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Balrampur News: स्वास्थ्य घोटाले में अब अफसरों की बारी, चार जिलों के रिकॉर्ड खंगाल रही विजिलेंस

Mon, 24 Aug 2026 12:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Mon, 24 Aug 2026 12:13 AM IST
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Now it is the turn of officials in the health scam; the Vigilance department is scrutinizing records from four districts.
बलरामपुर। स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2014 से 2022 के बीच हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की जांच अब सिर्फ फर्मों और भुगतान तक सीमित नहीं रह गई है। विजिलेंस ने उन अधिकारियों की भूमिका भी खंगालनी शुरू कर दी है, जिनके कार्यकाल में पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव से जुड़ी फर्मों को भुगतान और काम दिए गए। बलरामपुर के साथ गोंडा, बहराइच और श्रावस्ती के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े रिकॉर्ड जांच के केंद्र में हैं। वहीं मामले में आरोपी सीएमओ और सीएमएस के अभियोजन स्वीकृति का विजिलेंस इंतजार कर रही है। शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
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जांच में सबसे अहम कड़ी भुगतान की स्वीकृति और खरीद प्रक्रिया को माना जा रहा है। विजिलेंस ने तत्कालीन अधिकारियों के कार्यकाल में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद, बजट आवंटन, बिलों के भुगतान, अनुरक्षण कार्य और विभिन्न योजनाओं में हुए खर्च का ब्योरा जुटाया है। मुकेश श्रीवास्तव और उनसे जुड़ी फर्मों को दिए गए काम और भुगतान का मिलान भी कराया जा रहा है। वर्ष 2017 से 2021 के बीच संयुक्त जिला चिकित्सालय में सीएमएस रहे डॉ. प्रवीन कुमार श्रीवास्तव की भूमिका भी जांच में सामने आई है। इस अवधि के दस्तावेजों और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। जांच में पूर्व विधायक के साथ उनके भाई अजय श्रीवास्तव समेत अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
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गायब फाइलों से जांच पर पड़ रहा असर, छानबीन तेज
-- जांच के दौरान कुछ पुराने अभिलेख उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। इसके बाद विजिलेंस जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी और पीएचसी तक पुराने रिकॉर्ड जुटा रही है। जिन कर्मचारियों के पास अभिलेख उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है, उनसे भी पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के अनुसार संयुक्त जिला अस्पताल के एक लिपिक की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। अभिलेखों के रखरखाव और उन्हें उपलब्ध कराने में उसकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है। विजिलेंस की अगली कार्रवाई में उससे पूछताछ के साथ अन्य कदम उठाए जा सकते हैं।
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एक-एक भुगतान का तैयार हो रहा हिसाब
-- विजिलेंस अब यह भी देख रही है कि किस अधिकारी के कार्यकाल में किस फर्म को कितना भुगतान हुआ, किस मद से बजट जारी हुआ और भुगतान से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं। चार जिलों से जुटाए जा रहे रिकॉर्ड के आधार पर अधिकारियों और फर्मों के बीच कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
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