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Balrampur News: पंचायतों में शिक्षा का माहौल बनाएंगे मिनी पुस्तकालय
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बलरामपुर। पंचायतों में परिषदीय विद्यालयों के साथ ही अब पुस्तकालय भी शिक्षा का माहौल बनाएंगे। जिले की 793 पंचायतों में 380 पंचायतों में पुस्तकालय स्थापित किए जाने की तैयारी आगे बढ़ी है। इससे गांवों में शिक्षा का माहौल बेहतर होगा और छात्र-छात्राओं से लेकर अन्य लोग जरूरी पुस्तकों का अध्ययन कर सकेंगे।
पुस्तकालय होने से युवा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी घर बैठे कर सकेंगे। इसके लिए गांव के पंचायत भवन में मिनी पुस्तकालय विकसित किए जाएंगे। इनमें धार्मिक ग्रंथ से लेकर प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ी पांच हजार से अधिक पुस्तकें रखी जाएंगी। माना जा रहा है कि गांव स्तर पर पुस्तकालय होगा तो शिक्षा का अलग माहौल बनेगा। खास कर युवा पीढ़ी सही दिशा में जाएगी। सरकार शिक्षा का ढांचा मजबूत बनाने के लिए तमाम प्रकार की योजनाएं चला रही है, जिससे गांव के बच्चे भी बेहतर शिक्षा हासिल कर सकें।
वहीं, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए बच्चों को गैर प्रांत और महानगरों की ओर रुख करना पड़ता है। दरअसल उन्हें तैयारी के लिए जो किताबें चाहिए वह मिल नहीं पाती हैं। इसमें आर्थिक रूप से संपन्न परिवार के बच्चे तो पढ़ाई के लिए चले जाते हैं, लेकिन कुछ बच्चे चाहते हुए भी बाहर नहीं जा पाते हैं। मिनी पुस्तकालय में न सिर्फ प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ी किताबें रहेंगी, बल्कि धार्मिक ग्रंथ और इतिहास और भूगोल से जुड़ी किताबें रहेंगी। साथ ही समय- समय के करेंट अफेयर्स की पुस्तकें आती रहेंगी। इससे हर उम्र के लोग अध्ययन कर सकेंगे। पंचायत राज विभाग के जिला परियोजना प्रबंधक संदीप कश्यप ने बताया कि दो कमरों में पुस्तकालय स्थापित होना है। प्रत्येक पुस्तकालय पर चार लाख रुपये का बजट तय है। बजट मिलने के बाद पुस्तकालय की स्थापना की कार्यवाही पूरी की जाएगी।
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पुस्तकालय होने से युवा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी घर बैठे कर सकेंगे। इसके लिए गांव के पंचायत भवन में मिनी पुस्तकालय विकसित किए जाएंगे। इनमें धार्मिक ग्रंथ से लेकर प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ी पांच हजार से अधिक पुस्तकें रखी जाएंगी। माना जा रहा है कि गांव स्तर पर पुस्तकालय होगा तो शिक्षा का अलग माहौल बनेगा। खास कर युवा पीढ़ी सही दिशा में जाएगी। सरकार शिक्षा का ढांचा मजबूत बनाने के लिए तमाम प्रकार की योजनाएं चला रही है, जिससे गांव के बच्चे भी बेहतर शिक्षा हासिल कर सकें।
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वहीं, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए बच्चों को गैर प्रांत और महानगरों की ओर रुख करना पड़ता है। दरअसल उन्हें तैयारी के लिए जो किताबें चाहिए वह मिल नहीं पाती हैं। इसमें आर्थिक रूप से संपन्न परिवार के बच्चे तो पढ़ाई के लिए चले जाते हैं, लेकिन कुछ बच्चे चाहते हुए भी बाहर नहीं जा पाते हैं। मिनी पुस्तकालय में न सिर्फ प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ी किताबें रहेंगी, बल्कि धार्मिक ग्रंथ और इतिहास और भूगोल से जुड़ी किताबें रहेंगी। साथ ही समय- समय के करेंट अफेयर्स की पुस्तकें आती रहेंगी। इससे हर उम्र के लोग अध्ययन कर सकेंगे। पंचायत राज विभाग के जिला परियोजना प्रबंधक संदीप कश्यप ने बताया कि दो कमरों में पुस्तकालय स्थापित होना है। प्रत्येक पुस्तकालय पर चार लाख रुपये का बजट तय है। बजट मिलने के बाद पुस्तकालय की स्थापना की कार्यवाही पूरी की जाएगी।
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