारी होता है और काम भी कराया जाता है, लेकिन अगली बारिश में फिर वही स्थिति सामने आ जाती है। इससे सड़कों की गुणवत्ता और निर्माण के बाद उनके अनुरक्षण की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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गैसड़ी क्षेत्र में सोनपुर से पडरौना, पुरैना होते हुए बालापुर को जोड़ने वाली संपर्क सड़क इसका ताजा उदाहरण है। एक सितंबर 2026 को हुए हादसे के बाद यहां की बदहाल स्थिति सामने आई। सड़क निर्माण को अभी छह महीने भी पूरे नहीं हुए थे, लेकिन जगह-जगह सड़क क्षतिग्रस्त होकर गड्ढों में तब्दील हो गई। पडरौना मोड़ पर करीब दो फीट गहरा गड्ढा भी सामने आया है।
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जिले में इससे पहले भी कई सड़कों के निर्माण में लापरवाही के मामले सामने आ चुके हैं। दिसंबर 2024 में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई कुछ सड़कों के नमूने प्रयोगशाला जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। जांच में तारकोल और इमल्शन के मानकों के साथ बजरी के इस्तेमाल में भी गड़बड़ी की बात सामने आई थी।
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उस समय गड्ढामुक्त अभियान के तहत लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड ने 212.82 किलोमीटर और निर्माण खंड ने 322.70 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत कराई थी। इस पर करीब ढाई करोड़ रुपये का बजट खर्च किया गया था। इसके बावजूद बारिश के बाद सड़कों के फिर खराब होने का सिलसिला जारी है।



फरवरी 2024 में सामने आया एक मामला निर्माण और अनुरक्षण की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 5.725 किलोमीटर सड़क के निर्माण के लिए 5.59 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी थी। इसके साथ पांच साल के अनुरक्षण के लिए 52.82 लाख रुपये निर्धारित किए गए थे। निर्माण पूरा हुए बिना ही कार्यस्थल के बोर्ड पर निर्माण अवधि 27 अगस्त 2022 से 26 अगस्त 2023 और अनुरक्षण अवधि 27 अगस्त 2023 से 26 अगस्त 2028 दर्ज थी। बोर्ड पर सड़क की चौड़ाई 5.50 मीटर और बिटुमिन कंक्रीट की 30 मिलीमीटर मोटी परत का मानक भी दर्ज था।



बारिश के बाद मरम्मत पर करोड़ों की योजना

जनवरी 2025 में पीडब्ल्यूडी ने बारिश और बाढ़ से बदहाल 48 सड़कों की मरम्मत के लिए 7.32 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बनाई थी। इनमें सदर विधानसभा क्षेत्र की नौ सड़कों पर 1.60 करोड़ रुपये और उतरौला की 39 सड़कों पर 5.71 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। विभाग के मुताबिक, इन सड़कों से करीब पांच लाख लोगों को आवागमन में सुविधा मिलनी थी।

इसके बाद मार्च 2026 में बाढ़ और बारिश से प्रभावित नौ सड़कों की मरम्मत के लिए 14.89 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई। योजना में सात संपर्क मार्गों के निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड और दो संपर्क मार्गों की जिम्मेदारी प्रांतीय खंड को दी गई थी। पहली किस्त के रूप में दोनों खंडों को धन भी आवंटित किया गया है।


किसी सड़क के पुनर्निर्माण तो किसी की मरम्मत की जरूरत

हरैया-नारायनपुर-कौवापुर मार्ग: 11.500 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण के लिए 28.70 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी। परियोजना में सड़क की चौड़ाई बढ़ाने का काम प्रस्तावित है।



उतरौला-सिद्धार्थनगर सीमा तक मार्ग: उतरौला से महुआ बाजार तक करीब 20.5 किलोमीटर सड़क को 10 मीटर चौड़ा करने के लिए लगभग 75 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई थी।



तुलसीपुर-उतरौला मुख्य मार्ग: करीब नौ किलोमीटर सड़क को सात मीटर चौड़ा करने और नए सिरे से बनाने के लिए 32 करोड़ रुपये की योजना सामने आई थी।



सोनपुर-पडरौना-पुरैना-बालापुर संपर्क मार्ग: निर्माण के करीब छह महीने में ही सड़क खराब होने लगी। पडरौना मोड़ पर करीब दो फीट गहरा गड्ढा भी सामने आया। यह सड़क निर्माण की गुणवत्ता और अनुरक्षण व्यवस्था की जांच का महत्वपूर्ण उदाहरण है।



कहीं निलंबन, कहीं वसूली के आदेश, फिर भी सवाल बाकी

बेलहा-इटवा मार्ग (एनएच-159) पर निर्माणाधीन पुल के पास निर्माण में लापरवाही के मामले में लोक निर्माण विभाग ने अवर अभियंता रामशंकर यादव और चंद्रशेखर यादव को निलंबित किया था। इसके साथ ही बलरामपुर बाईपास के चौड़ीकरण में स्वीकृत बजट से 1.61 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए जाने का मामला सामने आया था। शासन ने अधिक खर्च की गई धनराशि की वसूली और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए थे।



दिसंबर 2024 में जिले में करोड़ों रुपये से बनी सड़कों के नमूने प्रयोगशाला जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। तारकोल, इमल्शन और बजड़ी के इस्तेमाल में कमियां मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी। ऐसे मामलों के सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी और अनुरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं।


अधिकारियों ने किया मरम्मत का दावा, गुणवत्ता का भरोसा

नगर पालिका बलरामपुर के ईओ लालचंद्र मौर्या ने बताया कि अचलापुर वार्ड की सड़क करीब एक वर्ष पहले बनी है। बारिश के कारण जलभराव और कीचड़ की समस्या की जानकारी मिली है।



अधिशासी अभियंता लोक निर्माण राजेश कुमार ने बताया कि बारिश के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों का निरीक्षण कराया जाएगा। सड़क के निर्माण, स्वीकृत लागत, कार्यदायी संस्था, अनुबंध की शर्तों और अनुरक्षण अवधि से संबंधित अभिलेखों की जांच की जाएगी। जिन स्थानों पर गड्ढे या सड़क की सतह खराब हुई है, वहां प्राथमिकता के आधार पर पैचवर्क और मरम्मत कराई जाएगी।


अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड कुमार शैलेंद्र ने बताया कि क्षतिग्रस्त सड़कों को चिह्नित कर आवश्यकतानुसार पैचवर्क और मरम्मत कराई जाती है। निर्माण कार्य का निरीक्षण किया जाता है। यदि सड़क की खराबी गुणवत्ता में कमी या किसी अन्य एजेंसी की खोदाई के कारण पाई जाती है तो जांच के बाद नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।

फोटो-18-बलरामपुर के अचलापुर वार्ड जाने वाली जर्जर सड़क ।-संवाद

फोटो-18-बलरामपुर के अचलापुर वार्ड जाने वाली जर्जर सड़क ।-संवाद

फोटो-18-बलरामपुर के अचलापुर वार्ड जाने वाली जर्जर सड़क ।-संवाद

फोटो-18-बलरामपुर के अचलापुर वार्ड जाने वाली जर्जर सड़क ।-संवाद

फोटो-18-बलरामपुर के अचलापुर वार्ड जाने वाली जर्जर सड़क ।-संवाद

फोटो-18-बलरामपुर के अचलापुर वार्ड जाने वाली जर्जर सड़क ।-संवाद

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